गिल के जाने का मतलब

Image caption एमएस गिल खेल दो साल पहले खेल मंत्री बने थे

अगर कोई व्यक्ति ज़्यादातर लोगों की नज़रों में सही काम कर रहा हो और उसे बीच रास्ते में रोक दिया जाए तो अच्छा तो नहीं ही लगता.

एमएस गिल अब खेल मंत्री नहीं हैं, यह उन खेल अधिकारियों के लिए अच्छी ख़बर है जिनकी मनमानी और वर्चस्व को गिल चुनौती दे रहे थे.

एक ऐसे देश में किसी की कोई ज़िम्मेदारी नहीं है, अगर आपके ऊपर शक्तिशाली लोगों का वरदहस्त हो तो आप हत्या करके भी बेदाग़ बच सकते हैं, वैसे देश में गिल खेल प्रशासन में कुछ क्रांतिकारी बदलाव लाने के प्रयास कर रहे थे.

गिल की अपनी कमजोरियाँ रही हैं, उन्होंने ग़लतियाँ की हैं, मीडिया को नज़रअंदाज़ करके या ग़लत मौक़े पर ग़लत बात करके पत्रकारों को चिढ़ाया भी है लेकिन उनकी नीयत ठीक थी, उनका मक़सद नेक था.

वे एक सफल पूर्व प्रशासक थे जिनकी ईमानदारी पर शक पर कोई सवाल नहीं उठाता, गिल को राष्ट्रमंडल खेलों से दो साल पहले खेल मंत्री बनाया गया था तब भारी अव्यवस्था थी और कुछ भी तैयार नहीं था.

अंततः भारी अव्यवस्था और राष्ट्रमंडल खेलों की आयोजन समिति के ऊपर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच काफ़ी सफल आयोजन हुआ.

खेलों के नाम पर हुई भारी लूट की जाँच चल रही है, आरोप तय किए जा रहे हैं लेकिन गिल की ओर किसी ने ऊँगली नहीं उठाई है.

तो ऐसे में गिल का कुसूर क्या ये था कि उन्होंने सरकारी नियमों को लागू करने की कोशिश की, खेल फ़ेडरेशन के अधिकारियों का कार्यकाल सीमित करने का प्रयास किया, अगर सरकार खेलों पर पैसा ख़र्च करती है तो उसके मंत्री को क्या ये पूछने का अधिकार नहीं है कि पैसा कहाँ गया?

ऐसे सब करने में क्या उन्होंने कुछ शक्तिशाली लोगों से बैर मोल ले लिया?

हम सभी को पता है कि भारतीय खेलों की समस्या क्या है लेकिन कोई उन लोगों के ख़िलाफ़ मुद्दों को उठाने की हिम्मत नहीं दिखाता जिन्हें कुछ लोग'स्पोर्ट्स माफ़िया' कहते हैं.

ऐसा करने के लिए गिल की सराहना की जानी चाहिए, अगर इस प्रक्रिया में वे कोई ग़लती करते तो उन्हें चेतावनी दी जानी चाहिए थी लेकिन इस तरह का व्यवहार उचित नहीं था.

क्या यह महज संयोग है कि क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड की अनियंत्रित शक्ति पर प्रश्न उठाने के दो दिन के भीतर ही उन्हें खेल मंत्रालय से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया?

कुछ साल पहले तक भारतीय क्रिकेट और अब अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को चलाने वाले शरद पवार इस देश के कृषि मंत्री भी हैं और उस क्षेत्र में क्या हो रहा है यह किसी से छिपा नहीं है.

अब तो यही उम्मीद की जा सकती है कि नए खेल मंत्री अजय माकन गिल की विरासत को आगे बढ़ाएँगे.

बीबीसी में अन्य जगह