सोना मेरी पहचान, पर ग्रैमी मेरी चाह : बप्पी लहरी

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अपने जन्मदिन पर बप्पी दा का एक सपना जो अब तक अधूरा हैं.

आलोकेश लाहिड़ी को हम बप्पी लहरी के नाम से जानते हैं. आज उनका 64वां जन्मदिन है. सिर्फ़ चार साल की उम्र में लता मंगेशकर के एक गीत में तबला बजाकर मशहूर हुए आलोकेश लाहिड़ी को सब प्यार से बप्पी बुलाने लगे.

तब से अब तक वो बप्पी दादा के नाम से बॉलीवुड ही नहीं हॉलीवुड में भी फेमस हैं.

आज बप्पी लहरी लॉस एंजेल्स में हैं, जहाँ बीबीसी हिंदी ने उन्हें फ़ोन किया और बातचीत हुई.

अपने फ़िल्मी सफर में बप्पी लहरी ने कई अवार्ड जीते.

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80 का दशक बप्पी लहरी की डिस्को धुनों पर नाचा और उन्हें डिस्को किंग बना दिया. बॉलीवुड में संगीत को डिजिटल करने वाले संगीतकारों में बप्पी का बड़ा योगदान है.

अपने जन्मदिन पर अपनी उपलब्धियों को बताते हुए बप्पी लहरी ने बीबीसी को बताया, "मैंने कई अवार्ड जीते, पर ग्रैमी आजतक नहीं जीत पाया. मैंने अबतक पांच बार ग्रैमी में एंट्री भेजी है. इस बार एक एल्बम 'इंडियन मेलोडी' - जिसमे सूफी, लोक गीत और भारतीय संगीत शैली के दूसरे गीत मैंने पेश किए हैं - वो ग्रैमी गई है, उम्मीद करता हूँ इस बार ग्रैमी जीत जाऊं."

बप्पी लहरी 48 सालो से संगीत बना रहे हैं.

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उनका संगीत हॉलीवुड ने भी कई बार इस्तेमाल किया है. 1981 में आई फिल्म ज्योति का गाना 'कलियों का चमन' अमरीकन टॉप 40 का हिस्सा बना.

आजकल हॉलीवुड की एक कार्टून फ़िल्म 'मोआना' की डबिंग में व्यस्त बप्पी बताते हैं, 'मैंने एक्टिंग की है, लेकिन कार्टून फ़िल्म के लिए डबिंग करना एक अलग ही अनुभव है'.

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