औद्योगिक विकास दर में मामूली बढ़ोत्तरी

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Image caption औद्योगिक उत्पादन के आंकड़ों को अर्थशास्त्री उत्साहवर्धक नहीं मान रहे हैं

भारत की औद्योगिक विकास की दर (आईआईपी) अप्रैल में 0.1 प्रतिशत रही है.

इससे पहले महीने यानी मार्च के हिसाब से देखें तो इसे सकारात्मक मान सकते हैं क्योंकि मार्च में औद्योगिक विकास की दर ऋणात्मक थी और -3.5 प्रतिशत तक जा पहुँची थी.

लेकिन अगर पिछले वर्ष अप्रैल से तुलना करके देखें तो इसमें भारी गिरावट है क्योंकि तक औद्योगिक विकास की दर 5.3 प्रतिशत थी.

कहा जा रहा है कि पूंजीगत सामग्री में आई कमी और उत्पादन में आई गिरावट की वजह से आईआईपी में ये गिरावट आई है.

इस आंकड़े को अर्थव्यवस्था के लिए बुरी ख़बर माना जा रहा है कि और कहा जा रहा है कि हो सकता है कि इसकी वजह से रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया को अपने ब्याज दर में और कटौती करनी पड़े.

ये आंकड़े ऐसे समय में आए हैं जब अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी स्टैंडर्ड एंड पूअर्स ने भारत को रेटिंग घटाने की चेतावनी दी है.

चौतरफ़ा गिरावट

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Image caption उत्पादन क्षेत्र के आंकड़े भी पिछले वर्ष की तुलना में गिरावट आई है

इस वर्ष अप्रैल में खनन क्षेत्र में विकास की दर -3.1 प्रतिशत रही जबकि पिछले वर्ष इसी समयावधि में ये दर 1.6 प्रतिशत थी.

वहीं विनिर्माण या उत्पादन के क्षेत्र में अप्रैल में विकास की दर 0.1 प्रतिशत रही है जो पिछले वर्ष 5.7 प्रतिशत थी.

इसी तरह बिजली उत्पादन के क्षेत्र में पिछले वर्ष के 6.5 प्रतिशत के विकास दर के मुकाबले इस वर्ष अप्रैल में विकास की दर 4.6 प्रतिशत रही है.

सबसे बडा़ झटका पूंजीगत सामग्री क्षेत्र के विकास की दर में लगा है जो पिछले वर्ष के 6.6 प्रतिशत के विकास दर से घटकर -16.3 प्रतिशत तक जा पहुँचा है.

आधारभूत सामग्री क्षेत्र में भी विकास की दर 7.1 प्रतिशत से घटकर 2.3 प्रतिशत रह गई है.

पिछले वर्ष की तुलना में जिन क्षेत्रों में सकारात्मक आंकड़े देखने को मिले हैं, उनमें कंज्यूमर ड्यूरेबल गुड्स और नॉन ड्यूरेबल गुड्स के क्षेत्र हैं.

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