'मेरे फल वाले ने भी उधार दे दिया है'

  • सुशांत मोहन
  • बीबीसी संवाददाता
नेहा धूपिया
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नेहा धूपिया

नेहा धूपिया से बातचीत करने के लिए जब हम कमरे में घुसे तो वो अपना 500 का नोट खो जाने पर गरमाई हुई थीं. दरअसल फ़िल्म 'मोह माया मनी' के प्रमोशन के लिए आई नेहा ने अपने असिस्टेंट को एक 500 का नोट संभालने के लिए दिया था और थोड़ी ही देर बाद वो नोट खो जाने से नेहा बेहद परेशान हो गई.

नेहा ने कहा, "मैं पैसे को लेकर ख़ासा सावधान रहती हूं और फिर आजकल तो वैसे ही दिक्कत है, गुस्सा तो आएगा ही." नोटबंदी को लेकर आ रही दिक्कतों पर वो कहती हैं, "मेरे पास दो दिन पहले पैसे ख़त्म हो गए थे और मेरे सपोर्ट स्टाफ़ को ट्रैवल के लिए देने लायक पैसे नहीं थे."

लेकिन इस परेशानी के दौर में लोग काफ़ी सहनशील होकर मदद कर रहे हैं. नेहा ने ये माना, "अपने पड़ोसी को जब मैंने बताया कि मेरे पास कैश ख़त्म हो गया है तो उन्होनें मुझे कुछ सौ-सौ के नोट दे दिए. वहीं मेरे फलवाले ने कैश न होने की बात पर खुशी-खुशी कहा कि मैडम आप फल लेते रहिए, जब 2000 की कीमत हो जाएगी, मैं एक साथ ले लूंगा."

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मोह माया मनी का पोस्टर

नेहा ने कहा कि कालेधन से लड़ने का यह अच्छा तरीका है और लोग अपने अपने तरीकों से इस समस्या से जूझ रहे हैं लेकिन लोगों की सहूलियत के लिए थोड़ी तैयारी की जा सकती थी, फिर वो हँसते हुए कहती हैं, "मैं तो अभी बाल भी नहीं कटवा रही हूं क्योंकि अपनी हेयर स्टाईलिस्ट को देने के लिए कैश नहीं है."

नेहा धूपिया के आलोचक कई बार उन्हें मेन स्ट्रीम अभिनेत्री मानने से इनकार कर देते हैं और उनके टॉप 3 में नहीं होने या बड़ी फ़िल्मे नहीं करने की भी चर्चा की जाती है.

लेकिन नेहा इस बात को एक अलग नज़रिए से देखती हैं, "मैं जानती हूं कि मेरे घर के आगे निर्माताओं की लाईन नहीं लगी है, लेकिन पिछले 13 सालों में मेरे पास एक पहचान है और मैं जानती हूं कि जो काम मुझे मिल है वो मेरी काबिलियत से मिल रहा है."

बड़े बैनरों की फ़िल्मों में काम नहीं करने की बात पर वो कहती हैं, "देखिए फ़िल्मों में मेहनत उतनी ही लगती है. मोह माया मनी, फंस गए रे ओबामा भले जैसी फ़िल्में भले ही छोटे बैनर की फ़िल्में हैं लेकिन इनमें स्क्रिप्ट कमाल की है और यही पिछले 13 सालों में मैंने समझा है कि कैसे अच्छा काम करना है."

नेहा मानती है कि बड़ी फ़िल्मों में शोपीस बनने से बेहतर है कि शोकेस की जाने वाली फ़िल्में की जाएं. वैसे बॉलीवुड में अक्सर यह चर्चा की जाती है कि हीरो तो 40-50 की उम्र पार करने पर भी फ़िल्मे करते रहते हैं लेकिन हीरोइनें काम नहीं कर पाती.

नेहा धूपिया इससे इंकार करती हैं और आज के वक़्त में इस सवाल को अप्रासंगिक मानती हैं, "आज से 5 साल पहले मैं आपकी बात मान लेती लेकिन अब वक़्त अलग है. विद्या बालन, कंगना राणावत एक नई कहानी लिख रही हैं."

वो कहती हैं, "अभी भी श्रीदेवी, माधुरी, काजोल काम कर रही हैं, हां, पहले यह मौके महिलाओं को मिले नहीं थे. पर अब बात दूसरी है."

नेहा चलते-चलते बॉडी शेमिंग पर कड़ी चोट करते हुए कहती हैं कि हमारे देश की महिलाओं और ख़ासकर युवा लड़कियों को समझना होगा कि हर लड़की की शारिरिक बनावट या सरंचना अलग अलग होती है. मॉडल जैसा दिखना बिल्कुल भी स्वस्थ नहीं है और अगर आप ऐसा कर रही हैं तो आप अपने शरीर को हानि पहुंचा रही हैं.

नेहा कहती हैं, "मॉडल ऐसा करती हैं क्योंकि उन्हें रैंप पर कपड़ों को प्रदर्शित करना होता है, लेकिन वो ऐसा बहुत सालों तक नहीं करते और हर लड़की ज़ीरो फ़िगर नहीं हो सकती क्योंकि हर एक की मेटाबॉलिज़्म अलग है."

नेहा खुद 16 साल से मॉडलिंग में सक्रिय हैं और कहती हैं, "मैं कभी ज़ीरो फ़िगर का समर्थन नहीं करती और जो मैगज़ीन हमारे शरीर को फ़ोटोशॉप कर के दिखाती और छापती हैं आप उनके बहकावे में न आएं. वो तस्वीरें भ्रामक हैं, स्वस्थ होना ही सेक्सी भी है."

नेहा धूपिया की फ़िल्म मोह माया मनी 24 नवंबर को रीलीज़ हो रही है जिसकी कहानी कालेधन पर ही आधारित है.

नेहा इसे एक सुखद संयोग मानती हैं कि प्रधानमंत्री की कालेधन की अनाउंसमेंट और उनकी फ़िल्म का विषय मिलता जुलता है और अब शायद इस फ़िल्म को और ज़्यादा लोग याद करेंगे, हालांकि कैश की कमी के चलते कितने दर्शक हॉल तक पहुंचेंगे कहना मुश्किल है.

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