भारत में औद्योगिक विकास में भारी गिरावट

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Image caption औद्योगिक उत्पादन के आंकड़ों ने सरकार में चिंता पैदा कर दी है

औद्योगिक विकास के नए आंकड़ों पर निराशा जाहिर करते हुए वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा है कि वैश्विक स्तर पर मांग और निवेश की गतिविधियों में आई कमी की वजह से ऐसा हुआ है.

पत्रकारों से बात करते हुए वित्तमंत्री ने कहा, "आद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) के आंकड़े निराश करने वाले हैं. वैश्विक स्तर पर व्यावसायिक गतिविधियों का कमजोर होने का असर घरेलू स्तर पर निजी निवेश पर भी पड़ रहा है."

देश में औद्योगिक उत्पादन का अनुमान आद्योगिक उत्पादन सूचकांक से लगाया जाता है और नए आंकड़े बताते हैं कि मार्च में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक पाँच वर्षों में सबसे कम यानी 3.5 पर रहा है. पिछले वर्ष मार्च में ये 9.5 प्रतिशत था.

इन आंकड़ों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा, "घरेलू स्तर पर निवेश में सुधार कमज़ोर रहा...हालांकि रिजर्व बैंक ने अपनी मौद्रिक नीति में बदलाव की घोषणा की है लेकिन ब्याज दरों में कमी आने में थोड़ा वक्त लगेगा."

इन आंकड़ों पर चिंता जाहिर करते हुए केंद्रीय उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री आनंद शर्मा ने कहा है कि वे इस महीने कुछ विशेषज्ञों से मिल रहे हैं, जिससे कि मंदी का वैश्विक स्तर पर मांग आए असर का विश्लेषण किया जा सके.

वित्तीय वर्ष 2010-11 में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक 8.2 था जबकि इस वित्तीय वर्ष में यह 2.8 से ऊपर नहीं जा सका है.

आईआईपी में 75 प्रतिशत भूमिका उत्पादन सेक्टर की होती है और आंकड़ों के अनुसार उप्तादन मार्च में 4.4 प्रतिशत रह गया था जबकि पिछले वर्ष मार्च में उत्पादन की दर 11 प्रतिशत थी.

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