भारत का चालू खाते का घाटा रिकॉर्ड स्तर पर

  • 30 जून 2012
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Image caption एशियाई बाज़ारों में भारतीय रुपए का प्रदर्शन इस साल सबसे खराब रहा है

भारत का चालू खाते का घाटा मार्च की तिमाही में अपने रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गया है. इसका कारण आयात में तेज़ी और निर्यात में मामूली बढ़त है जिसकी वजह से लगातार दूसरी तिमाही में भुगतान संतुलन घाटे में है.

तेल के दामों में बढ़ोत्तरी और सोने के बढ़ते आयात के कारण भी हालात खराब हुए हैं, हालाँकि अर्थशास्त्रियों के अनुसार जून की तिमाही में स्थिति बेहतर होने की उम्मीद है क्योंकि तेल के दाम गिरे हैं और सोने के आयात धीमा हुआ है.

चालू खाते के घाटे के कारण रुपए की कीमत घटी है. 22 जून को एक डॉलर की कीमत 57.32 रुपए थी.

भारतीय विकास दर के गिरने से निवशकों में भी निराशा है. ये आंकड़े ऐसे समय में आए हैं जब अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी स्टैंडर्ड एंड पूअर्स (एसएंडपी) ने भारत को रेटिंग घटाने की चेतावनी दी है.

एशियाई बाज़ारों में भारतीय रुपए का प्रदर्शन इस साल सबसे खराब रहा है.

एचडीएफसी के प्रमुख अर्थशास्त्री अभीक बरुआ ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स से कहा कि उन्हें रुपए के मूल्य में स्थिरता आने की और उसकी गिरावट पर रोक लगने की उम्मीद है.

भारत का चालू खाते का घाटा वर्ष 2012 के पहले तीन महीनों में 5.7 अरब डॉलर का था. ये घाटा दिसंबर तिमाही के 12.8 अरब डॉलर के घाटे से कम था.

रिजर्व बैंक ने शुक्रवार को कहा था, “आर्थिक विकास में मंदी और रुपए की कीमत में गिरावट के बावजूद सामान के आयात में मामूली बदलाव आया – ये बदलाव 2010-11 की चौथी तिमाही के 27.7 प्रतिशत से कम होकर 2011-12 की चौथी तिमाही के 22.6 प्रतिशत का था.”

रिजर्व बैंक के अनुसार वर्ष 2011-12 के पूरे वित्तीय वर्ष में चालू खाता घाटा 78.2 अरब डॉलर का था जो सकल घरेलू उत्पाद का 4.2 प्रतिशत था और ये आंकड़ा पिछले साल के 46 अरब डॉलर से ज्यादा है.

दिसंबर तिमाही में चालू घाटा खाता 19.95 अरब डॉलर का था.

क्रिसिल के प्रमुख अर्थशास्त्री डीके जोशी ने रॉयटर्स को बताया, “मुझे उम्मीद है कि ये घाटा अगले दो तिमाही में घटेगा. इसका कारण तेल के दामों में गिरावट और सोने के आयात में धीमापन होना है.”

जोशी को उम्मीद है कि मौजूद वित्तीय वर्ष में ये घाटा सकल घरेलू उत्पाद का 3.6 प्रतिशत रहेगा.

मार्च तिमाही में भारत का व्यापार घाटा 51.6 अरब डॉलर का था जो कि दिसंबर तिमाही के 48.7 अरब डॉलर से ज्यादा है. इससे एक साल पहले व्यापार घाटा 30 अरब डॉलर का था.

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