सुधार की उम्मीद से उछले शेयर बाजार

  • 29 जून 2012
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Image caption बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज के सेंसेक्स में 400 से ज्यादा अंकों की उछाल आई

शुक्रवार को भारतीय बाज़ारों में आर्थिक सुधारों की उम्मीद बढ़ने के कारण ज़बरदस्त उछाल आई.

बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सूचकांक सेंसेक्स लगभग 439.22 अंक की बढ़ोत्तरी के साथ 17429.98 अंकों पर बंद हुआ. जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज में भी इसी तरह की उछाल आई.

मुंबई के शेयर बाज़ार में पिछले चार दिनों से उछाल का माहौल बना हुआ है. आखिर इसका कारण है क्या?

सुशील ज्वार्जका मुंबई के एक उद्योगपति हैं. वे कहते हैं, "यूरोपीय बैंकों के बीच समझौते से फील गुड फैक्टर के कारण यह तेज़ी देखने को मिली है."

लेकिन उनका ये भी कहना है कि इस तेज़ी का संबंध अंदरूनी मुद्दों से भी जुड़ा हुआ है.

वे कहते हैं, "जब से मार्केट को ये यकीन हो गया कि प्रणब मुखर्जी अब वित्त मंत्री नहीं रहेंगे. बाज़ार में यह उम्मीद को बढ़ोतरी मिली है की अब अर्थव्यवस्था में सुधार के कदम उठाए जा सकते हैं."

हालांकि प्रधानमंत्री के मुख्य आर्थिक सलाहकार कौशिक बासु ने कहा है कि अर्थव्यवस्था में सुधार लाने में कम से कम और तीन-चार महीने लग सकते हैं. लेकिन ऐसे संकेत हैं कि अर्थव्यवस्था में तेजी लाने के लिए सरकार जल्द ही आर्थिक सुधारों की घोषणा करेगी.

कदम

शेयर दलाल अलोक चिदुवाला कहते हैं कि मार्केट में अब एक स्थितियाँ आएँगी क्योंकि सभी यह आशा रखते हैं कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जल्द ही सुधार लाने की तरफ क़दम उठाने वाले हैं.

उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री सुधार के पक्षधर के रूप में देखे जाते हैं. इसलिए मार्केट में ऐसी उम्मीद लगाई जा रही है कि अब वे सुधार लाने की कोशिश करेंगे और इसमें जो उन्हें बाधाएं आएँगी, उस पर वे काबू पाने में सफल रहेंगे."

सुशील ज्वार्जका कहते हैं कि जब मार्केट में मंदी थी तब भी भारतीय अर्थव्यवस्था मज़बूत स्तंभ पर खड़ी थी. वे कहते हैं, "मार्केट में मंदी के समय भी यह साफ़ था कि भारत की अर्थव्यस्था मज़बूत स्तंभ पर खड़ी है. अंदरूनी डिमांड में कमी नहीं आई है और फंडामेंटल सही हैं."

आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि अगर सरकार ने कुछ क्षेत्रों में सुधार लाने के लिए सही क़दम उठाए तो भारत की अर्थव्यवस्था एक बार फिर कामयाबियों की सीढ़ियाँ चढ़ेगी.

पिछले सात-आठ महीनों में अक्सर शेयर बाज़ारों में मंदी रही है. इसका एक कारण है- ग्रीस का यूरो से निकलने के खतरे से पैदा होने वाली स्थिति और दूसरी वजह रही भारत के अंदर अर्थव्यवस्था में सुधार की कमी.

मुंबई के शेयर दलाल प्रणब मुखर्जी की नीतियों से मायूस हो चुके थे और सुधार की उम्मीद छोड़ चुके थे लेकिन अब जबकि वित्त मंत्रालय प्रधान मंत्री के पास है, यह उम्मीद बढ़ी है कि अब सुधार का सिलसिला शुरू होगा.

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