'पहले सिर्फ़ गाने गाए थे, रोल तो अब मिल रहे हैं'

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जयपुर साहित्य उत्सव में पहली बार हिस्सा लेने आए बॉलीवुड अभिनेता ऋषि कपूर ने अपने 44 साल लम्बे फ़िल्मी जीवन को याद करते हुए कहा, "जर्सी पहन कर स्विट्ज़रलैंड में ख़ूबसूरत हीरोइनों के साथ सिर्फ़ गाना ही गया और कुछ नहीं किया. रोल तो मुझे अब मिलने लगे हैं दूसरी पारी में. अब पहली बार मुझे एक्टिंग का मौका मिल रहा है पॉजिटिव, निगेटिव और कभी 90 साल की उम्र का."

ऋषि कपूर ने कहा उन्हें ख़ुशी है कि वे उस दौर में हैं जहाँ उनका बेटा भी काम कर रहा है.

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ऋषि कपूर के मुताबिक़ 20 साल की उम्र में 'बॉबी' की जबरदस्त सफलता से उनका दिमाग घूम गया था. "इतनी शोहरत, इतना नाम. मैं तो उड़ रहा था पर ऊपर वाले ने बहुत जल्दी मेरे पर काट दिए. फिर मेरा संघर्ष शुरू हुआ. शायद आज के बच्चों को भी 20-21 साल की उम्र में ऐसी सिचुएशन नहीं मिलती है. तो आप कल्पना कीजिए 1973 का दौर."

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"मैं शायर तो नहीं" सत्र में उत्सव के दूसरे दिन फ़िल्म लेखिका रेशल डायर के साथ बातचीत में उन्होंने कहा कि ऐसा माना जाता है कि फ़िल्मी सितारों के बेटे-बेटियों के लिए फ़िल्मों में आना आसान है. पर भारतीय फिल्मों में कोई भाई भतीजावाद नहीं. आपकी तुलना आपकी अंतिम फ़िल्म से की जाती है कि आप बेहतर रहे या ख़राब.

फिल्म 'मेरा नाम जोकर' में बाल कलाकार के रूप में राष्ट्रीय पुरस्कार जीतने पर जब वे दादा पृथ्वी राज कपूर से आशीर्वाद लेने गए तो उनके शब्द थे, "राज ने मेरा कर्जा उतार दिया तुझ पर."

ऋषि ने कहा कि उस वक्त मुझे समझ नहीं आया पर अब जानता हूँ कि यह बहुत बड़ी बात थी.

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अपनी किताब 'खुल्लम खुल्ला' के बारे में उन्होंने कहा कि यह बहुत ईमानदारी से लिखी है और अपनी कमजोरियों को भी जाहिर किया है.

उनके पिता राज कपूर और दादा सहित कपूर परिवार के अन्य कई सदस्यों पर बहुत सी किताबें लिखी गई हैं पर "फर्स्ट पर्सन" में नहीं.

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उन्होंने कहा कि वे जिस दौर में आये अमिताभ बच्चन, धर्मेन्द्र, विनोद खन्ना सहित बहुत से कामयाब सितारे थे. "उनके सामने मेरा क्या मुकाबला था पर अपनी शिद्दत, कड़ी मेहनत, प्रतिभा और लोगों के प्यार से उन्होंने अपनी जगह बनाई."

सामयिक मुद्दों पर ट्वीट करने में सक्रिय ऋषि ने मुंबई में कुछ वर्ष पहले बने बांद्रा सी लिंक का नाम पूर्व प्रधान मंत्री राजीव गांधी के नाम पर रखने पर नाराज़गी जताते हुए कहा कि क्या देश में स्कूल, कालेज, पुल, सड़क सिर्फ एक हुई परिवार के नाम पर होना चाहिए. उन्होंने इसे रोकने के लिए संविधान में संशोधन का सुझाव दिया.

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