ऑस्कर उतना ही बोगस, जितना पान मसाले अवॉर्ड्स: नसीरुद्दीन

  • 18 अक्तूबर 2017
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अपने अभिनय का लोहा मनवा चुके नसीरुद्दीन शाह का मानना है कि 100 सालों में भी हिंदुस्तानी फ़िल्मों को ऑस्कर नहीं मिलेगा.

बीबीसी से नसीरुद्दीन शाह ने ऑस्कर अवॉर्ड और भारतीय फ़िल्मों पर टिप्पणी करते हुए कहा, "पता नहीं हम ऑस्कर को इतना भाव क्यों देते हैं?ऑस्कर से हमें क्या लेना देना. हर साल ऑस्कर के पीछे भागते रहते हैं. ऑस्कर में कौन सी फ़िल्म भेजी जाएगी इसे लेकर हर साल प्रतिस्पर्धा होती है. हिंदुस्तान को 100 सालों में भी ऑस्कर नहीं मिलने वाला. आप लिखकर ले लीजिये मुझसे."

उन्होंने कहा, "हम बिना वजह अपने आप को बेवक़ूफ़ बनाते हैं. ऑस्कर के पीछे दुम हिलाते हुए भागते हैं. ऑस्कर भी उतना ही बोगस है, जितना यहाँ के पान मसाले अवॉर्ड्स."

हाल ही में राजकुमार राव की फ़िल्म 'न्यूटन' भारत की ओर से ऑस्कर के लिए नामंकित हुई है. नसीरुद्दीन शाह का कहना है कि नई पीढ़ी के अभिनेता जैसे आलिया भट्ट, राजकुमार राव, कल्कि और नवाज़ुद्दीन बहुत ही बेहतरीन अभिनेता हैं.

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शाह ने कहा कि नौजवान लोगों में टैलेंट की कोई कमी नहीं है. उन्होंने कहा, ''मेरी पीढ़ी में उस उम्र में अभिनय में इतनी अच्छी नहीं थी, जितने आज के अभिनेता हैं.''

शाह ने कहा कि वो आज की युवा पीढ़ी के अभिनय के प्रशंसक हैं.

उन्होंने कहा, ''आज की पीढ़ी ख़ुशकिस्मत है कि उन्हें ऐसे फ़िल्मकार मिले जो उनके अभिनय का बेहतरीन इस्तेमाल कर पा रही है. हलांकि हमें शिकायत नहीं है, क्योंकि हमें भी बेहतरीन मौक़े मिले. अगर उस दौर में वो फ़िल्में ना बनती तो शायद ये फ़िल्में अब ना बन रही होतीं."

नसीरुद्दीन शाह ने इस साल अपने कई क़रीबी दोस्तों ओम पूरी, टॉम अल्टर और निर्देशक कुंदन शाह को खो दिया है. वहीं नसीरुद्दीन शाह को अफ़सोस है कि मिस्टर कबाड़ी ओम पूरी की आख़िरी फ़िल्म थी.

नसीरुद्दीन शाह कहते हैं, "ओम की कुछ मजबूरियाँ रही होंगी. वो परेशान था. उसकी निजी ज़िंदगी भी उलझन से भरी थी. उसे विदेश में काम मिल रहा था पर यहाँ अजीब से किरदार मिल रहे थे.''

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उन्होंने कहा, ''आप 60 की उम्र से गुज़र जाएं तो आपकी फ़िल्मों में कोई जगह नहीं रहती है. मानो बूढ़े लोगों की कहानियाँ दिलचस्प ही नहीं होतीं! वो लोगों को आकर्षित नहीं करते! उनके साथ नाच गाना नहीं डाल सकते. ओम पुरी मजबूरी में ऐसी फ़िल्में कर रहा था. अफ़सोस है की मिस्टर कबाड़ी उनकी आख़िरी फ़िल्म थी."

नसीरुद्दीन शाह ने माना कि पुरुष अभिनेताओं से ज़्यादा बुरा हाल अभिनेत्रियों का है, क्योंकि 30-35 की उम्र के बाद उनके किरदार के बारे में कोई सोचता ही नहीं है. उनके मुताबिक़ बहुत धीमी गति से इसमें बदलाव आ रहा है.

चार दशक से अभिनय कर रहे नसीरुद्दीन शाह को ख़ुशी है कि वो स्टार नहीं हैं. उनका मानना है कि अभिनेता की उम्र स्टार की उम्र से अधिक होती है, क्योंकि एक अभिनेता उस फ़िल्म का हिस्सा बनना चाहेगा जो यादगार होगी और स्टार उस फ़िल्म की तरफ़ झुकेगा जिसमें उसका किरदार याद किया जाएगा.

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नसीरुद्दीन शाह का कहना है कि स्टार कास्ट वाली फ़िल्में भले ही थोड़े समय के लिए दर्शकों के मन में जगह बना ले पर लंबे समय तक सिर्फ़ अच्छी फ़िल्में ही याद रहती हैं. मुग़ल-ए-आज़म का उदहारण देते हुए नसीरुद्दीन शाह आगे कहते हैं कि फ़िल्म में बड़े स्टार जैसे मधुबाला, दिलीप कुमार साहब, पृथ्वीराज कपूर और अजित जैसे लोग थे पर उस फ़िल्म को आज भी याद किया जाता है.

शाह ने कहा कि अगर फ़िल्म अच्छी होगी तो स्टार के किरदार को याद किया जाएगा. उन्होंने कहा कि पता नहीं कितने स्टार आए और गए पर मुझे ख़ुशी है कि मैं उनमें से नहीं हूँ."

इसलिए वो अभिनेताओं को नसीहत देते है कि उन्हें अपने काम से ज़्यादा ख़ुश नहीं होना चाहिए, क्योंकि उन्हें याद रहना चाहिए कि सिर्फ़ उनके काम के लिए याद किए जाएगें. नसीरुद्दीन शाह टिस्का चोपड़ा के साथ फ़िल्म "द हंगरी" में नज़र आएंगे. फ़िल्म का निर्देशन बोर्निला चटर्जी ने किया है.

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