मनमोहन मीडिया में छवि से विचलित नहीं: मोंटेक

  • 19 सितंबर 2012
Image caption मोंटेक सिंह का कहना है कि मनमोहन सिंह अमरीका में अपनी छवि को लेकर चिंतित नहीं है

योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह आहलूवालिया ने इस बात से साफ इनकार किया है कि विदेशी मीडिया की तीखी आलोचना के बाद ही भारत सरकार हरकत में आई और रिटेल में एफडीआई समेत अन्य सुधारों की घोषणा की.

उन्होंने ये उम्मीद भी जताई कि घरेलू स्तर पर सब कुछ ठीक तरीके से चला तो 8.2 की विकास दर हासिल की जा सकती है.

बीबीसी को दिए विशेष इंटरव्यू में मॉन्टेक सिंह आहलूवालिया ने इस बात को भी सिरे से नकार दिया कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को अमरीका में अपनी छवि की कुछ ज़्यादा ही चिंता रहती है.

पिछले कुछ महीनों में कई विदेशी अखबारों और पत्रिकाओं ने मनमोहन सिंह की आलोचना करते हुए लेख लिखे हैं जहाँ उन्हें फिसड्डी तक कहा गया.

वैसे तो भारतीय मीडिया में भी मनमोहन सिंह की आलोचना होती रही है लेकिन क्या विदेशी मीडिया की आलोचना पर प्रधानमंत्री ने ज़्यादा प्रतिक्रिया दी है?

बीबीसी के इस सवाल पर आहलूवालिया ने कहा, “ये दर्शाता है कि विदेशी प्रेस ने भारत की ख़बरों को बहुत देर से परोसना शुरु किया. हम पहले से ही तमाम सुधार लागू करने की प्रक्रिया में थे.”

'घरेलू स्तर पर भी हैं समस्याएँ

मॉन्टेक सिंह आहलूवालिया ने माना कि विकास की दौड़ में भारत को घरेलू स्तर पर भी कई समस्याओं का सामना करना पड़ा है.

उन्होंने कहा, “दुनिया भर में आर्थिक विकास की दर धीमी हुई है और भारत पर भी इसका असर पड़ा है. ये बात भी सच है कि भारत को घरेलू स्तर पर कई समस्याओं का सामना करना पड़ा. दरअसल हमारा सिस्टम एक ढर्रे पर चलने का आदि रहा है. फिर अचानक कुछ जगह काम तेज़ी से होने लगा जबकि कुछ क्षेत्र उतनी तेज़ी से नहीं बढ़ पाए. हमें इन घरेलू बाधाओं को दूर करना होना.”

मनमोहन सिंह सरकार की इस बात को लेकर भी आलोचना होती रही है कि देश में पूरी तरह से पॉलिसी परैलेसिस है और विकास दर के आँकड़ें लगातार खराब चल रहे हैं.

बीबीसी ने आहलूवालिया से पूछा कि नए सुधारों की घोषणा करने के बाद अचानक से माहौल को इतना सकारात्मक क्यों बताया जा रहा है.

इस पर उनका कहना था, “हम ये नहीं बोल रहे हैं कि अब सरकार ने दो-तीन नए कदम उठाए हैं तो अचानक से विकास दर बढ़ जाएगी. हमने सुधारों का विस्तृत खाका तैयार किया है- कृषि सुधारों का, सब्सिडी देने का बेहतर तरीका, सरकारी कार्यकुशलता बढ़ाने का और बिज़नेस के लिए माकूल माहौल बनाने का.”

आहलूवालिया ने उम्मीद जताई कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रही अनिश्चितताएँ धीरे-धीरे खत्म हो जाएँगी और भारत की विकास दर करीब 8.2 होनी चाहिए.

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