चीन ने अंतरिक्ष प्रयोगशाला लॉन्च की

  • 29 सितंबर 2011
तियांगोंग अंतरिक्ष प्रयोगशाला इमेज कॉपीरइट Getty Images
Image caption चीन ने गोबी के मरुस्थल से तियांगोंग अंतरिक्ष प्रयोगशाला छोड़ी है

चीन की पहली अंतरिक्ष प्रयोगशाला तियांगोंग-1 के साथ एक रॉकेट देश के उत्तर से अंतरिक्ष में भेजा गया है.

गोबी मरुस्थल के जिउचुआन केंद्र से 'द लॉन्ग मार्च' यान स्थानीय समयानुसार रात सवा नौ बजे छोड़ा गया.

रॉकेट उस प्रयोगशाला को प्रशांत महासागर के ऊपर ले गया और उसकी कक्षा पृथ्वी से साढ़े तीन सौ किलोमीटर ऊपर है.

लगभग साढ़े दस मीटर लंबा बेलनाकार ये मॉड्यूल फ़िलहाल तो मानवरहित है मगर देश के अंतरिक्ष यात्री जिन्हें 'यूहांग्युआन' भी कहा जाता है, उनके अगले साल वहाँ जाने की संभावना है.

तियांगोंग का चीनी भाषा में अर्थ 'स्वर्गीय महल' होता है.

फ़िलहाल तो ये मॉड्यूल स्वायत्त रूप में होगा और उस पर भूमि से नज़र रखी जाएगी. फिर कुछ हफ़्तों बाद चीन एक और मानवरहित अंतरिक्षयान शेंज़ू-8 छोड़ेगा और उसकी कोशिश दोनों के बीच संबंध स्थापित करने की होगी.

अब अगर उस कक्षा में कोई बड़ा ढाँचा बनाना है तो इस तरह की क्षमता होना आवश्यक है.

तीन चरण

तियांगोंग-1 के मुख्य डिज़ायनकर्ता यांग होंग ने कहा, "अंतरिक्ष यान छोड़ने और वहाँ डॉकिंग करने के लिए काफ़ी अच्छी प्रौद्योगिकी चाहिए और चीन को अपना अंतरिक्ष स्टेशन भी बनाना है."

चीन ने इस दशक के अंत तक वो अंतरिक्ष स्टेशन विकसित करने का लक्ष्य रखा है.

अगर शेंज़ू-8 अभियान क़ामयाब रहता है तो 2012 में दो मानवयुक्त अभियान शेंज़ू-9 और 10 छोड़े जाएँगे. चीनी अंतरिक्षयात्री एक बार में दो से तीन की संख्या में जाएँगे और वे अंतरिक्ष संबंध स्थापित कर चुके अंतरिक्ष यान और प्रयोगशाला में दो हफ़्ते तक रुकेंगे.

चीन ने अंतरिक्ष से जुड़ा अभियान तीन चरणों का बनाया है और उसमें तियांगोंग दूसरा चरण है.

प्रथम चरण में शेंज़ू कैप्सूल प्रणाली विकसित की गई थी जिसमें अब तक छह चीनी लोग 2003 से अब तक अंतरिक्ष की कक्षा में जा चुके हैं.

इसके बाद अंतरिक्ष में चलने और वहाँ यान की डॉकिंग के लिए प्रौद्योगिकी की ज़रूरत थी और यही प्रक्रिया अब चल रही है. इसके बाद अंतरिक्ष स्टेशन का निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा.

इस अंतरिक्ष स्टेशन का वज़न यूँ तो 60 टन ही होगा जो कि अमरीका, रूस, यूरोप, कनाडा और जापान के 400 टन वाले मौजूदा संयुक्त अंतरिक्ष स्टेशन के मुक़ाबले कहीं कम होगा मगर अंतरिक्ष में इसकी मौजूदगी ही अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि होगी.

इस स्टेशन की जो परिकल्पना है उसमें मुख्य मॉड्यूल का वज़न 20 से 22 टन के बीच होगा जिसके साथ दो अपेक्षाकृत छोटे प्रयोगशाला वाले यान लगे होंगे.

अधिकारियों का कहना है कि जिस तरह अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर अभी ईंधन, खाने-पीने के सामान, हवा, पानी और अन्य अतिरिक्त सामान जिस तरह से पहुँचाया और रखा जाता है वैसा ही चीनी अंतरिक्ष स्टेशन में भी होगा.

अंतरिक्ष कार्यक्रम

चीन अंतरिक्ष कार्यक्रम में अरबों डॉलर लगा रहा है और उसका अंतरिक्ष विज्ञान कार्यक्रम काफ़ी जो़र शोर से चल रहा है जिसके तहत चंद्रमा के इर्द-गिर्द चक्कर काटने वाले उपग्रह छोड़े गए थे.

एक तीसरे अभियान के तहत चंद्रमा की सतह की जाँच के लिए एक रोबोट जैसा यंत्र भेजा जाएगा. चीन इसके साथ ही अपना सैटेलाइट नैविगेशन सिस्टम लाने जा रहा है.

चीन और बड़े रॉकेट भी ला रहा है. लॉन्ग मार्च-5 नाम का रॉकेट पृथ्वी की नीचे की कक्षा में 20 टन तक का यान ले जा सकेगा.

वैसे ब्रितानी अंतरिक्ष वैज्ञानिक जॉन ज़ारनेकी ने इस पर कहा, "चीन इस सबको लेकर काफ़ी गंभीर है. वहाँ लोग काफ़ी आशान्वित हैं और ये आशा विज्ञान के मुक़ाबले नई प्रौद्योगिकी का विकास करने की इच्छा पर ज्यादा लगी है. वहाँ धन भी है भले ही असीमित न हो और वे एक-एक कर क़दम बढ़ा रहे हैं."

तियांगोंग का दो साल काजीवन है. इसके बाद दूसरी और ज़रूरत हुई तो तीसरी प्रयोगशाला भी भेजी जाएगी. चीन का कहना है कि उनके अभियान के अंत में मॉड्यूल को वातावरण में नष्ट होने के लिए छोड़ दिया जाएगा और वह प्रशांत महासागर के एक अलग-थलग से हिस्से में जाकर नष्ट हो जाएगा.

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