खर्च में कटौती पर कड़े निर्णय लेंगे: प्रणव

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Image caption वित्त मंत्री ने विदेशी निवेशकों को आश्वस्त करने के लिए साझा समिति की बात कही

वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा है कि सरकार जल्द ही खर्च की कटौती को लेकर कड़े कदम उठाएगी. हालांकि वित्त मंत्री ने ये साफ नहीं किया कि ये कदम कौन से होंगे.

प्रणब मुखर्जी ने ये राज्यसभा में अपने बयान के दौरान कहा जब विपक्ष ने देश की वित्तीय व्यवस्था पर उठाए.

यूरो, रुपया लुढ़के, बाजारों में खलबली

बुधवार को शेयर और मौद्रिक बाजार में मची उथल पथल के बीच विपक्ष ने मांग की थी कि सरकार अर्थव्यवस्था की स्थिति पर बयान दे.

रुपया डॉलर के विरुद्ध रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुँच गया और सेंसेक्स 16 हजार अंक से भी नीचे गिरा.

हाल के दिनों में सरकार की कई नीतियों जैसे कंपनियों पर टैक्स और अपने फैसलों को लागू न करवा पाने की वजह से उद्योग और व्यापार जगत हतोत्साहित बताया जा रहा है.

लगभग एक घंटे के अपने लंबे बयान के दौरान प्रणब मुखर्जी ने निवेशकों खासतौर पर विदेशी निवेशकों की शंकाओं को दूर करने की कोशिश की.

विपक्ष को शामिल करें, भरोसा बढ़ाएँ

जहां उन्होंने खर्च में कटौती की बात कहकर ये साफ करने की कोशिश की कि सरकार बजट घाटे को कम करने के बारे में प्रतिबद्ध है.

उन्होंने ये भी कहा कि परियोजनाओं को सटीक तरीके से लागू करने के लिए इस प्रकार की व्यवस्था खड़ी की जा सकती है जिसमें विपक्षी राजनीतिक दलों के लोग भी शामिल हों ताकि निवेशकों को ये डर न रहे कि कल दूसरी सरकार के आने पर नीति का लागू होना जारी रहेगा या नहीं.

प्रणब मुखर्जी ने कहा, "अगर सिर्फ मैं विदेशी निवेशकों को किसी नीति पर भरोसा दिलाने की कोशिश करूंगा तो उनका संदेह पूरी तरह रफा-दफा नहीं होगा लेकिन अगर विपक्ष के नेता भी यही कहेंगे तो उन्हें ज्यादा भरोसा होगा."

वित्त मंत्री ने ये भी कहा कि सरकारें आ सकती है और जा सकती है लेकिन नीतियों के जारी रहने पर लोगों को भरोसा दिलाना जरूरी है.

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Image caption बुधवार को रुपया चार माह के सबसे नीचे स्तर तक गिरा

इसे विपक्षी दलों को उनकी जिम्मेदारी याद दिलाने की प्रणब मुखर्जी की कोशिश की तौर पर भी देखा जा रहा है जिसने हाल के दिनों में सरकार की कई नीतियों के पास होने की राह में रोड़े अटकाए हैं.

राज्यों की जिम्मेदारी

जानकारों के मुताबिक इस सोच को इस बात से और बल मिला जब कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय बाजारों में लगातार ऊंची रह रही कीमतों की बात करते हुए प्रणब मुखर्जी ने इशारों में कह दिया कि नागरिकों को कम दाम पर तेल सप्लाई कर पाने की जिम्मेदारी महज केंद्र सरकार की नहीं.

प्रणब मुखर्जी ने साफ किया कि तेल पर कर द्वारा जो राजस्व वसूल किए जाते हैं उसमें राज्य सरकार का बड़ा हिस्सा होता है.

हाल के दिनों में कई जगह से ये बात कही जाती रही है कि अगर राज्य पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतें कम रखना चाहते हैं तो वो अपने क्षेत्र में इन पदार्थों पर वसूले जाने वाले कर पर रोक लगा दें.

वित्त मंत्री का कहना था कि मनमोहन सिंह सरकार देश के भीतर मांग को बढ़ावा देकर आर्थिक बढ़ोतरी में यकीन रखती है.

उन्होंने कहा कि सरकार ने पिछले सालों में देश के पूरबी इलाकों में कृषि क्षेत्र में जो दूसरी हरित क्रांति की बात कही थी और उसके लिए जिस तरह की मदद मुहैया करवाए उसका नतीजा है उसके सकारात्मक नतीजे सामने आ रहे हैं.

निर्माण क्षेत्र का जीडीपी में योगदान बढ़े

उन्होंने कहा कि इस साल चावल की फसल में पूरबी क्षेत्र में 70 लाख टन की अधिक पैदावार हुई है.

प्रणब मुखर्जी ने कहा कि इस वर्ष चावल की कुल फसल 1.30 लाख टन है जबकि देश में अनाज की कुल पैदावार 25.3 लाख टन.

मगर उनका कहना था कि सरकार चाहती है कि निर्माण क्षेत्र का सकल घरेलू उत्पाद में योगदान और बढ़े और वो 20 से 25 फीसद के बीच हो.

लंबे समय से मंहगाई को काबू में रखने के लिए कड़ी मौद्रिक नीति अपना रहे रिजर्व बैंक ने हाल में ही ब्याज दर में कमी लाने की तरफ कदम उठाया है जिसका फायदा उम्मीद की जा रही है उद्योग जगत को पहुंचेगा.

विश्लेषक मान रहे हैं कि आंतरिक मांग पर जोर देने की बात कहकर वित्त मंत्री ने लोगों को ये आश्वस्त प्रदान करने की कोशिश की है कि यूरोप और अमरीका में जारी मंदी जिसका असर निर्यात पर बताया जा रहा है को लेकर भी वो सजग हैं.

यर्थातवादी

लेकिन प्रणब मुखर्जी ने साफ किया कि भारत पूरी तरह वैश्विक घटनाओं और स्थितियों के असर से परे नहीं रह सकता है.

उनका कहना था कि यूरोप में कर्ज संकट का जो दौर है उसका प्रभाव भारत पर भी होगा.

सबसे लंबे समय तक वित्त मंत्री का पद संभालने वालों में से एक और मनमोहन सिंह मंत्रीमंडस के सबसे तजुर्बेकार मंत्री का कहना था कि लोगों को यतार्थवादी होकर ये स्वीकार करना होगा कि भारत में आर्थिक विकास की जो दर हाल के सालों में जारी रही है उसमें कमी या बढ़ोतरी हो सकती है.

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