कार्बन उत्सर्जन पर अमरीका के रास्ते नही चलेगा चीन

कार्बन उत्सर्जन
Image caption संयुक्त जाँच केन्द्र के विश्लेषण के मुताबिक चीन पहले ही फ्रांस और स्पेन के उत्सर्जन स्तरों के पार जा चुका है.

चीन ने कहा है कि वह अपनी प्रति व्यक्ति कार्बन डाईऑक्साईड उत्सर्जन के स्तर को अमरीका जितने स्तर तक पहुँचने नही देगा.

चीन के राष्ट्रीय विकास और सुधार आयोग के उपप्रमुख ज़ी झेनहुआ के मुताबिक़ उत्सर्जन का स्तर अमरीका के स्तर तक पहुँच जाने पर आपदा की स्थिति आ जाएगी.

एक अध्ययन के अनुसार चीन की प्रति व्यक्ति उत्सर्जन का स्तर साल 2017 तक अमरीका के स्तर तक पहुँच जाएगा.

झेनहुआ पर्यावरण से जुड़े मसलों पर चर्चा करने के लिए ब्रिटेन यात्रा पर हैं. इस यात्रा के दौरान ईंधन और वातावरण से जुड़े मामलों पर संयुक्त अध्ययन करने के फ़ैसले पर भी हस्ताक्षर होने है.

चिंता

तेज़ी से हो रहे औद्योगीकरण के चलते चीन के कार्बन डाईऑक्साईड उत्सर्जन का स्तर काफ़ी बढ़ गया है. चीन राष्ट्रीय उत्सर्जन के स्तर पर अमरीका से भी आगे बढ़ चुका है.

यूरोपीय आयोग की संयुक्त जाँच केन्द्र की ओर से पिछले महीने जारी किए गए एक अध्ययन के अनुसार चीन हर वर्ष प्रति व्यक्ति 6.8 टन कार्बन डाईऑक्साईड की उत्सर्जन करता है. जबकि अमरीका 16.9 टन कार्बन डाईऑक्साईड का उत्सर्जन करता है.

लेकिन चीन का उत्सर्जन स्तर साल 1990 से अब तक तीन गुना बढ़ा है. संयुक्त जाँच केन्द्र के अनुसार चीन अगले छह साल में अमरीका के उत्सर्जन स्तर तक पहुँच जाएगा.

हालाकि, ब्रिटेन में सांसदों से बात करते हुए झेनहुआ ने कहा है कि चीन अमरीका की तरह अपने उत्सर्जन के स्तर को उस हद तक पहुँचने नही देगा.

झेनहुआ के अनुसार चीन ग्रीन हाउस गैस के उत्सर्जन को नियंत्रित करने की पूरी कोशिश कर रहा है.

लक्ष्य

चीन की मौजूदा पंच वर्षीय योजना के अनुसार साल 2010 से 2015 तक उसका लक्ष्य 40 प्रतिशत के आर्थिक विकास की दर को हासिल करना है. साथ ही चीन कार्बन डाईऑक्साईड तीव्रता को 17 फ़ीसदी घटाना भी चाहता है.

अपने इस लक्ष्य के अनुरूप चलने पर चीन जल्द ही यूरोपीय संघ के कई देशों के उत्सर्जन स्तर को पार कर जाएगा. संयुक्त जाँच केन्द्र के विश्लेषण के मुताबिक़ चीन पहले ही फ्रांस और स्पेन के उत्सर्जन स्तरों के पार जा चुका है.

चीन पर अपने कार्बन डाईऑक्साईड उत्सर्जन के स्तर को केवल नियंत्रित करने की बजाए कम करने के लिए अंतरराष्ट्रीय दबाव भी बनाया जा सकता है.

झेनहुआ के अनुसार चीन कम कार्बन उत्सर्जन से विकास के रास्ते का चुनाव कर चुका है और इसी पर आगे बढ़ेगा.

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