चीन में वित्तीय क्षेत्र में बड़े सुधार की तैयारी

  • 4 अप्रैल 2012
Image caption चीन वैश्विक स्तर पर अपनी मुद्रा युआन की भागीदारी बढ़ाना चाहता है.

विश्व की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था चीन, अपने वित्तीय और बैंकिंग क्षेत्र में निवेश और प्रतिस्पर्धा तेज़ करने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है.

मंगलवार को चीन ने अंतरराष्ट्रीय कोष व्यवस्थापकों द्वारा देश में निवेश की सीमा तीन गुना बढ़ाकर 80 अरब डॉलर कर दी.

देश के प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ ने भी चीन के राष्ट्रीय रेडियो पर कहा है कि देश के वित्तीय माहौल में सुधार के लिए सरकारी क्षेत्र के बैंकों का एकाधिकार खत्म किए जाने की जरूरत है.

सरकार की नीतियों में आए इस बदलाव से विकास को गति मिलेगी और चीन की मुद्रा को ज्यादा अंतरराष्ट्रीय तरजीह मिलेगी.

मज़बूत युआन

विश्लेषक लंबे समय से कहते रहे हैं कि वित्तीय बाज़ार को खोलकर चीन अपनी मुद्रा युआन को वैश्विक आरक्षित मुद्रा के रूप में डॉलर के मुकाबले एक विकल्प के रूप में खड़ा करना चाहता है.

'द क्वालिफाइड फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर' यानि सक्षम विदेशी संस्थागत निवेशक योजना के तहत ही विदेशी कंपनियां चीनी वित्तीय बाज़ार में निवेश करती हैं और देश के प्रतिभूति नियामक आयोग का कहना है कि इस योजना का कोटा बढ़ाकर पूंजी बाज़ार को और खोलने की दिशा में कदम बढ़ाया गया है.

आयोग के मुताबिक,''चीन के बाज़ार को मुक्त करने और पूंजी खाते में युआन की परिवर्तनीयता हासिल करने की दिशा में ये एक सकारात्मक प्रयोग है.''

सरकार ने ये कदम चीनी स्टॉक मार्केट में उतार-चढ़ाव के बीच उठाए हैं.

पिछले साल शंघाई स्टॉक एक्सचेंज के कंपोज़िट इंडेक्स में 20 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई थी. उसके बाद सूचकांक में तीन फीसदी का मामूली सुधार ही हुआ है.

विश्लेषकों का कहना है कि ओएफआईआई कोटा में बढ़ातरी करने का कदम दरअसल बाजार को स्थिरता प्रदान करने के लिए उठाया गया है.

बैंकिंग क्षेत्र में सुधार

चीन में सख्त नियंत्रण वाले वित्तीय क्षेत्र को थोड़ा उदार बनाने के लिए देश के प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ ने संकेत दिए हैं कि बैंकिंग सेक्टर में निजी निवेश को अनुमति दी जा सकती है.

बैंकिंग क्षेत्र में देश के चार बड़े सरकारी बैंकों का प्रभुत्व है जिसमें चीन के औद्योगिक और वाणिज्यिक बैंक और कृषि बैंक भी शामिल हैं.

Image caption चीन के सरकारी बैंकों का पूंजी बाजार में एकाधिकार है.

प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ ने देश के सरकारी रेडियो पर कहा,''हमारे बैंक आसानी से मुनाफा कमा लेते हैं. क्यों? क्योंकि कुछ बड़े बैंकों का एकाधिकार हो गया है जिसका मतलब है किसी को ऋण और पूंजी लेने के लिए केवल इन्हीं बैंकों के पास जाना पड़ता है.''

आसानी से निवेश के लिए पूंजी का न मिल पाना चीने के छोटे और मझोलो उद्योगों के विकास के रास्ते में सबसे बड़ा रोड़ा माना जाता है.

पूंजी की कमी

ऐसी आशंका रही है कि आसानी से पूंजी न मिल पाने की समस्या की वजह से ऐसे उद्योग पूंजी के लिए अनाधिकारिक क्षेत्रों के पास भी जा सकते हैं जिससे उनका ऋण महंगा हो सकता है.

हार्वर्ड विश्वविद्यालय के विलियम ओवलहॉल्ट का कहना है, ''चीन के आर्थिक इतिहास में ये वो समय है जब भविष्य का विकास और नौकरी की संभावनाएं छोटे और मझोले उद्योगों और निजी क्षेत्र पर निर्भर करेंगी.''

उन्होंने कहा कि अतीत में इन उद्योगों का विकास चीनी केंद्रीय बैंक की नीतियों की वजह से प्रभावित रहा है जिसमें ऋण की सीमा को नियंत्रित करने की कोशिश की गई.

ओवलहॉल्ट ने ये भी कहा कि बैंकिंग सेक्टर में निजी पूंजी के प्रवेश से छोटे उद्योगों को ताज़ा पूंजी हासिल करने के ज्यादा अवसर मिल सकेंगे.

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