ब्याज दरों में हेराफेरी: बैंकों की जाँच

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Image caption बार्कलेज़ बैंक पर हेराफेरी के लिए भारी-भरकम जुर्माना भी किया गया है

अमरीका, यूरोप और एशिया में नियामक इस बात की जाँच कर रहे हैं कि दुनिया के कई बड़े वित्तीय संस्थानों ने ब्याज दरों में हेराफेरी की है.

जिन वित्तीय संस्थानों में हेराफेरी की आशंका जताई गई है, उनमें सिटीग्रुप, जेपी मॉर्गन और ड्यूश बैंक हैं.

इन्हीं आरोपों में बुधवार को बार्कलेज़ बैंक पर 45.50 करोड़ डॉलर का जुर्माना लगाया गया था.

शक है कि ये हेराफेरी बैकों के बीच आपसी लेन-देन में हुई है लेकिन इसका असर आम कर्ज और होमलोन पर होता है.

दरों में हेराफेरी

वर्ष 2005 से 2009 के बीच बैंकों के बीच लेन-देन में ब्याज की दरों में हेराफेरी की एक अंतरराष्ट्रीय जाँच के बाद बार्कलेज़ बैंक पर जुर्माना लगाया गया है.

वित्तीय सेवा आयोग (एफ़एसए) ने कहा है कि ये हेराफेरी 'गंभीर और व्यापक' है.

जाँच करने वाली संस्था का कहना है कि बैंकों के बीच लेन-देन के लिए दो तरह के ब्याज दर तय किए जाते हैं.

इन दोनों का असर आम उपभोक्ता को दिए जाने वाले कर्ज पर हो सकता है.

हालांकि बार्कलेज़ के मामले में अभी ये तय नहीं हुआ है कि उसने जो हेराफेरी की उसका असर बैंक के कर्जदारों पर हुआ या नहीं.

जाँचकर्ताओं का कहना है कि वर्ष 2007 से 2009 के बीच जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बैंक संकट में थे, बार्कलेज़ बैंक के कर्मचारियों ने ब्याद के दर जानबूझकर कम रखे जिससे कि ये आभास न हो कि बैंक आर्थिक दबाव में है और इसकी वजह से खुद उसे महंगे ब्याज दरों पर पैसे लेने पड़े.

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