किसी तरह मंदी से बचा यूरोजोन ....

Image caption 'यूरो' मुद्रा के लागू होने से यूरोजोन के कुछ देशों को फायदा हुआ, तो कुछ ही वर्षों के बाद आई आर्थिक मंदी ने अन्य देशों को पछाड़ दिया.

बड़ी मुश्किल से सत्रह देशों का समूह, यूरोजोन, एक बार फिर मंदी के दौर में फंसने से बच पाया है.

सांख्यिकी एजंसी, यूरोस्टैट के मुताबिक वर्ष 2012 के पहले तीन महीनों में यूरोजोन की आर्थिक विकास दर शून्य रही है.

लेकिन ढांढस बंधाते ये आंकड़े यूरोजोन के अलग-अलग देशों की असमान स्थिति पर रोशनी नहीं डालते.

दरअसल यूरोजोन के मंदी से बचने की वजह मुख्य तौर पर जर्मनी की अर्थव्यवस्था का उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन है.

जर्मनी की विकास दर 0.5 प्रतिशत बढ़ी है. इसकी मूल वजह यूरोपीय यूनियन के बाहर के देशों को जर्मनी का बढ़ता निर्यात है.

वहीं यूरोजोन के दक्षिणी देशों की अर्थव्यवस्थाएं मुश्किल दौर से गुजर रही हैं.

पिछले तीन महीनों में इटली की विकास दर 0.8 प्रतिशत, स्पेन की 0.3 प्रतिशत और ग्रीस की 6.2 प्रतिशत घटी है.

'यूरो' मुद्रा का प्रभाव

ये आंकड़े यूरोप की ऐसी तस्वीर सामने लाते हैं जिसमें वर्ष 1999 में ‘यूरो’ मुद्रा के लाए जाने के बाद कुछ देशों को बहुत फायदा हुआ वहीं अन्य पिछड़ गए.

‘यूरो’ मुद्रा आने की बदौलत, जर्मनी के उद्योग जगत को बढ़ावा मिला और विश्व में उसका उत्पाद सस्ता हुआ.

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Image caption ग्रीस में सरकारी खर्च में कटौती के यूरोजोन के प्रस्ताव पर विभिन्न पार्टियों में असहमति के चलते सरकार बनने में दिक्कतें आ रही हैं.

वहीं दक्षिणी युरोप में यूरो की ब्याज दरें लागू होने के बाद कर लेना सस्ता हो गया जिसके चलते निजी क्षेत्र, खास तौर पर बैंकों, घर खरीदने वालों और रियल एस्टेट उद्योग से जुड़े लोगों ने आधिकाधक कर लिए.

वर्ष 2007 में आर्थिक मंदी के आने से निर्माण क्षेत्र को झटका लगा और बेरोजगारी तेजी से बढ़ी.

ऐसे में सरकारों को घाटे से भी जूझना पड़ा और साथ ही रोजगार के आयाम बनाने का दबाव बढ़ा.

विवाद

इस परिस्थिति में ग्रीस और स्पेन समेत अन्य देश अपनी मुद्रा का अवमूल्यन कर अपने उत्पाद को सस्ता बनाना चाहते हैं ताकि उनकी आर्थिक विकास दर बढ़े.

लेकिन यूरोजोन के सदस्य होने की वजह से वो ऐसा नहीं कर सकते.

इसीलिए फ्रांस और ग्रीस जैसे देश मंदी से उबरने के लिए ऐसी योजना को अमल में लाना चाहते हैं जो विकास पर केंद्रित हो.

वे जर्मनी की ओर से सुझाए गए आर्थिक कटौती के कड़े कदमों तक खुद को सीमित नहीं रखना चाहते.

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