जब 'अनजान' हों मेहमान

  • 10 सितंबर 2011
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Image caption हू जिनताओ की गांव यात्रा उतनी स्वभाविक भी नहीं थी जितनी सरकारी मीडिया ने दिखाई.

जब राष्ट्रपति हू जिनताओ चीनी नववर्ष की छुट्टियों के दौरान अचानक एक किसान के घर पर पहूंचे तो सबकुछ स्वभाविक लग रहा था.

टीवी पर राष्ट्रपति हू को किसान और उसके परिवार के साथ हंसते हूए दिखाया गया और उन्होंने स्थानीय व्यंजन डिंग्क्षी का भी लुत्फ़ उठाया.

लेकिन अब विकीलीक्स के ज़रिए सामने आए बीजिंग स्थित अमरीकी दूतावास के दस्तावेज़ों ने इस सारी घटना पर बिल्कुल अलग रोशनी डाली है.

इन दस्तावेज़ों के अनुसार सबकुछ उतना साधारण नहीं था जितना टीवी पर देखा गया.

कम्यूनिस्ट पार्टी के वरिष्ठ अधिकारी कई दिनों से इस यात्रा के कामयाब होने की योजना में जुटे हूए थे.

छोटी-छोटी बातों का भी ध्यान रखा गया था. राष्ट्रपति ली चाई नाम के जिस किसान के घर जाने वाले थे उससे कहा गया था कि वो अपनी दाढ़ी ना बनाए ताकि वो किसी आम किसान की तरह लगे.

अनजान मेहमान

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Image caption ख़ास मेहमान के साथ ली चाई

दुनिया भर में राजनीतिज्ञ मीडिया में अपनी छबि को बेहतर ढंग से पेश करने के लिए प्रयास करते हैं लेकिन ऐसी कोशिशों को अकसर छिपाने का प्रयास नहीं होता है.

सामने आए दस्तावेज़ों से चीनी राजनीति में मीडिया के इस्तेमाल का दुर्लभ उदाहरण मिलता है.

विकीलीक्स के ज़रिए सामने आए दस्तावेज़ का शीर्षक है – ‘जब हू जिनताओ खाने पर आए’. ये केबल नवंबर 2009 में बीजिंग से अमरीकी विदेशमंत्री को भेजा गया था.

इसमें राष्ट्रपति हू जोकि चीनी कम्यनिस्ट पार्टी के महासचिव भी हैं, की दो साल पहले गांसु प्रांत की यात्रा का ज़िक्र है.

दूतावास के इस तार में अधिकारियों ने कहा है कि उन्हें इस यात्रा का विवरण गांसु प्रांत में चीनी कम्यूनिस्ट पार्टी के एक पूर्व प्रांतीय सचिव शी जिंग ने दिया है.

शी ने अमरीकी दूतावास के अधिकारियों को बताया कि गांसु के स्थानीय अधिकारियों को दस दिन पहले ही ख़बर कर दी गई थी कि उनके यहां एक बड़े नेता छुट्टियों के दौरान आएंगे.

ये नहीं बताया गया था कि ये नेता कौन हैं लेकिन उन्हें कुछ अंदाज़ा हो गया था क्योंकि आठ वर्ष पहले डापिंग नाम के इस गांव का दौरा हू जिनताओ कर चुके हैं.

इसके अलावा भी कई संकेत थे.

दूतावास के पत्राचार में लिखा है, “शी ने कहा कि उन्हें तुरंत ही पता चल गया कि हू जिनताओ आने वाले हैं क्योंकि इस यात्रा की कवरेज सिर्फ़ सरकारी टीवी और समाचार एजेंसी ही करने वाले थे.”

‘आलुओं से तंग आ गई हूं’

कम्यूनिस्ट पार्टी के अधिकारी देश के सर्वोच्च नेता को गांसु प्रांत के एक आम किसान से मिलाना चाहते थे.

स्थानीय अधिकारियों ने उस किसान के घर को भी दुरुस्त करने की इज़ाज़त नहीं दी थी.

चेतावनी के बावजूद चीनी दूतावास के सूत्र शी ने किसान के घर पर एक स्टोव और चिमनी लगवा दी थी ताकि स्थानीय व्यंजन डिंग्क्षी आलू पकाया जा सके.

दुर्भाग्य से सबकुछ योजना के अनुसार नहीं हूआ. अमरीकी पत्राचार के अनुसार जब हू जिनताओ ने किसान की पोत्री को आलू का व्यजंन पेश किया तो उसने कहा, ‘मैं आलू खा-खा कर तंग आ गई हूं.’

सौभाग्य से बाद में किसान की पोत्री को आलू खाने के लिए मना लिया गया और ये दृश्य चीन के सरकारी चैनल सीसीटीवी पर दिखाया गया.

लेकिन इस दौरान खाने से संबंधित एक और का दिक्कत से सामना हूआ.

चीनी राष्ट्रपति को स्वयं एक व्यंजन बनाना था. इस व्यंजन को बनाने के लिए उन्हें खौलते तेल में आटे से बनी फलियां डालनी थीं.

सवाल ये था कि अगर हू जिनताओ इन्हें सलीके से तेल में ना डाल पाए और अगर तेल उनपर गिर गया, तो क्या होगा?

अमरीकी पत्राचार में लिखा है, “समाधान ये था - तेल को साधारण तापमान से सिर्फ़ 70 प्रतिशत तक गर्म किया जाए. और राष्ट्रपति को इस काम के लिए थोडे लंबे चॉपस्टिक्स दिए जाएं.”

आख़िर में राष्ट्रपति को पहले से ही पकाए गए व्यंजन परोसे गए.

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