पाक कलाकारों के लिए अपनों की निंदा आसान नहीं: खेर

  • सुनीता पांडेय
  • बीबीसी हिंदी के लिए

भारत प्रशासित कश्मीर के उड़ी में सेना के शिविर पर चरमपंथी हमले के बाद महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) ने भारत में काम करने वाले पाकिस्तानी कलाकारों पर प्रतिबंध की मांग की थी.

मनसे की इस मांग के खिलाफ निर्माता निर्देशक करण जौहर खुलकर सामने आ गए.

मनसे की मांग और करण जौहर के स्टैंड पर बीबीसी ने कुछ फ़िल्मी हस्तियों से बातकर उनकी राय जानी-

अभिनेता वरुण धवन कहते हैं, "मैं सरकार के नियमों का पालन करता हूं. सरकार जो भी सोचती है, वैसा होना चाहिए. मैं उसका समर्थन करूँगा. मैं भारत की सरकार के साथ पूर्ण रूप से खड़ा हूं."

उन्होंने कहा, "अगर कलाकारों पर प्रतिबंध से आतंकवाद रुकता है, तो सरकार को ऐसा करना चाहिए. हालांकि, इस पर सरकार को पहले बैठकर फैसला लेना चाहिए."

चरमपंथी हमलों के सवाल पर वरुण कहते हैं, "मेरा दिल उन जवानों की मौत पर काफी दुखी है. उन पर हुआ यह बहुत भयानक हमला था."

अनुपम खेर कहते हैं, "मुझे लगता है कि सीमा पार के उन अभिनेताओं की यह नैतिक जिम्मेदारी है कि उड़ी हमले की निंदा करें, जिसमें हमारे देश के 18 जवान मारे गए थे. लेकिन किसी भी पाकिस्तानी कलाकार से ऐसी प्रतिक्रिया नहीं मिली.''

अनुपम खेर ने कहा, "मैं यह नहीं कह रहा हूं कि आप अपने देश की निंदा करें. वो वहां (पाकिस्तान में) रहते हैं और उनके लिए अपनों की निंदा करना आसान नहीं होगा. लेकिन पाकिस्तानी कलाकार हमले की निंदा तो कर ही सकते हैं.''

निर्माता-निर्देशक अनुराग कश्यप ने अपने दोस्त करण जौहर का समर्थन किया है.

वो कहते हैं, ''करण जौहर ने बहुत अच्छी बात कही है. अगर आप फ़वाद ख़ान को वापस भेजना चाहते हैं तो ठीक है. लेकिन इसके बाद आप और कौन सा कदम उठाएंगे? क्या उन्हें वापस भेजकर समस्या सुलझ जाएगी? उन्हें वापस भेजने के बाद आपका अगला कदम क्या होगा? मुझे लगता है इसका कोई दूसरा हल निकालना बेहतर होगा.''

फिल्म निर्माता राकेश ओमप्रकाश मेहरा का मानना है कि सीमा पार के कलाकार चरमपंथी कृत्यों के लिए जिम्मेदार नहीं हैं, वो तो अक्सर इन सभी विवादों में फंस जाते हैं.

फिल्म 'क्वीन' के निर्देशक विकास बहल इस बात को लेकर आश्वस्त नहीं हैं कि भारत में काम कर रहे पाकिस्तानी कलाकारों पर प्रतिबंध की मांग किसी समस्या का समाधान है.

वो कहते हैं, " पड़ोसी देश के कलाकारों को देश छोड़ने पर मजबूर करने के बजाय इस प्रकार के चरमपंथ के मुद्दों पर दृढ़ता से कार्रवाई की जनी चाहिए."

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