भारत में उत्पादन बढ़ा, चीन-जापान का बुरा हाल

  • 2 जुलाई 2012
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Image caption चार महीने में पहली बार जून में भारत का फैक्टरी उत्पादन इतना बढ़ा है

भारत में इस साल जून में फैक्टरी उत्पादन और भर्ती बढ़े हैं लेकिन निर्यात के लिए विदेशों से मांग घट रही है. विदेशों से मांग घटने के कारण एशिया के दो सबसे निर्यातक देशों - चीन और जापान में फैक्टरी उत्पादन सात महीने में सबसे कम है.

ये जानकारी पर्चेज मैनेजर्स इंडेक्स (पीएमआई) पर आधारित है जो हर महीने आती है. पीएमआई सेवा क्षेत्र समेत निजी क्षेत्र की अनेक गतिविधियों पर आधारित होता है. इसमें शामिल सभी देशों की तुलना एक जैसे मापदंड से होती है.

पीएमआई का मुख्य मकसद अर्थव्यवस्था के बारे में पुष्ट जानकारी आधिकारिक आंकड़ों से भी पहले उपलब्ध कराना है जिससे अर्थव्यवस्था के बारे में सटीक संकेत पहले ही मिल जाते हैं.

भारतीय निर्यात की मांग भी घटी

एचएसबीसी के उत्पादन संबंधी पीएमआई के अनुसार जून में भारत का उत्पादन चार महीने में सबसे अधिक और मई में 54.8 के मुकाबले में 55 पर पहुँच गया. आम तौर पर 50 से ऊपर का आंकड़ा विकास का और इससे कम का आंकड़ा मंदी का संकेत देता है.

इस सर्वेक्षण से भारतीय उत्पादकों के जहन में छाई महँगाई की चिंता जाहिर हुई है.

समाचार एजेंसियों के अनुसार एचएसबीसी के अर्थशास्त्री लीफ एस्केसेन कहते हैं, "उत्पादन क्षेत्र के लिए जून अच्छा महीना रहा है. रोजगार का इंडेक्स मई 2010 के बाद सबसे अच्छे 52.4 के अंक पर है."

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Image caption चीन की वस्तुओं की मांग विदेश में घटी है जिसका असर फैक्टरी उत्पादन पर हुआ है

लेकिन भारत में निर्यात की मांग नवंबर 2011 के बाद से सबसे धीमी गति से बढ़ रही है क्योंकि भीरत के मुख्य व्यापार सहयोगी - यूरोप और अमरीका में मांग घटी है.

चीन, जापान में उत्पादन गिरा

उधर विश्व की अर्थव्यवस्था पर मंडराते बादल और घने हो गए हैं क्योंकि एशिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं - चीन, जापान में फैक्टरी उत्पादन सात महीने में सबसे निचले स्तर पर है.

पीएमआई के मुताबिक हाँ चीन की उत्पादकता मई के 50.4 के मुकाबले में जून में 50.2 पर थी, वहीं जापान की उत्पादकता 49.9 के आंकड़े पर थी जिसका मतलब है कि अर्थव्यवस्था में सुस्ती बढ़ी है.

पीएमआई रिपोर्ट के मुताबिक दक्षिण कोरिया और ताइवान के उत्पादों के लिए भी पिछले पाँच महीनों में पहली बार जून में मांग गिरी है.

पर्यवेक्षकों का मानना है कि एशिया में घरेलू और विदेशों में उसके उत्पादों की इतनी घटी हुई मांग मार्च 2009 में देखी गई थी.

चीन की फैक्टरियों से उत्पादों की कीमत 42 महीने के सबसे निचले स्तर पर है.

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