3जी रोमिंग पर बंटा टेलीकॉम ट्राइब्यूनल

3जी रोमिंग पर सवाल इमेज कॉपीरइट BBC World Service
Image caption मोबाइल फोन कंपनियों ने सरकारी निर्देश को चुनौती दी है.

मोबाइल फोन कंपनियां अपने ग्राहकों को 3जी रोमिंग सेवा देती रहेंगी क्योंकि टेलीकॉम ट्राइब्यूनल ने इस बारे में एक विभाजित फैसला दिया है.

ट्राइब्यूनल का फैसला बंटा हुआ था जिसमें एक न्यायाधीश का कहना था कि एक टेलीकॉम सर्किल में टेलीकॉम आपरेटरों के बीच स्पेक्ट्रम शेयरिंग समझौते मान्य नहीं होंगे.

ये मामला उन मोबाइल कंपनियों की तरफ से 3जी रोमिंग सेवाएं मुहैया कराने से जुड़ा है जिनके पास 3 जी रोमिंग देने का लाइसेंस नहीं है. इन कंपनियों के पास 2जी रोमिंग देने का हा लाइसेंस ही है.

दो सदस्यों वाले टेलीकॉम विवाद निपटारा अपीली ट्राइब्यूनल के अध्यक्ष न्यायमूर्ति एसबी सिन्हा और सदस्य पीके रस्तोगी की राय एक नहीं है.

जस्टिस सिन्हा ने स्पेक्ट्रम शेयरिंग रोकने के सरकार के निर्देश के खिलाफ मोबाइल कंपनियों की याचिका को स्वीकार कर लिया जबकि रस्तोगी ने इस याचिका को ये कहते हुए खारिज कर दिया कि वे रोमिंग मुहैया नहीं करा सकती हैं.

ट्राइब्यूनल के अध्यक्ष का मानना था कि संचार मंत्रालय ने उचित प्रक्रिया का पालन नहीं किया है और मोबाइल कंपनियों को अपनी रुख पेश करने के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया गया.

सिन्हा के मुताबिक ये प्राकृतिक न्याय का उल्लंघन है. मोबाइल कंपनियों को इंट्रा-सर्किल रोमिंग बंद करने के सरकारी निर्देश को एक तरफ रखते हुए सिन्हा ने सरकार से कहा है कि वो नए सिरे से इस प्रक्रिया को शुरू करे ताकि कंपनियां अपना रुख रख सकें.

वहीं रस्तोगी का कहना है कि मोबाइल कंपनी सिर्फ 2जी लाइसेंस के साथ 3जी सेवाएं मुहैया नहीं करा सकती हैं.

इस ट्राइब्यूनल में अध्यक्ष समेत तीन सदस्यों को रखा जाना था लेकिन तकनीकी सदस्य के सेवानिवृत्त हो जाने के कारण इसमें दो ही सदस्य रह गए. इस ट्राइब्यूनल को एयरटेल, वोडाफोन, आइडिया, एयरसेल और टाटा टेली की याचिकाओं पर सुनवाई का काम सौंपा गया था.

ये सभी कंपनियां सरकार के 23 दिसंबर के उस निर्देश को चुनौती दे रही हैं जिसमें 24 घंटों के भीतर स्पेक्ट्रम शेयरिंग करारों को रद्द करने को कहा गया था.

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