कहां गए चीन के धरोहर?

  • 31 दिसंबर 2011
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Image caption गणना में किसी इमारत या स्मारक का नाम नहीं लिया गया है

चीन का कहना है कि उसके 44,000 प्राचीन खंडहर, मंदिर और अन्य सांस्कृतिक स्थल गायब हो चुके हैं.

देश में धरोहरों की पहली गणना में यह तथ्य सामने आए है, गणना में 20 साल लगे.

पाया गया है कि जिन प्राचीनतम धरोहरो की छाप अभी तक चीन में बची हुई है वो भी विलुप्ति की ओर बढ़ रहे है. क़रीब एक चौथाई तो काफ़ी खराब स्थिति में हैं.

चीन के सरकारी मीडिया ने एक अधिकारी के हवाले से बताया कि इस तरह के बहुत सारे स्थान असुरक्षित थे और उन्हें निर्माण की योजनाओं के तहत गिराया गया था.

चीन के सांस्कृतिक धरोहरों की देखरेख करने वाले विभाग की ओर से कराई गई गणना में सात लाख धरोहरों को पंजीकृत किया गया.

सर्वेक्षण के उप-निदेशक लिउ शियाओ ने सरकारी मीडिया को बताया कि व्यवसायिक प्रयोग के लिए इमारतों के निर्माण से इन अवशेषों को नुकसान पहुँचा है.

आंकड़ों के अनुसार टेराकोटा के लड़ाकुओं का क्षेत्र शांक्सी प्रांत सबसे ज़्यादा प्रभावित रहा जहाँ 3,500 सांस्कृतिक स्थल गायब हुए हैं.

"ग्रेट वॉल ऑफ़ चाईना" भी खतरे में

हालांकि धरोहरों की इस गिनती में किसी इमारत या स्मारक का नाम नहीं लिया गया है.

पत्रकारों के मुताबिक़ 'ग्रेट वॉल ऑफ चाईना' भी घिसाव और अनाधिकृत विकास का सामना कर रही है क्योंकि वहां घूमने गए पर्यटक संरक्षण के नियमों की पाबंदी नही करते है जिसका स्थानीय ग्रामीण व्यवसायिक फ़ायदा उठाते हैं.

कहा जाता है कि चीन के किन राजवंश के हिस्से की दीवार पर दो साल पहले कुछ लोगों ने सोने की खोज में छेद कर दिए थे.

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