चीन को चाहिए ‘मुक्त बाज़ार सुधार’

  • 28 फरवरी 2012
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Image caption चीन अब विश्व की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है.

विश्व बैंक के मुताबिक चीन की अर्थव्यवस्था को उसकी मौजूदा दर से विकास करते रहने के लिए अपने बाज़ार को खोलने की दिशा में मूलभूत सुधार करने होंगे.

बैंक ने पिछले तीन दशकों में चीन की अर्थव्यवस्था में आई प्रगति को ‘प्रभावशाली’ बताया और कहा कि देश अब एक ‘अहम् मोड़’ पर पंहुच गया है, जहां से विकास की मौजूदा नीति ‘व्यावहारिक’ नहीं होगी.

विश्व बैंक ने कहा कि सरकार और सरकारी उपक्रमों की भूमिका को नए तरीके से समझना होगा.

लेकिन साथ ही कहा गया कि विकास दर धीमी होने की सूरत में भी, वर्ष 2030 तक चीन के विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की संभावना है.

‘खुद को बदलने का समय’

चीन पर एक ताज़ा रिपोर्ट में विश्व बैंक ने कहा कि पिछले 30 वर्षों में इस देश की अर्थव्यवस्था 10 प्रतिशत की औसत से बढ़ी जिससे चीन विश्व का सबसे बड़ा निर्यातक और उत्पादक बन गया.

चीन अब विश्व की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है. लेकिन बैंक ने कहा कि ऐसे विकास को बनाए रखने के लिए दूरगामी सुधारों की जरूरत होगी.

विश्व बैंक के अध्यक्ष, रॉबर्ट ज़ोएलिक ने बीजिंग में रिपोर्ट जारी करते हुए कहा, “सुधार की ज़रूरत साफ है क्योंकि चीन अब एक अहम् मोड़ पर पहुंच गया है.”

ज़ोएलिक ने कहा, “इस देश की मौजूदा विकास नीति लंबे समय में काम नहीं करेगी, ये समय किसी भी तरह से आगे बढ़ने का नहीं है – ये समय है महत्वपूर्ण घटनाओं को पहले से भांपने का और विश्व की अर्थव्यवस्थाओं में होते बदलावों के मुताबिक खुद को बदलने का.”

ताजा जानकारी से संकेत मिलते हैं कि चीन की अर्थव्यवस्था के विकास की रफ्तार धीमी पड़ रही है.

वर्ष 2010 के मुकाबले वर्ष 2011 की आखिरी तिमाही तक सकल घरेलू उत्पात 8.9 फीसदी की दर से बढ़ा. ये पिछले दो वर्षों में सबसे धीमी विकास दर है.

फरवरी की शुरुआत में जारी सरकारी आंकड़ों के मुताबिक जनवरी महीने में चीन से निर्यात की मांग में भी कमी आई.

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