तिब्बत में पर्यटन के लिए चीन की योजना

  • 23 जून 2012
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चीन की सरकारी एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार चीन तिब्बत को अंतरराष्ट्रीय पर्यटक स्थल बनाने के लिए वहाँ 22 आदर्श गाँव बनाएगा जिसके लिए 40 करोड़ युआन खर्च किए जाएँगे.

रिपोर्ट के अनुसार चीन तिब्बत की राजधानी ल्हासा से 320 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में न्यिंग्ची प्रांत को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन के लिए विकसित करना चाहता है.

तिब्बत की राजधानी ल्हासा से 320 किलोमीटर दूर स्थित ये क्षेत्र जंगलों और बर्फ़ से ढँके पहाड़ों, घाटियों और नदियों के लिए जाना जाता है.

शिन्हुआ के अनुसार चीनी अधिकारियों ने मार्च में एक गाँव के विकास के लिए हुए एक समारोह में हिस्सा लिया.

उन्होंने बताया कि इन गाँवों में तिब्बती प्रथाएँ दिखेंगी और वहाँ प्रकृति को संरक्षित रखा जाएगा.

उनकी योजना न्यिंग्ची में तीन साल के भीतर 22 आदर्श गाँवों के विकास की है जहाँ के निवासी पर्यटकों को ठहराकर पैसे कमा सकेंगे.

पर्यटन के विकास के लिए तिब्बत और दक्षिणी चीन के ग्वांग्जो प्रांत के बीच साझेदारी की जाएगी.

मक़सद

चीन एक लंबे समय से तिब्बत के लोगों का भरोसा जीतने के लिए वहाँ आर्थिक विकास के प्रयास करता रहा है मगर उसे कड़ी नीतियों के कारण आलोचनाएँ झेलते रहनी पड़ती हैं.

चीन के ऊपर तिब्बत में धार्मिक दमन और वहाँ की संस्कृति के साथ छेड़-छाड़ का आरोप लगता रहता है.

चीन की नीतियों के विरोध में पिछले एक साल के भीतर तिब्बत में 35 से अधिक लोगों ने आत्मदाह की कोशिशें की हैं जिनमें से कई मारे भी गए हैं.

समाचार एजेंसी एपी के अनुसार चीन ने इस महीने के आरंभ से विदेशी पर्यटकों के तिब्बत जाने पर रोक लगाई हुई है हालाँकि इसका औपचारिक एलान नहीं की गई है.

चीनी अधिकारी अक्सर इस इलाक़े में विदेशियों के जाने पर रोक लगाते रहते हैं और ऐसा प्रायः अशांति के मौकों पर होता है.

तिब्बत चीन का एक स्वायत्त शासी क्षेत्र है जिसपर चीन सदियों से अपना अधिकार जताता है.

मगर वहाँ के अधिकतर निवासी निर्वासित धर्मगुरू दलाई लामा को अपना नेता मानते हैं.

चीन दलाई लामा और उनके समर्थकों को अलगाववादी ठहराता है.

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