चीन के चतुर छात्र सबसे आगे

चीन छात्र
Image caption रिजल्ट दर्शाता है चीन में शिक्षा दूसरे देशों की तुलना में कहां है.

शिक्षा के स्तर को मापने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर करवाई जाने वाली परीक्षाओं में चीन का प्रदर्शन 'बेहतरीन' है.

पीसा टेस्ट के नाम से जाने जानेवाली इन परीक्षाओं में वाचन, गणना और विज्ञान के क्षेत्र में छात्रों की क्षमता का आंकलन किया जाता है.

आर्गनाइजेशन फॉर इकॉनामिक कॉपरेशन एंड डेवलेप्मेंट ये टेस्ट हर तीन साल पर आयोजित करवाता है.

अंतरराष्ट्रीय छात्रों की क्षमताओं के आंकलन के लिए करवाया जाया वाला पीसा टेस्ट दुनिया भर में बहुत सम्मानित माना जाता है.

हालांकि इस टेस्ट के आयोजनकर्ता एंडरेसन शलेशेयर का कहना है कि इन परिणामों को कभी प्रकाशित नहीं किया गया है.

लेकिन ये दर्शाता है कि चीन की मौजूद शिक्षा व्यवस्था पश्चिमी देशों की तुलना में बहुत आगे है.

हालांकि चीन में हो रही आर्थिक और राजनीतिक प्रगति को लेकर काफी दिलचस्पी रही है लेकिन टेस्ट में वहां के छात्रों का प्रदर्शन दर्शाता है कि चीन अगली पीढ़ी को किस तरह की मुहैया करवा रहा है.

तालिका

साल 2009 के पीसा टेस्ट रिजल्ट में ये बात सामने आई कि शंघाई अंतरराष्ट्रीय शिक्षा तालिका में सबसे ऊपर है.

एंडरेसन शलेशेयर कहते हैं कि चीन के दूसरे हिस्सों और तबकों में भी छात्रों का प्रदर्शन उमदा है.

"ग्रामीण क्षेत्रों और आर्थिक और सामाजित तौर पर कमजोर तबकों में भी छात्रों का प्रदर्शन असाधारण है."

उनका कहना था कि खास बात ये है छात्रो में मौजूद दृढ़ता कि उन्हें तमाम विषमताओं के बावजूद उन्हें कामयाबी हासिल करनी है.

वो कहते हैं, "चीन में लोगों में ये बात गहराई तक घर की हुई है कि जिंदगी में तरक्की करने के लिए शिक्षा बहुत महत्वपूर्ण है."

Image caption नानजिंग में हाई स्कूल के छात्र नारा लगाते हुए कि 'हम कॉलेज जाएंगे.'

जानकार मानते है कि ये इस बात को दर्शाता है कि समाज किस तरह शिक्षा के क्षेत्र में विशेष घ्यान दे रहा है.

भवन

आयोजनकर्ता एंडरेसन शलेशेयर कहते हैं कि चीन के गरीब इलाकों का दौरा करते हुए उन्होंने पाया कि स्कूल के भवन सबसे बड़े थे और बेहतर तरीके से बने हुए थे.

उन्होंने कहा कि पश्चिमी देशों में आप ऐसे भवनों में शॉपिंग माल पाएंगे.

"आपको एक ऐसे समाज की तस्वीर दिखती है जो अपने भविष्य की ओर ध्यान केंद्रित कर रहा है न कि वर्तमान के आराम औप ऐश पर."

एडरेसन शलेशेयर ने पाया कि चीन में शिक्षा को लेकर छात्रों में की मान्यताएं भी अलग तरह की है.

उनके अनुसार अमरीका में छात्र किस्मत पर यकीन करते हैं - मैं बचपन से ही गणित में अच्छा हूं, मैं उतना तेज नहीं हूं मैं कोई और विषय पढ़ूगा. यूरोप में बात होगी खानदानी परंपरा की - मेरे पिता बढ़ई थे मैं भी वहीं बनूंगा, जबकि चीन में दस में से नौ छात्र कहेंगे कि अगर मैं मेहनत करूंगा तो मेरा प्रदर्शन बेहतर होगा.

'हमसे आगे'

पिछले पीसा टेस्ट रिजल्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा था कि 'जो देश आज शिक्षा में हमसे आगे है वो कल दूसरे हल्कों में भी आगे होगा.'

पीसा टेस्ट हालांकि जर्मनी के लिए बड़ा बुरा समाचार है जहां के बारे में सामने आया है कि उनकी शिक्षा व्यवस्था जिसको लेकर बड़ी बातें होती रहती हैं वो बड़ा ही औसत दर्जे का है.

ये भी सामने आया कि अमरीका अब दूसरे देशों से बेहतर विचारों को अपना रहा है.

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