चीन में जबरन गर्भपात की फोटो पर गुस्सा

  • 14 जून 2012
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Image caption चीन की सरकार पर ‘एक ही बच्चा’ की नीति के तहत फिर जबरल गर्भपात का आरोप लगा है. हालांकि चीन ने इस खबर का खंडन किया है.

चीन में एक महिला के सातवें महीने के भ्रूण की फोटो सामने आने के बाद लोग गुस्सा हैं और लोग इंटरनेट पर अपनी नाराज़गी जता रहे हैं.

अमरीका से चीन पर निगाह रख रही एक मानवाधिकार संस्था 'ऑल गर्ल्स एलाउड' का दावा है कि चीनी अधिकारियों ने दूसरा बच्चा होने के दंड के रूप में जुर्माना न भरने के कारण फेंग जिआमेई नामक महिला का जबरन गर्भपात करा दिया है.

ग्लोबल टाइम्स अखबार के अनुसार राष्ट्रीय और स्थानीय परिवार नियोजन अधिकारी झेनपिन में हुए इस मामले की जांच कर रहे हैं.

सरकार का खंडन

संस्था का कहना है कि चीनी सरकार की ‘एक ही बच्चा’ की नीति के तहत यह गर्भपात किया गया है. हालांकि सरकार ने इन आरोपों का खंडन किया है.

संस्था की सदस्य चेई लिंग ने कहा, “फेंग की कहानी से साफ है कि ‘एक ही बच्चा’ की नीति के नाम पर हर दिन औरतों के खिलाफ हिंसा जारी है.”

संस्था के अनुसार उसने फेंग और उसके पति डेंग जुआन से बात की है. डेंग का कहना है कि उसकी पत्नी को जबरन अस्पताल ले जाया गया और गर्भपात तक हिरासत में रखा गया.

झेनपिन में अनाम अधिकारियों के हवाले से स्थानीय मीडिया में इस पूरी खबर का खंडन छपा है.

समाचार एजेंसी एएफपी के अनुसार नेटईज डॉटकॉम पर एक पाठक ने लिखा है, “ऐसा कहा जाता है कि सिर्फ जापानी और नाजियों ने ऐसा किया था. लेकिन यह तो वास्तव में हो रहा है और सिर्फ़ यही एक मामला नहीं है. ऐसा करने वालों को मौत की सजा मिलनी चाहिए.”

जबरन गर्भपात का विरोध करने वाले कार्यकर्ता चेन गुआंगचेंग को पिछले महीने ही चीन छोड़कर अमरीका भागना पड़ा है. इससे पहले वो घर में नजरबंद थे.

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