कड़ी सुरक्षा के बीच मारुति में काम शुरु

 मंगलवार, 21 अगस्त, 2012 को 11:13 IST तक के समाचार
मारुति

मारुति प्रबंधन ने भी फैक्टरी की सुरक्षा के लिए सौ निजी सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया है.

मारुति सुजूकी के मानेसर प्लांट में पिछले महीने हुई हिंसक झड़पों की वजह से की गई फैक्टरी की तालाबंदी मंगलवार को कड़ी सुरक्षा के बीच काम खत्म हो गई है.

पहले के लगभग 1500 गाड़ियां प्रतिदिन के उत्पाद के मुकाबले अब मानेसर प्लांट में हर रोज सिर्फ 150 गाड़ियों के उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है.

मानेसर प्लांट में हर साल साढ़े पांच लाख गाड़ियों के उत्पादन की क्षमता है. माना जा रहा है कि कुछ समय बाद प्लांट में प्रतिदिन गाड़ियों का उत्पादन बढ़ाया जाएगा.

शिल्पा कन्नन , बीबीसी संवाददाता

पिछले महीने हुई झड़प में कंपनी के एक बड़े अधिकारी की मौत हो गई थी और सौ अन्य घायल हो गए थे.

ये हाल के दिनों में मजदूरों में अंसतोष को लेकर उपजे विवाद का बड़ा मामला था.

इस मामले की जड़ में भारत का पुराना मजदूर क़ानून है.

राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर करीब 100 ऐसे कानून हैं जो मज़दूरों के अधिकारों से संबंधित है. इसमें ट्रेड यूनियन एक्ट 1926 भी शामिल है.

पिछले महीने हुई झड़प में कंपनी के एक बड़े अधिकारी की मौत हो गई थी और सौ अन्य घायल हो गए थे.

दिन की शुरुआत में तेज बरसात के बीच फैक्टरी के गेट पर अंदर जाने के लिए सैकड़ो श्रमिक कतार में खड़े दिखे.

हरियाणा पुलिस के 500 जवानों को फैक्टरी की सुरक्षा के लिए तैनात किया गया है. करीब 200 जवान फैक्टरी के अंदर की सुरक्षा संभालेंगे, जबकि 300 जवान बाहर तैनात किए गए है.

इसके अलावा मारुति प्रबंधन ने भी फैक्टरी की सुरक्षा के लिए सौ निजी सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया है.

हिंसा से नुकसान

कंपनी ने इससे पहले कहा था कि फैक्टरी में सिर्फ 300 स्थाई कर्मचारी काम करेंगे.

मारुति सुजूकी प्रबंधक ने घोषणा की है कि फिलहाल मानेसर प्लांट में सिर्फ एक ही शिफ्ट में काम किया जाएगा.

18 जुलाई को हुई हिंसा के बाद कंपनी के मानेसर प्लांट की 21 जुलाई को तालाबंदी कर दी गई थी.

हिंसक झड़प से कंपनी को करीब दल करोड़ रुपयों का नुकसान हुआ था, जबकि कुल उत्पादन घाटे को देखे को नुकसान का आंकड़ा 1400 करोड़ के करीब है.

मारुति ने उन 500 स्थाई कर्मचारियों को भी बर्खास्त करने का फैसला किया है जो प्लांट में हुए हिंसा में कथित तौर पर संलिप्त पाए गए थे. घटना में संदिग्ध भूमिका रखने वाले 500 अस्थाई कर्मचारियों को भी बाहर निकाले जाने की योजना है.

हिंसा की घटना से पहले तक प्लांट में करीब 3300 कर्मचारी करते थे, जिसमें से 1528 स्थाई कर्मचारी थे.

कंपनी सितंबर में ताजा भर्तिया करने की योजना बना रही है ताकि उत्पादन क्षमता में निरंतरता बरती जा सके.

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