चीनी मीडिया: दो मामले, दो रूख़

  • 12 नवंबर 2011
चीन मीडिया
Image caption चीन में मीडिया में बदलाव आ रहा है लेकिन कुछ मामले अभी भी उनकी पहुंच से दूर हैं.

पिछले हफ़्तों के दौरान चीन में मीडिया ने दो मामलों को बहुत अलग-अलग ढ़ंग से पेश किया.

दक्षिणी शहर शेनज़ेन में हुए एक बलात्कार के मामले को पत्रकारों ने काफ़ी अहमियत दी.

लेकिन उन्होंने फ़ौजी छावनी से भागने वाले हथियार बंद सिपाहियों की सुरक्षाबलों के हाथों हुई मौत के मामले की अनदेखी की.

इससे ये ज़ाहिर है कि इश्तहारों के बल पर चलने वाले समाचार माध्यमों को ख़रीदार ढूढ़ने के लिए मेहनत तो करनी पडेगी लेकिन उन्हें अभी भी सख़्त सरकारी नियंत्रण में ही काम करना पड़ रहा है.

'मीडिया की घुसपैठ'

बलात्कार के मामले ने काफ़ी हंगामा मचाया है. कहा जा रहा है कि स्थानीय प्रशासन में काम करनेवाले एक सुरक्षा अधिकारी ने 28 वर्षीय महिला का बलात्कार किया.

पीड़िता का पति, जो एक दुकानदार है, डर के मारे घर के स्टोर रूम में छूप गया था.

उसने लगभग घंटे भर बाद पुलिस को फ़ोन किया और अपनी पत्नी को अस्पताल ले गया.

पुलिस ने हमलावर को गिरफ़्तार कर लिया है और मामले की छानबीन हो रही है.

पत्रकारों को इस मामले पर रिपोर्ट करने की पूरी आज़ादी है और उन्होंने दंपत्ति पर अपना ध्यान केंद्रित किया है.

बीवी की मदद न कर पाने में नाकाम रहने के लिए पत्रकारों ने पति से बूरी तरह से सवाल पूछे.

कई लोगों को लगा कि सवाल पूछने का अंदाज़ अपमानजनक था.

पति ने एक स्थानीय टेलीवीजन स्टेशन पर ख़ुद को "पूरे चीन में सबसे निकम्मा शौहर और मर्द" कहा.

महिला के चेहरे को स्कार्फ़ से छूपा कर उसकी तस्वीरें इंटरनेट पर भी प्रकाशित की गईं, तस्वीर में वो बिस्तर पर लेटी हुई हैं, और उसे मीडिया ने चारों तरफ़ से कैमरों और माइक्रोफ़ोन से घेर रखा है.

कुछ शिक्षाविदों और पत्रकारों के एक समूह ने इसपर कड़ी प्रतिक्रिया जताई है.

सरकारी चैनल, चाईना सेंट्रल टेलीवीज़न स्टेशन की एक अहम प्रस्तुतकर्ता चाई जिंग ने अपने ब्लॉग में इसकी निंदा की और इसे दंपत्ति के निजी जीवन में दख़ल बताया.

उन्होंने दंपत्ति के घर में उनकी इजाज़त के बिना रिपोर्टरों के दाख़िले और वहां कैमरे और माईक्रोफ़ोन लगाए जाने को ग़लत बताया था.

'पहुंच से बाहर'

लेकिन बलात्कार के वाक़ये को लेकर इंटरनेट पर व्यापक बहस जारी है, और लोग पूरी घटना के लिए पति, सरकार और समाज को दोषी ठहरा रहे हैं.

जबकि एक तरफ़ ये सबकुछ जारी है, फ़ौज से जुड़े मामले को पूरी तरह से नज़रअंदाज़ कर दिया गया है. ख़बर है कि छावनी से राइफ़लों और ढेरों गोलियां लेकर भागने वाले तीन सिपाहियों की हत्या कर दी गई थी.

कहा जा रहा है कि उत्तरी चीन के जिलिन शहर की छावनी से भागने वाले चौथे जवान को पुलिस ने गिरफ़्तार कर लिया है. अधिकारियों ने एक वेबसाईट पर इन मौतों की पुष्टि की है.

सिपाहियों के भागने की ख़बर कम्यूनिस्ट पार्टी की मुखपत्र 'द पीपुल्स डेली' में प्रकाशित हुईं. लेकिन बाद में इस ख़बर को वेबसाइटों से हटा दिया गया.

अधिकारी अकसर चीन के मीडिया समूहों को सीधे तौर पर बताते हैं कि कौन से मामलों की ख़बर छापी जा सकती है और कौन से मामलों पर रिपोर्ट नहीं लिखी जा सकती.

जानकारों का कहना है कि अरब जगत में हुए विद्रोह के बाद चीन की सरकार समाज में स्थायित्व बनाए रखने की तरफ़ ध्यान केंद्रित कर रही है.

समाचार माध्यमों और इंटरनेट की कड़ी निगरानी इसके लिए अहम माना जा रहा है.

मीडिया पर नज़र रखने वाले बीजिंग स्थित स्वतंत्र टीकाकार डीन पेंग कहते हैं, "भगोड़े सिपाहियों का मामला अति संवेदनशील है क्योंकि इसका ताल्लुक फ़ौज से है और पार्टी फ़ौज को चीन की दीवार मानती है."

"ऐसा कोई भी मामला जिससे लोगों को ये लगे कि इससे कम्यूनिस्ट पार्टी और सरकार पर किसी तरह का ख़तरा है, चीन के पत्रकारों की पहुंच से बाहर रहेगा. लेकिन अपराध से जुड़ी ख़बरों से, जैसे कि शेनज़ेन का बलात्कार मामला, इस तरह का कोई ख़तरा उत्पन्न नहीं होता है."

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