महँगाई के कारण बैंक दर घटाना कठिनः रंगराजन

  • 9 जुलाई 2012
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Image caption रिज़र्व बैंक को जुलाई के अंत में मौद्रिक नीति पर त्रैमासिक समीक्षा रिपोर्ट पेश करनी है

भारतीय प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के अध्यक्ष सी रंगराजन ने कहा है कि भारतीय रिज़र्व बैंक के लिए मुद्रास्फ़ीति की स्थिति को देखते हुए अभी बैंक दरों में कटौती करना मुश्किल हो सकता है.

उन्होंने दिल्ली में एक आयोजन स्थल पर पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि उन्हें लगता है कि यदि मुद्रास्फ़ीति, और ख़ासतौर पर ग़ैर-खाद्य उत्पादों की मुद्रास्फ़ीति घटती है, तो रिज़र्व बैंक कुछ आसान उपाय अपना सकता है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार रंगराजन ने वहाँ इस बारे में चर्चा करते हुए कहा कि भारत की स्थिति दूसरे देशों से अलग है.

उन्होंने कहा, “दूसरे देशों में विकास दर कम है, मगर महँगाई की दर भी कम है. हमारे देश में विकास दर गिर रही है, मगर महँगाई ऊँचे स्तर पर कायम है."

भारत में रिज़र्व बैंक 31 जुलाई को अपनी त्रैमासिक मौद्रिक नीति की समीक्षा का एलान करनेवाला है.

बैंक ने अपनी पिछली समीक्षा में अपने दरों में कोई परिवर्तन नहीं किया था मगर यूरोपीय केंद्रीय बैंक और चीन के केंद्रीय बैंक ने विकास को तेज़ करने के इरादे से अपने यहाँ की बैंक दरों में कटौतियाँ की थीं.

18 जून को रिज़र्व बैंक ने अपनी अर्ध त्रैमासिक मौद्रिक नीति की समीक्षा रिपोर्ट में कहा था – ब्याज़ दर में इस समय कटौती करने से विकास को मदद मिलने की जगह मुद्रास्फ़ीति पर दबाव बढ़ सकता है.

भारत में मई में थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित मुद्रास्फ़ीति की दर 7.55% थी जबकि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर आधारित मुद्रास्फ़ीति 10.36% थी.

सी रंगराजन से अर्थव्यवस्था की मदद के लिए प्रोत्साहन पैकेज की घोषणा के उपाय के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि इसके असर की संभावना भी काफ़ी सीमित है क्योंकि वित्तीय घाटा बहुत अधिक है.

उन्होंने कहा,”अभी जो हालत है उसमें 2008 में जैसा प्रोत्साहन दिया गया था, वैसा करने का विकल्प मौजूद नहीं है.“

भारत में केंद्र ने 2008-09 में अर्थव्यवस्था में तेज़ी लाने के लिए 1.86 लाख करोड़ रूपए का प्रोत्साहन पैकेज उपलब्ध कराया था.

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