फ़िल्म रिव्यू- सोचने पर मजबूर कर देती है 'डीपवाटर होराइज़न'

  • सुशांत मोहन
  • बीबीसी संवाददाता
फ़िल्म रिव्यू

रेटिंग - 3 स्टार

निर्देशक - पीटर बर्ग

अभिनेता - मार्क व्हॉलबर्ग, कर्ट रसल, जीना रॉड्रिग़्ज़

साल 2010 में मेक्सिको की खाड़ी में एक अमरीकी तेल कंपनी की तेल निकालने वाली साइट पर हुए हादसे पर आधारित फ़िल्म है डीपवॉटर होराइज़न.

साल 2009 में इस 'ऑयल रिग' पर दुनिया का सबसे गहरा (35 हज़ार फ़ीट) तेल का कुँआ खोदा गया था और इसी सफलता से प्रेरित होकर इस रिग को एक दूसरी जगह पर खुदाई के लिए भेजा गया.

लेकिन समुद्र के भारी दबाव के चलते तेल को ऊपर लाने वाले पाईप टूट गए और टनों तेल धमाके के साथ बाहर आ गया और उसमें आग लग गई.

इस तेल ने आग पकड़ ली और इस हादसे में 11 लोग मारे गए. फ़िल्म में इसे भीषण हादसा बताया गया है. फिल्म में दिखाया गया है कि आग को 64 किलोमीटर दूर तट से भी देखा जा सकता था.

जिस साइट पर आग लगी थी उसका असल नाम भी 'डीपवॉटर होराइज़न' ही था और इसी नाम पर बनी इस फ़िल्म में आप उस हादसे के दौरान इस साइट पर खुद को मौजूद पाते हैं.

आपको बॉलीवुड फ़िल्म 'एयरलिफ़्ट' याद होगी जिसमें अक्षय कुमार, रंजीत कटियाल के किरदार में थे जो सभी देशवासियों को मुसीबत से निकालते हैं लेकिन रंजीत एक काल्पनिक किरदार था लेकिन इस फ़िल्म का माइक विलियम्स एक असली आदमी है.

फ़िल्म के नायक माइक विलियम्स (मार्क) जो एक इंजीनियर हैं, सबसे गहरा तेल का कुँआ खोदने वाली कंपनी के अगले कुँए को खोदने के लिए बीच समुद्र में पहुंचे हैं.

माइक और उनकी टीम को शक़ है कि सबसे गहरा कुँआ खोदने के बाद से इस तेल प्लांट या ऑयल रिग की क्षमता कम हुई है और अगला गहरा कुँआ खोदने से पहले इसे भारी मरम्मत की ज़रुरत है.

लेकिन तेल कंपनी के मालिक इंजीनियर्स की इस चेतावनी को नज़रअंदाज़ करते हुए कुँआ खोदना शुरू करते हैं.

कुँआ खुदने के कुछ ही समय बाद कमज़ोर हो चले पाइप टूट जाते हैं और बेहद तेज़ी से तेल का फव्वारा निकलने लगता है. कंपनी के लोग इसे रोकने के लिए पाइप को बंद करने की कोशिश करने लगते हैं और इसी दौरान तेल में आग लग जाती है.

समंदर में फैलता तेल और आग के बीच एक और हादसा होता है जिसके लिए आप इस फ़िल्म को देख सकते हैं क्योंकि यह सारी चीजें कमाल के कंप्यूटर ग्राफ़िक्स से दिखाई गई हैं.

फ़िल्म की कमियों में आप यह मान सकते हैं कि इस फ़िल्म में साइंस का इतना ज़्यादा इस्तेमाल किया गया है कि एक आम दर्शक एक समय बाद कुछ समझ नहीं पाएगा लेकिन इसकी कमी कमाल के ग्राफ़िक्स पूरी करते हैं.

इस फ़िल्म का एक अच्छा पहलू यह भी है कि इसमें महिलाओं को भी मुख्य टीम का हिस्सा दिखाया गया है. आमतौर पर इस तरह की फ़िल्मों में पुरुषों की एक टीम होती है और महिलाएं सिर्फ़ अपने पतियों के लिए परेशान होती हैं.

अमरीकी तेल कंपनियों के इतिहास की सबसे बड़ी त्रासदी पर आधारित इस फ़िल्म को देखकर आप एक बार ज़रुर सोचेंगे कि पेट्रोल या डीज़ल के लिए हम पृथ्वी के साथ किस तरह "खेल" रहे हैं.

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