चीन ने किया अमरीकी विधेयक का विरोध

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Image caption अमरीका का कहना है कि चीन जानबूझकर युआन की क़ीमत दूसरे देशों की मुद्रा के मुक़ाबले कम रखता है.

चीन ने अमरीका के उस प्रस्ताव पर कड़ा विरोध जताया है जिसके तहत वह उन देशों पर कार्रवाई करना चाहता है जो उसके मुताबिक जानबूझकर अपनी मुद्रा का अवमूल्यन कर रहे हैं.

चीन के विदेश मंत्रालय का कहना है कि इस क़ानून से व्यापारिक स्तर पर युद्ध की शुरुआत हो जाएगी इसलिए अमरीका को चाहिए कि वो इसे पारित न करे.

चीन का कहना है कि अगर ये विधेयक पारित हो जाता है तो ये सर्वमान्य अंतरराष्ट्रीय नियमों के ख़िलाफ़ होगा. इस विधेयक को अमरीकी सीनेट ने बहस के लिए मंजूरी दे दी है

हालांकि इस प्रस्ताव में चीन का ज़िक्र नही है.

कड़ा रवैया

इस प्रस्ताव को क़ानून बनने से पहले लंबी प्रक्रिया से गुज़रना है और ये प्रक्रिया के प्रारंभिक चरण में है.

लेकिन चीन ने अभी से ही इस पर कड़ा रवैया अपना लिया है.

चीन के न सिर्फ़ विदेश मंत्रालय ने बल्कि वाणिज्य मंत्रालय ने भी इस बारे में बयान जारी किए हैं.

अमरीका सालों से ये कहता आया है कि चीन जानबूझकर युआन की क़ीमत दूसरे देशों की मुद्रा के मुक़ाबले कम रखता है. इस वजह से अंतररराष्ट्रीय बाजा़र में चीनी माल की क़ीमत दूसरे देशों में बनी चीज़ों से सस्ती होती है.

इस कारण चीन का निर्यात सस्ता होता है और आयात महंगा होता है.

अमरीकी विशेषज्ञों का कहना है कि यही कारण है कि अमरीका को चीन से व्यापक स्तर पर व्यापार घाटा होता है.

हालांकि चीन इन आरोपों से इनकार करता आया है.

चीन का कहना है कि इसकी वजह ख़ुद की अमरीकी नीतियां और देश में गहराता आर्थिक संकट है.

उसका कहना है कि अमरीका और यूरापीय देश विश्व बाज़ार में उसके माल की बढ़ती माँग पर रोक लगाने की कोशिश में हैं.

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