बाल मजदूरी पर लगाम लगाने में नाकाम नेस्ले

  • 29 जून 2012
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Image caption वेस्ट अफ्रीका के कोको के खेतों में करीब 15 लाख बच्चों के बाल मजदूरी के शिकार होने का खतरा है

एक ताजा रिपोर्ट में दुनिया की सबसे बड़ी खाद्य उत्पाद कंपनी नेस्ले पर आरोप लगे हैं कि वह अपनी कोको सप्लाई कंपनियों में बाल मजदूरी और बाल अत्याचार पर लगाम लगाने में नाकाम रही है.

रिपोर्ट के अनुसार पश्चिमी अफ्रीका में कोको की खेतों में करीब 15 लाख बच्चों के बाल मजदूरी के शिकार होने का खतरा है.

कई साल के दबाव के बाद नेस्ले ने कोको सप्लाई करने वाली फॉर्मों की जांच के लिए ‘फेयर लेबर एसोसिएशन’ नामक एक स्वतंत्र ऑडिटर की सेवाएं ली थी.

90 अरब डॉलर का कारोबार

कंपनी ने कहा है कि वह इस रिपोर्ट की सिफारिशों को लागू करेगी.

विश्व भर में चॉकलेट उद्योग का सालाना 90 अरब डॉलर का कारोबार है. कोको का इस्तेमाल चॉकलेट बनाने में होता है. जरूरत का आधा कोको पश्चिमी अफ्रीका के आइवरी कोस्ट से आता है.

फेयर लेबर एसोसिएशन ने नेस्ले को सीधे कोको बेचने वाले निर्यातकों के गरीब और सुदूर क्षेत्रों में स्थित खेतों में जांच करने के बाद अपनी रिपोर्ट तैयार की है.

नेस्ले ने बाल मजदूरी, काम की समय सीमा और सुरक्षा को लेकर उसे कोको बेचने वालों के लिए आचार संहिता जारी कर रखी है. हालांकि यह संहिता सिर्फ आपूर्तिकर्ताओं तक ही सीमित है जबकि कंपनी को पता है कि इस पूरी आपूर्ति प्रतिक्रिया में कई चरण शामिल होते हैं.

शोषण

रिपोर्ट में कहा गया है कि कोको की फली को काटने में इस्तेमाल होने वाले चाकूनुमा उपकरण से बहुत ज्यादा तादाद में खेतों में काम करने वाले चोटिल हो रहे हैं. कामगारों के साथ भेदभाव के अलावा बच्चों और वयस्कों से बिना मजदूरी दिए अधिक समय तक काम कराया जा रहा है.

इस रिपोर्ट पर अपनी प्रतिक्रिया में नेस्ले ने कहा है कि बाल मजदूरी कंपनी के सिद्धांतों के खिलाफ है. इस समस्या से निपटना अब उसकी पहली प्राथमिकता होगी. कंपनी इसकी रोकथाम के लिए एक प्रणाली विकसित करेगी.

फेयर लेबर एसोसिएशन ने कहा है कि उसकी जांच के परिणाम बाकी चॉकलेट कंपनियों पर भी लागू होने चाहिए. चॉकलेट उद्योग का कहना है कि वह रिपोर्ट के परिणामों का अध्ययन कर रहा है.

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