विदेशी निवेश के सरकारी हल से बाजार उत्साहित नहीं

  • 25 जून 2012
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Image caption ये कदम वित्त मंत्रालय ने आरबीआई के साथ विचार विमर्श करके उठाए हैं

रुपए का अवमूल्यन रोकने और सुस्त आर्थिक विकास दर का समाधान करने के लिए भारत में सरकारी बॉंड में पूँजी निवेश की सीमा बढ़ाकर 20 अरब डॉलर कर दी है. कंपनियों को रुपए में लिए कर्ज की रीफ़ाइनेंसिंग के लिए 10 अरब डॉलर का ऋण लेने की अनुमति दी है.

पिछले कई हफ्तों से रुपया डॉलर के मुकाबले में लगातार गिर रहा है.

ये कदम रुपए की गिरावट को रोकने और भारतीय अर्थव्यवस्था में और पूँजी लाने के मकसद से उठाए गए हैं लेकिन शेयर बाजारों पर इनका ज्यादा सकारात्मक असर नहीं दिखा.

सेंसेक्स, निफ्टी गिरे

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने सोमवार को संस्थागत वित्तीय निवेशक (एफआईआई) की ओर से सरकारी बॉंड में पूँजी निवेश की सीमा को 15 अरब डॉलर से पाँच अरब डॉलर बढ़ा दिया.

इसका मतलब दीर्घकालिक निवेशक जैसे सॉवरन वेल्थ फंड, बहुराष्ट्रीय एजेंसियाँ, एंडाओमेंट फंड, बीमा फंड, पेंशन फंड और विदेशी केंद्रीय बैंक भारतीय सरकारी बॉंड में 20 अरब डॉलर तक का निवेश कर पाएँगे.

आरबीआई ने कहा है, "उत्पादन और मूलभूत ढांचे के क्षेत्र में काम कर रही भारतीय कंपनियाँ जिनकी विदेशी मुद्रा में आय है, उन्हें विदेशों से व्यावसायिक कर्ज लेने की अनुमति दी गई है. इस कर्ज से वे रुपए में लिए गए कर्ज की अदायगी कर सकते हैं. इसकी सीमा 10 अरब डॉलर रखी गई है."

कितनी देर के लिए पूँजी निवेश किया जा सकता है और इसका लॉकइन पीरियड यानी पैसा रखने की अनिवार्य अवधि में नियमों में ढील दी गई है.

ये सभी कदम रुपए की गिरावट को रोकने और भारतीय अर्थव्यवस्था में और पूँजी लाने के मकसद से उठाए गए हैं.

लेकिन बाजार ने इन कदमों को अपर्याप्त बताया. बॉम्बे शेयर बाजार का संवेदी सूचकांक 90.35 अंक गिरा और 16,882.16 पर जाकर बंद हुआ. बैंक, तकनीक, ऑटो और कैपिटल गुड्स के क्षेत्र में शेयरों में खासी गिरावट देखने को मिली.

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज भी 31.40 अंक गिरा और 5114.65 पर जाकर बंद हुआ.

जहाँ तक रुपए का सवाल था, तो उसकी स्थिति शुक्रवार के मुकाबले में कुछ सुधरी और वह दोपहर को डॉलर के मुकाबले में 56.86 पर चल रहा था.

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