लंबी कतारों से करोड़ों का नुकसान

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Image caption भारत में गाड़ियों की संख्या 10.76 प्रतिशत से बढ़ रही हैं जबकि सड़कें 4.01 प्रतिशत से बढ़ रही हैं.

भारत में टोल गेटों पर लगने वाली गाड़ियों की लंबी कतारों के चलते सड़क से माल भेजने पर आने वाले खर्च में 4,000 करोड़ की वृ्द्धि हुई है.

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की एक रिपोर्ट में सामने आया है कि दिल्ली-मुंबई राजमार्गों पर गाड़ियों की औसतन गति 17 किलोमीटर प्रति घंटा होती है. इस रफ्तार पर 1,380 किलीमीटर की दूरी तय करने में लगभग तीन दिन लगते हैं.

समाचार पत्र 'इंडियन एक्सप्रेस' में छपी खबर के अनुसार इस रिपोर्ट में कहा गया है कि इस तरह होने वाली देरी की वजह से वार्षिक खर्च 4,000 करोड़ हो गया है जो कि साल 2008-09 के 3,000 करोड़ था.

भारतीय यातायात निगम ने पहले साल 2008-09 और फिर साल 2011-12 में आईआईएम-कलकत्ता के साथ एक संयुक्त अध्ययन कराया था ताकि सड़क से माल भेजने की कार्यक्षमता को आंका जा सके.

अध्ययन में यह भी सामने आया है कि भारत में सड़कों से माल ढोने में 9.08 प्रतिशत से वार्षिक वृद्धि हो रही है, गाड़ियों की संख्या 10.76 प्रतिशत से बढ़ रही हैं जबकि सड़कें 4.01 प्रतिशत से बढ़ रही हैं.

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