इकलौते बच्चों की मौत पर चीन में मुआवजे की मांग

  • 26 जून 2012
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Image caption साल 2050 के अंत तक चीन में करीब तीन के एक-तिहाई नागरिकों की उम्र 60 वर्ष से ज्यादा होगी.

चीन की एक बच्चा प्रति परिवार की नीति से क्रोधित करीब 100 मां-बाप जो अपनी इकलौती औलाद खो चुके हैं, चाहते हैं कि सरकार उन्हें और मुआवजा दे. अब वे इसके लिए अदालत जाने की तैयारी कर रहें हैं.

अभिभावकों का कहना है कि चीन में पारंपरिक तौर पर मां-बाप के बूढ़े हो जाने पर बच्चे ही उनकी देखरेख करते हैं. लेकिन इकलौते बच्चे की मौत के बाद उनका कोई सहारा नहीं बचा. ऐसे में उन्हें उनका बुढ़ापा अंधकारमय हो गया है.

अपने बच्चे खो चुके इन लोगों का कहना है कि उन्हें चीन के एक बच्चा प्रति परिवार की नीति का अनुसरण करने के लिए बहुत महंगी कीमत चुकानी पड़ी है. हालांकि वो ये भी मानते है कि अगर राष्ट्र के हित के बारे में सोचा जाए तो ये फायदेमंद ही साबित हुई है.

इस मामले से चीन की एक बच्चा नीति पर नई बहस छिड़ गई है. जानकार चिंता जता रहे हैं कि इस नीति के चलते कही चीन एक रईस देश बनने से पहले एक बूढ़ा देश न बन जाए.

औसत आयु

जैसे-जैसे देश विकसित होते जाते हैं औसत आयु बढ़ती चली जाती है. ऐसा इसलिए क्योंकि लोग ज्यादा दिनों तक जीते हैं और बच्चे कम होते हैं. लेकिन चीन में एक बच्चा नीति से जन्म दर में काफी कमी आई है.

फुडान यूनिवर्सिटी के एक विशेषज्ञ प्रोफेसर पेंग शीज़े कहते हैं, “चीन में औसत उम्र बढ़ने की गति विचित्र है.”

उनका कहना है कि औसत उम्र के जिस स्तर पर पहुंचने में ब्रिटेन को 60 और फ्रांस को 70 वर्ष लगे, उस स्तर पर चीन सिर्फ 20 वर्षों में पहुंच गया.

नए आंकड़े दिखाते है कि शंघाई में हर चार स्थाई नागरिक में से एक सेवानिवृत हो चुका है. चीन के बाकी हिस्से भी नई नीति के असर से अछूते नहीं हैं. साल 2050 के अंत तक करीब चीन के एक-तिहाई नागरिकों की उम्र 60 वर्ष से ज्यादा होगी.

चीन में वृद्धों की संख्या बढ़ने के साथ ही सरकारी सुविधाओं पर भी दबाव बढ़ गया है. सरकार के एक अनुमान के मुताबिक वहां करीब एक करोड़ प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी चाहिए, जबकि पूरे देश में ही इनकी संख्या कुल एक लाख है.

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