चीन मीडिया ने अग्नि-5 का मजाक उड़ाया

परीक्षण इमेज कॉपीरइट AP
Image caption चीन की प्रैस ने इस परीक्षण को मात्र 'दिखावा' और 'मिसाइल भ्रम' का नाम दिया है.

जहां भारत का मीडिया लंबी दूरी की मार करने वाली अपनी पहली मिसाइल, अग्नि-5, के सफल परीक्षण पर जश्न मना रहा है, वहीं चीन के समाचार पत्रों ने कहा है कि इस परीक्षण का चीन की सैन्य ताकत पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा.

प्रेस ने इस परीक्षण को मात्र 'दिखावा' और 'मिसाइल भ्रम' का नाम दिया है.

एक तरफ भारत का मीडिया इसे 'चाइना-किलर' करार दे रहा है वहीं चीन के अखबारो ने अग्नि-5 को उसकी मिसाइलों के सामने 'बौना' कहते हुए मजाक उड़ाया है.

चीनी और अंग्रेजी भाषा के समाचार पत्रों ने इस सोच को खारिज किया कि यह कूटनीतिक संतुलन को भारत के पक्ष में करेगा जैसा कि भारत का मीडिया दावा करते हुए जश्न मना रहा है.

चीन की सरकारी प्रतिक्रया नियंत्रित रही है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा था कि 'भारत सहयोगी है न कि प्रतिद्वंद्वी'.

एक संपादकीय में गुरुवार को सरकारी समाचार पत्र ग्लोबल टाइम्स ने कहा था कि चीन के सामने भारत कहीं खड़ा नहीं होता.

अखबार लिखता है, ''निकट भविष्य में भारत को अपनी ताकत को बहुत अधिक नहीं आंकना चाहिए. हथियारों की होड़ में भारत चीन की तुलना में कहीं खड़ा नहीं होता.''

'पैसे की बर्बादी'

बीस अप्रेल को छपे एक संपादकीय में सरकारी समाचार पत्र हुआनकिउ शिबाओ ने लिखा कि भारत की वार करने की क्षमता 'अभी अपने शुरुआती दौर में है.'

अखबार ने मिसाइल कार्यक्रम पर ताना कसते हुए आगे लिखा कि अग्नि-5 'भारत की मिसाइलों का पिछड़ापन' दिखाता है और चीन की तुलना में उसके 'सामाजिक और आर्थिक तौर पर पिछड़ने का ठोस प्रदर्शन मात्र है.'

समालोचक वू सुएलान ने समाचार पत्र 'रेनमिन वांग' ने लिखा कि भारत ने हमेशा बड़ी शक्ति बनने का ख्बाव देखा है लेकिन उसकी सामाजिक परेशानियां 'अभी भी बहुत गंभीर हैं.'

मिसाइल बनाने पर पैसा बर्बाद करने के बजाय भारत को 'आम आदमी की जिंदगी सुधारने के बारे में कुछ करना चाहिए.'

संबंधित समाचार