क्या चे ग्वेरा से जलते थे फ़िदेल कास्त्रो?

चे ग्वेरा

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क्यूबा के क्रांतिकारी नेता फ़िदेल कास्त्रो के बेहद क़रीबी रहे चे ग्वेरा की मौत के 50 साल होने वाले हैं.

समय बदला लेकिन वहां के लोगों के जेहन में चे की यादें जस के तस बरक़रार हैं. अर्जेंटीना में जन्मे क्यूबा के क्रांतिकारी नेता चे ग्वेरा वामपंथियों के हीरो थे. 20वीं सदी में उनकी एक बेहद ख़ास तस्वीर बन गई.

फ़िदेल कास्त्रो की मौत के लगभग एक साल बाद भी उनके इस पुराने युद्ध सहयोगी की यादें जहां पुरानी पीढ़ियों में जीवित हैं वहीं युवा पीढ़ी की कौतूहल पैदा करती हैं.

बीबीसी मुंडो ने रविवार को समाप्त हुए हे फ़ेस्टिवल 2017 में चे ग्वेरा के बारे में लोगों के कौतूहल का जवाब देने के लिए मशहूर पत्रकार और लेखक जॉन ली एंडरसन को आंमत्रित किया. यहां उन्होंने चे से जुड़ी कई जानकारियां साझा कीं.

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ग्वेराः ए रिवोल्यूशनरी लाइफ़ के लेखक जॉन ली एंडरसन

ग्वेराः रिवॉल्यूशनरी लाइफ़

अमरीकी लेखक एंडरसन ने चे पर "ग्वेराः ए रिवॉल्यूशनरी लाइफ़" नामक किताब लिखी हैं.

यह किताब न केवल अर्जेंटीना के गुरिल्ला लड़ाकों की सबसे अधिक प्रसिद्ध आत्मकथाओं में से है बल्कि उन चीज़ों का पता लगाने में योगदान भी है जिन्हें दशकों पहले एक अज्ञात बोलिवियाई क्षेत्र में दफ़न कर दिया गया था.

लोगों ने एंडरसन से कई सवाल पूछे. एंडरसन ने भी इसका बेहद माकूल जवाब दिया.

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अर्जेंटीना लौटकर क्रांति करना चाहते थे चे

जब ये पूछा गया कि क्या यह सच है कि चे को क्यूबा इसलिए छोड़ना पड़ा कि उनकी अधिक लोकप्रियता की वजह से कास्त्रो उनसे ईर्ष्या करने लगे थे?

एंडरसन ने कहा, "ये सच नहीं है, मुझे पता नहीं ये बातें कहां से आती हैं. (हंसते हुए) चे फिदेल के एक समर्पित दोस्त थे और उन पर पूरा विश्वास करते थे. साथ ही यह भी स्पष्ट था कि कास्त्रो क्यूबा के शासक थे. हालांकि उन्हें वहां की नागरिकता उनकी सेवाओं के बदले मिली थी."

उन्होंने कहा, "चे हमेशा से अपने घर अर्जेंटीना लौट कर वहां भी क्रांति करना चाहते थे. बोलिविया जाना इसी ओर एक क़दम था. हालांकि उस समय सोवियत संघ की अगुवाई वाले समाजवादियों के आलोचक बन गए थे. चे के अनुसार, उनमें वास्तविक समाजवाद आत्मा की कमी थी. लेकिन क्यूबा के नेता के रूप में फ़िदेल प्रतिबद्ध थे क्योंकि उन्हें एक सहयोगी और संरक्षक मिल रहा था. तब वो जाने के तैयार हुए."

एंडरसन ने कहा, "क्यूबा में अपना सब कुछ दे रहे सोवियत संघ को लेकर चे हमेशा ही फ़िदेल के लिए तकलीफ़देह रहे."

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चे ग्वेरा की अस्थियां

चे की मौत का ज़िम्मेदार कौन?

ये पूछा गया कि क्या फ़िदेल ने चे ग्वेरा की मौत के साथ कुछ किया था?

तो एंडरसन ने कहा, "नहीं ये सच नहीं है. बोलिविया में चे मिशन पर गए जहां उनकी मौत हो गई. कुछ बचे लेकिन चे नहीं बच सके. लेकिन यह एक आत्मघाती मिशन नहीं था. इसे कुछ हद तक गुरिल्ला मिशन भी समझा जाना चाहिए."

उन्होंने कहा, "जब चे, फ़िदेल और राउल मेक्सिको में टक्सपैन के ग्रेनामा से क्यूबा के लिए रवाना हुए, यह व्यावहारिक रूप से एक आत्मघाती मिशन था क्योंकि फ़िदेल ने इसे समय से पहले घोषित किया था. फिर उनके पहुंचने पर जहाज का टूट जाना और बतिस्ता के लोगों का उनका इंतज़ार करना. जहाज पर मौजूद 82 लोगों में से 17 को छोड़कर बाकी सारे मारे गए. इसके दो साल बाद, गुरिल्ला मज़बूत हो गए और सत्ता में आए."

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मौत के 50 साल बाद भी चे ग्वेरा पूरी दुनिया में आज भी लोकप्रिय हैं

टीशर्ट पर ग्वेरा की तस्वीर है बेहद प्रसिद्ध

चे ग्वेरा कॉन्गो में अपने मिशन में नाकाम रहे. बतिस्ता के ख़िलाफ़ उनका संघर्ष एक छोटी सी बात थी. फिर गुरिल्ला एक मिथक क्यों बन गया?

यह पूछने पर एंडरसन ने बताया, "ग्वेरा को नापसंद करने वालों को वे चुभते थे, उन्हें यह समझ नहीं आता था कि उन्हें लोग कितना चाहते हैं और अपनी टीशर्ट पर भी डाल रहे हैं. आज उनकी मौत के 50 साल बाद भी उन्हें लोगों के जेहन से नहीं निकाला जा सका है. इसके पीछे सबसे बड़ी वजह उनका ईमानदार होना और लड़ते हुए मरना है."

एंडरसन ने कहा, "मुझे इसी बात ने उन पर लिखने को बाध्य किया क्योंकि मैं समझता हूं कि उनके घोषित शत्रु, सीआईए समेत, भी उनकी प्रशंसा करते हैं."

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नस्लवादी नहीं थे ग्वेरा

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दो देश,दो शख़्सियतें और ढेर सारी बातें. आज़ादी और बँटवारे के 75 साल. सीमा पार संवाद.

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समाप्त

एंडरसन से पूछा गया कि क्या चे नस्लवादी और समलैंगिकता विरोधी और एक हत्यारा थे क्योंकि वो उनमें से एक थे जिनके नेतृत्व में क्रांति के बाद लोगों को सूली पर चढ़ाया गया था.

तब उन्होंने कहा, "हां ये सच है. वो बहुत अद्भुत हैं. ये 10 साल पहले शुरू हुआ. लेकिन 50 साल पहले लगभग सभी कोई समलैंगिकता विरोधी थे. समलैंगिकता कई देशों में गै़र-क़ानूनी था. लेकिन हमें आज के अनुसार अतीत के लोगों के विषय में राय बनाने से पहले सोचना चाहिए. एक दशक पहले समलैंगिक विवाह की धारणा दुनिया में इतनी व्यापक नहीं थी."

नस्लवादी के सवाल पर एंडरसन ने कहा, "मुझे नहीं पता कि चे नस्लवादी थे. इसके विपरीत, उन्होंने जिन लोगों के साथ लड़ाइयां लड़ीं वो उनमें से कई काले थे. उन्होंने सांता क्लारा विश्वविद्यालय में एक प्रसिद्ध भाषण दिया था जिसमें उन्होंने कहा था कि उन्हें यूनिवर्सिटी को कलर पेंट करना होगा. मैं कहना चाहता हूं कि इस पर भूरा, काला, पीला रंग होना चाहिए. ये किसी नस्लवादी के बोल नहीं हो सकते."

एंडरसन ने बताया, "चे ग्वेरा को अस्थमा की बहुत गंभीर समस्या थी. बीमारी के कारण उन्हें बिस्तर पर पड़े रहना होता था और इस दौरान उन्होंने ख़ूब पढ़ाई की. रोमांच से लेकर दर्शन तक सब कुछ पढ़ डाला. वो आदर्शवाद थे और नए विचारों की तलाश में रहते थे.

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काफ़ी पढ़े लिखे थे ग्वेरा

एंडरसन ने बताया, "केवल 17 साल की उम्र में ग्वेरा ने अपना एक दार्शनिक शब्दकोश बनाया. वो जो भी पढ़ते उसकी अंत में समीक्षा ज़रूर करते. अपने विचारों को और निखारने का यह बेहतरीन विचार था. और फ़िर विचारधारा की तलाश में भी उन्होंने इसका इस्तेमाल किया. यह कन्फ़्यूशियस, यूनानी और बाक़ी अन्य से गुजरता हुआ मार्क्सवाद पर आकर ठहरा."

एंडरसन ने बताया कि उन्होंने अमेरिकी साम्राज्यवाद से नफ़रत किया. उन्होंने कहा, "वो मार्क्सवादी थे और दुनिया में क्रांति लाना चाहते थे."

चे की पहली बेटी हिल्दा के बारे में पूछने पर एंडरसन ने कहा, "वो क्यूबा में पली बढ़ीं. जब अपनी पत्नी से तलाक़ के बाद चे लौटे गए और उनकी पत्नी की मौत हो गई तो वो अकेली हो गईं.

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चे की बेटी भी 39 साल में चल बसीं

एंडरसन ने कहा, "चे ग्वेरा प्यार में पड़ कर क्यूबा छोड़ यूरोप चले गए. उन्होंने मेक्सिको की गुएरिला से शादी की. मेक्सिको के साथ तल्ख़ रिश्ते के कारण यह क्यूबा को नापसंद था. उन्हें दो बच्चे हुए. दुर्भाग्य से इनमें से एक की मौत दो साल बाद ही हो गई."

ब्रेन कैंसर की वजह से 1995 में 39 वर्ष की आयु में हिल्दा का भी निधन हो गया. यह वो ही उम्र थी जिसमें उनके पिता चे का निधन हुआ था.

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