यूपी के नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी, महाराष्ट्र के 'बाल ठाकरे'

  • 22 दिसंबर 2017
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बाल ठाकरे, महाराष्ट्र की सियासत का वो नाम जिन्होंने न कभी चुनाव लड़ा और न ही कोई राजनीतिक पद स्वीकार किया.

अब बाल ठाकरे की ज़िंदगी पर एक फ़िल्म 'ठाकरे' आ रही है. फ़िल्म में बाल ठाकरे का किरदार उत्तर प्रदेश के मुज़फ्फरनगर से मुंबई की फ़िल्मी दुनिया में होले-होले छाने वाले नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी निभा रहे हैं.

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अक्सर मुंबई में रहने वाले यूपी और बिहार के लोगों का शिवसेना विरोध करती नज़र आती है. ऐसे में यूपी में जन्मे नवाज़ुद्दीन का बाल ठाकरे का किरदार निभाना दिलचस्प है. 'ठाकरे' फ़िल्म 23 जनवरी 2019 को रिलीज़ होगी.

फ़िल्म को शिवसेना सांसद संजय राउत ने लिखा और डायरेक्शन का ज़िम्मा अभिजीत पांसे पर है.

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Image caption बाल ठाकरे

'दुनिया का हर एक्टर निभाना चाहेगा किरदार'

फ़िल्म के टीजर रिलीज़ पर नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी ने एक इंटरव्यू में कहा, ''मुझे ऐसी महान शख्सियत का रोल करने का मौका मिला है, जिसको दुनिया का कोई भी एक्टर करना चाहेगा. क्योंकि उनकी शख्सियत ही ऐसी थी. मैं इस भरोसे के लिए संजय राउत और इजाज़त देने के लिए उद्धव ठाकरे का आभारी रहूंगा. मुझे अपने डायरेक्टर अभिजीत पांसे पर भरोसा है कि हम बाल ठाकरे की बायोग्राफी को नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे.''

फ़िल्म का टीज़र ट्विटर पर शेयर करते हुए नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी ने लिखा, ''देश के असली किंग का किरदार स्क्रीन पर निभाना गर्व और सम्मान की बात है.''

मराठी बोलने पर नवाज़ुद्दीन ने क्या कहा?

फ़िल्म का टीज़र अमिताभ बच्चन ने रिलीज़ किया है. नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी एक वीडियो में मराठी बोलते नज़र आते हैं. नवाज़ुद्दीन का मराठी लहज़ा सुनकर ये अंदाज़ा नहीं लगाया जा सकता कि वो गैर-मराठी हैं.

वीडियो में नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी मराठी में कहते हैं, ''हर कोई ये सोच रहा होगा कि ये आदमी मराठी कैसे बोल पाएगा. मैं आत्मविश्वास के साथ ये कहना चाहता हूं कि बाला साहेब ने मुझे काफी प्रेरित किया है. उनकी दुआएँ मेरे साथ हैं.''

अगर सिर्फ लुक्स की बात की जाए तो नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी बाल ठाकरे के किरदार में बिलकुल फिट नज़र आ रहे हैं. हवा में हाथ लहराते हुए नमस्कार करने से लेकर शॉल ओढ़ने तक.

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जब शिवसेना ने नहीं करने दी थी नवाज़ को रामलीला

ज़ाहिर कि इस लुक की सोशल मीडिया पर भी चर्चा हो रही है.

रोहन लिखते हैं, ''मुझे हिंदू-मुस्लिम की बहस में नहीं जाना है.'' शंशाक शेखर लिखते हैं, ''बाल ठाकरे को अंतिम शांति एक उत्तर भारतीय ही दे सकता था. जियो नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी.''

अब तनिक वक्त से पीछे चलते हैं. बीते साल नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी अपने गांव की रामलीला में हिस्सा लेना चाहते थे लेकिन वो इसमें शरीक नहीं हो पाए थे.

तब नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी ने ट्विटर पर रामलीला की प्रैक्टिस का वीडियो शेयर करते हुए लिखा था, ''मेरा बचपन का सपना पूरा नहीं हो पाया लेकिन अगले साल मैं पक्का रामलीला में शिरकत करूंगा.''

नवाज़ुद्दीन मुजफ़्फ़रनगर ज़िले के बुढाना के रहने वाले हैं और वहाँ की रामलीला में मारीच का किरदार निभाने वाले थे, लेकिन आयोजकों के मुताबिक़ स्थानीय शिव सेना के लोगों ने कहा कि वो मुसलमान हैं और उन्हें रामलीला से बाहर किया जाए.

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