चीन में दुर्लभ खनिजों के उत्पादकों का संघ बनेगा

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Image caption रेयर अर्थ खनिजों का 95 प्रतिशत उत्पादन चीन में होता है.

चीन ने रेयर अर्थ खनिज क्षेत्र को चुस्त-दुरुस्त करने के लिए एक संस्था बनाने का निर्णय किया है.

'इंटरनेशनल यूनियन ऑफ़ प्योर ऐंड एप्लाइड केमिस्ट्री' के अनुसार रेयर अर्थ यानी दुर्लभ खनिजों की श्रेणी में 'पीरियोडिक टेबल' की 17 धातुएं आती हैं.

ये धातुएं आमतौर पर किसी एक क्षेत्र में केंद्रित ना होकर पृथ्वी के विभिन्न हिस्सों में फैली होती हैं जिसकी वजह से इनके आर्थिक दोहन में दिक्कतें आती हैं.

इस क्षेत्र में चीन का महत्व इस बात से जाहिर होता है कि दुनिया के कुल दुर्लभ खनिज उत्पादन में उसकी हिस्सेदारी 95 प्रतिशत है.

दुर्लभ खनिजों के लिए चीन की नीतियों की लगातार आलोचना होती रही हैं.

इस आलोचना के केंद्र में चीन की ओर से धातुओं के निर्यात पर कोटा कायम करना है यानी ये धातुएं कितनी मात्रा में बाहर भेजी जा सकती हैं वो सरकार तय करती है.

निर्यात पर नियंत्रण

आलोचकों का कहना है कि इसकी वजह से इनके दाम बढ़ गए हैं.

पिछले महीने अमरीका, जापान और यूरोपीय संघ ने विश्व व्यापार संघ में चीन की इस नीति के विरोध में एक मुकदमा दायर किया था.

ये दुर्लभ खनिज डीवीडी, मोबाइल फोन, फ्लैट स्क्रीन टीवी जैसे कई उच्च तकनीक वाले उत्पादों के निर्माण में काम आते है.

चीन के व्यापार सहयोगियों का कहना है कि चीन इन खनिजों का सबसे बड़ा उत्पादक होने का लाभ घरेलू कंपनियों को देने का प्रयास कर रहा है.

आलोचकों का कहना है कि निर्यात को सीमित करके चीन घरेलू ग्राहकों के लिए इन खनिजों के दाम नीचे रखना चाहता है जबकि अंतरराष्ट्रीय कंपनियों को इनके लिए अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है.

ऐसे दावे भी किए गए हैं कि बीजिंग अंतरराष्ट्रीय कंपनियों पर अपना व्यवसाय चीन में लाने के लिए दवाब डालने का प्रयास कर रहा है.

चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने कहा है कि दुर्लभ खनिजों के लिए बनाई जा रहे इस संघ की सहायता से अंतरराष्ट्रीय व्यापार में आ रहे दिक्कतों और विवादों को हल करने के प्रयासों में सहायता मिलेगी.

‘पर्यावरण की सुरक्षा’

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Image caption दुर्लभ खनिजों में पाए जाने वाले तत्वों का प्रयोग मोबाइल फ़ोन, डीवीडी, और फ़्लैटस्क्रीन टीवी जैसे कई उच्च तकनीक वाले उत्पादों में होता है.

चीन ने अपने आलोचकों के सभी आरोपों का खंडन किया है.

बीजिंग का कहना है कि इन खनिजों के निर्यात को सीमित करने का फ़ैसला इसलिए किया गया है ताकि इन खनिजों को ज़रुरत से अधिक खनन की वजह से पर्यावरण को नुकसान ना पहुंचे.

उद्योग विभाग के उप मंत्री सु बो ने कहा है कि वो भविष्य में इस क्षेत्र की नीतियों को और मज़बूत कर सकते हैं.

समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने सु बो के हवाले से बताया है, “चीन रेयर अर्थ क्षेत्र में सुधार जारी रखेगा. इस क्षेत्र पर पर्यावरणीय नियंत्रण का विस्तार किया जाएगा. पर्यावरण की सुरक्षा के लिए और सख़्त नीतियां बनाई जाएंगी. ”

शिन्हुआ के अनुसार इस संघ के 155 सदस्य होंगे जिनमें दुर्लभ खनिजों के कुछ सबसे बड़े उत्पादक भी शामिल रहेंगे.

एजेंसी के अनुसार संघ चीन के उद्योग और टेक्नोलॉजी मंत्रालय के अधीन होगा.

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