आईफ़ोन में लोगों की घटती रुचि के कारण

ऐपल कंपनी
Image caption उम्मीद है कि इस साल ऐपल कंपनी की बिक्री 150 अरब डॉलर तक होगी.

ऐपल के आईफ़ोन-5 के अनावरण के अवसर पर बीबीसी ने न्यूज़वीक पत्रिका के टेक्नोलोजी संपादक डैन लिओन्स से पिछले एक साल में ऐपल कंपनी की प्रगति पर कुछ लिखने के लिए अनुरोध किया.

डैन लिओन्स ऐपल कंपनी के पूर्व प्रमुख स्टीव जॉब्स के नाम पर 'द सिक्रेट डायरी ऑफ़ स्टीव जॉब्स' के नाम से एक ब्लॉग चलाते थे.

पेश है ऐपल कंपनी के उतार चढ़ाव पर डैन लिओन्स का ये विशेष लेख.

मैंने 2006 में जब स्टीव जॉब्स के नाम से एक ब्लॉग शुरू किया था तब मैं ख़ुद को ऐपल का मुख्य कार्यकारी अधिकारी समझता था. लेकिन जब जनवरी 2011 में ये साफ़ हो गया कि स्टीव जॉब्स गंभीर बीमारी के शिकार हैं तो मैने वो ब्लॉग बंद कर दिया था. लेकिन इन सब के बावजूद मैं हमेशा सोचता रहता हूं कि आज ऐपल कंपनी में जो भी हो रहा है उसको लेकर स्टीव जॉब्स क्या सोचते.

अब जब कंपनी आईफ़ोन-5 लॉन्च कर रही है और जिस तरह से उसके बारे में ख़बरें लीक हुई हैं उससे सबको पता है कि नया फ़ोन किस तरह का होगा.

माना जा रहा है कि नया फ़ोन लगभग आईफ़ोन के पिछले दो मॉडलों की तरह है, सिर्फ़ वो थोड़ा पतला और ज़्यादा लंबा है. लेकिन अगर ये ख़बर सही है तो निश्चित तौर पर स्टीव ख़ुश नहीं होते.

कोई ख़ास बदलाव नहीं

सबसे पहले तो स्टीव ख़बरों के लीक होने पर ही नाराज़ होते क्योंकि स्टीव को लोगों को चौंकाने में मज़ा आता था.

दूसरे ये कि क्या दुनिया की सबसे उन्नत तकनीक का दावा करने वाली कंपनी से हम इससे ज़्यादा की उम्मीद नहीं कर सकते. आईफ़ोन-5 इस कड़ी में छठा फ़ोन है लेकिन इसको इस्तेमाल करने वाले लोगों को लगता है कि ये अभी भी 2007 में लॉन्च हुए पहले आईफ़ोन की ही तरह है.

आईफ़ोन-4 और आईफ़ोन-4एस के हार्डवेयर में भी कोई फ़र्क नहीं है दोनों लगभग बराबर हैं.

Image caption ऐपल को सैमसंग के स्मार्टफ़ोन से कड़ी चुनौती मिल रही है.

अब दो साल के बाद कंपनी के जाने माने डिज़ाइनर जोनाथन इव ने नए मॉ़डल में जो बदलाव किए हैं वो केवल इतना है कि उन्होंने स्क्रीन को 3.5 इंच से बढ़ाकर चार इंच कर दिया है.

उसकी एक प्रमुख वजह ये है कि ऐपल कंपनी ने शोध पर बहुत कम पैसे ख़र्च करती है. ऐपल अपनी आमदनी का केवल दो फ़ीसदी शोध पर ख़र्च करती है जबकि गूगल और माइक्रोसॉफ्ट अपनी आमदनी का 14 प्रतिशत शोध पर ख़र्च करती हैं.

सैमसंग से चुनौती

इसीलिए शायद इस बात में अब कोई आश्चर्य नहीं है कि एंड्रॉयड तकनीक से लैस फ़ोन का स्मार्टफ़ोन के 68 फ़ीसदी बाज़ार पर क़ब्ज़ा हो जबकि पिछले साल उनका नियंत्रण केवल 47 फ़ीसदी बाज़ार पर था.

लेकिन इसी दौरान ऐपल का बाज़ार शेयर घटकर 17 फ़ीसदी हो गया.

यानि की आज की तारीख़ में एंड्रॉयड फ़ोन का बाज़ार में हिस्सा ऐपल की तुलना में चार गुना ज़्यादा है. एंड्रॉयड फ़ोन की बढ़ती चुनौती के कारण अब ऐपल बड़े साइज़ का फ़ोन बना रही है लेकिन वो सिर्फ़ एक नक़ल है जिसमें कोई नयापन नही है.

टैबलेट के बाज़ार मे भी ऐपल अब दूसरों की या तो नक़ल करने लगा है या उससे प्रभावित होने लगा है.

10 इंच की स्क्रीन वाला आईपैड लंबे समय से टैबलट बाज़ार में हावी रहा है लेकिन अब उसे अमेज़न की किंडल फ़ायर, गूगल नेक्सस 7 और सैमसंग गैलेक्सी से चुनौती मिल रही है.

Image caption स्टीव जॉब्स ने 1976 में ऐपल कंपनी की स्थापना की थी.

इस चुनौती से निबटने के लिए उम्मीद की जा रही है कि ऐपल अक्तूबर में अपने बेहद लोकप्रिय टैबलेट आईपैड का एक नया छोटा संस्करण पेश करेगा.

ऐपल टीवी के बारे में चर्चा एक समय में ज़ोरों पर थी लेकिन उस क्षेत्र में फिलहाल कोई प्रगति नहीं हो पाई है. ऐपल के ताज़ा विज्ञापन भी बेहद ख़राब माने जा रहे हैं.

सैमसंग से पेटेंट विवाद में ऐपल की जीत तो हुई तो इस बहाने लोगों को ये भी पता चल गया कि सैमसंग के नए फ़ोन कितने बेहतर हैं.

इसी कारण शायद पिछले महीने सैमसंग के गैलेक्सी-एस3 ने अमरीका में बिक्री के मामले में आईफ़ोन-4एस को पछाड़ दिया था.

यह पहली बार हुआ था जब अमरीका में किसी स्मार्टफ़ोन ने आईफ़ोन को पिछे किया था.

ऐपल कंपनी जानी जाती थी बाज़ार में निडर होकर नई तकनीक लाने के लिए लेकिन पिछले एक साल में ऐपल कंपनी दूसरों की नक़ल करते हुए और कड़े फ़ैसले करने से डरती हुई दिख रही है.

हालाकि इसके सामानों की ब्रिक्री और मुनाफ़े में कोई ख़ास फ़र्क़ नहीं पड़ा है. 632 अरब डॉलर के बाज़ार क़ीमत वाली ऐपल आज भी अमरीका के इतिहास में दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी है.

इससे ऐपल के शेयरधारकों को तो फ़ायदा होगा लेकिन इसके ग्राहकों के लिए कोई अच्छी ख़बर नहीं है. अपने ग्राहकों के लिए ऐपल कंपनी और उसके सामान उबाऊ होने लगे हैं.

मैं स्टीव जॉब्स को आस-पास ही कहीं चिल्लाते हुए महसूस कर रहा हूं.

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