काबू में ही नहीं महंगाई, फिर बढ़ी

सब्जियाँ
Image caption सब्जियों की कीमतों में 60 प्रतिशत तक की बढ़ोत्तरी हुई है

एक ओर भारतीय रिजर्व बैंक धीमी पड़ती आर्थिक विकास दर को गति देने और बढ़ती महंगाई को काबू पाने की कोशिश कर रहा है लेकिन इसका असर आंकड़ों पर फिलहाल दिखाई नहीं दे रहा है.

वाणिज्य मंत्रालय की ओर से सोमवार को जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार अप्रैल में महंगाई 7.23 प्रतिशत की दर से बढ़ी जबकि मार्च में महंगाई की दर 6.89 प्रतिशत थी.

कहा जा रहा है कि खाद्य पदार्थों, ईंधन और उत्पादों के मूल्य में हुई बढ़ोत्तरी की वजह से महंगाई बढ़ी है.

महंगाई की ये दर वर्ष 2011 की महंगाई से कम है जब क़ीमतें नौ प्रतिशत की दर से बढ़ रही थी.

समाचार एजेंसी रॉयटर्स का कहना है कि हालांकि अब ये घट गई है लेकिन अभी भी भारत में महंगाई की दर ब्रिक्स देशों, यानी ब्राजील, रूस, चीन और दक्षिण अफ्रीका से अधिक है.

रिजर्व बैंक के प्रयासों का असर नहीं

महंगाई पर काबू पाने के लिए रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया ने मार्च 2010 से गत वर्ष अक्तूबर के बीच ब्याज दरों में 3.75 प्रतिशत तक की बढ़ोत्तरी की.

लेकिन जब ये साफ हो गया कि विकास की दर कमी आई तो पिछले महीने रिजर्ब बैंक ने अपनी मौद्रिक नीति बदली और ब्याज दर में 50 बेसिस पॉइंट की कटौती की घोषणा की.

वैसे अप्रैल के आंकड़े बताते हैं कि रिजर्व बैंक की रणनीति महंगाई पर काबू पाने में फिलहाल कारगर साबित नहीं हुई है.

रॉयटर्स ने एचएसबीसी में भारत और आसियान मामलों के मुख्य अर्थशास्त्री लीफ़ एस्केसेन के हवाले से कहा है, "ताजा आंकड़ों से यह बात जाहिर होती है कि रिजर्व बैंक के पास मौद्रिक नीति में ब्याज दरों में और कटौती की सीमित गुंजाइश है क्योंकि इससे महंगाई का सीधा संबंध है."

उनका कहना है कि ये महंगाई ढाँचागत दिखाई देती है, ऐसे में यदि रिजर्व बैंक दरों में ज्यादा कटौती करती है तो महंगाई और बढ़ सकती है.

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