'कभी हीरो से ज़्यादा फीस लेती थीं श्रीदेवी'

  • 26 फरवरी 2018
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सुपरस्टार श्रीदेवी के 24 फरवरी की देर रात हुए आकस्मिक निधन से फ़िल्म इंडस्ट्री और उनके प्रशंसक शोक में हैं. 50 साल के अपने फ़िल्मी करियर में श्रीदेवी ने 300 से भी अधिक हिंदी और दक्षिण भारतीय फ़िल्मों में काम किया था.

भारतीय फ़िल्म इंडस्ट्री के लिए भावनात्मक स्तर पर यह बेशक एक बड़ा आघात है.

वरिष्ठ फ़िल्म पत्रकार और समीक्षक अजय ब्रह्मात्मज का कहना है कि सुपरस्टार श्रीदेवी अपने दौर में 'लेडी अमिताभ' कही जाती थीं. फ़िल्में उनके नाम से चलती थीं. हालांकि फ़िलहाल वो किसी फ़िल्म का हिस्सा नहीं थी, इसलिए इंडस्ट्री को किसी तरह का नुकसान नहीं होगा.

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ट्रेंड समीक्षक अमोद मेहरा का कहना है कि बेशक फ़िल्म इंडस्ट्री ने नायाब कलाकार खोया है लेकिन चूंकि फ़िलहाल श्रीदेवी इस दौर की टॉप हीरोइन नहीं थीं, उनके प्रोजेक्ट्स पेंडिंग नहीं थे, इसलिए किसी फिल्म को ज़्यादा नुकसान नहीं होगा.

वह एक फिल्म में मां की भूमिका निभा रही थीं, जो अब कोई निभाएगा.

श्रीदेवी शाहरुख़ ख़ान की आने वाली फ़िल्म 'ज़ीरो' में मेहमान भूमिका में आख़िरी बार रूपहले परदे पर दिखेंगी.

वरिष्ठ पत्रकार जयप्रकाश चौकसे के मुताबिक श्रीदेवी के पास दर्जनों स्क्रिप्ट थी जिसे वो पढ़ रही थीं.

श्रीदेवी 15 साल बाद 2012 में फिल्म 'इंग्लिश विंग्लिश' में नजर आई थीं. उन्होंने फ़िल्म में अपने अभिनय से दर्शकों का दिल जीता था.

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भीड़ को खींचने वाली श्रीदेवी

श्रीदेवी की वापसी पर अमोद मेहरा कहते हैं, "बॉक्स ऑफिस के हिसाब से ऐसा पहली बार हुआ था कि 50 साल की अभिनेत्री लीड रोल में थी और फ़िल्म ने अच्छा कारोबार किया. देश के बाहर फ़िल्म ने ज़्यादा बेहतर किया था."

पिछले साल आई उनकी फिल्म 'मॉम' ने बॉक्स ऑफिस पर औसत कारोबार किया. अमोद मेहरा के मुताबिक फ़िल्म का विषय गंभीर था इसलिए कारोबार औसत रहा.

80 के दशक में उनकी कामयाबी का ज़िक्र करते हुए वरिष्ठ पत्रकार और फ़िल्म समीक्षक राजू भरतन ने कहा, "श्रीदेवी में एक अनोखा हुनर था कि वो भीड़ को अपनी ओर खींच लेती थीं."

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हीरो से ज्यादा फीस लेती थी श्रीदेवी

राजू भरतन का मानना है कि 80 के दशक में अकसर फ़िल्मों में अभिनेत्रियां हीरो पर निर्भर रहती थीं. पर श्रीदेवी ऐसी अभिनेत्री थीं जिनके नाम पर दर्शक सिनेमा घरों में खिंचे चले आते थे.

वहीं, ट्रेंड समीक्षक अमोद मेहरा का कहना है कि श्रीदेवी 80 के दशक में अपने अभिनय के दम पर सबसे पॉपुलर अभिनेत्री बन गई थीं और उनकी फ़ीस उस वक्त के सबसे लोकप्रिय अभिनेता ऋषि कपूर से भी ज़्यादा थी.

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उन्होंने बताया कि फ़िल्म नगीना में उन्हें ऋषि से अधिक पैसे दिए गए थे.

अजय ब्रह्मात्मज के मुताबिक श्रीदेवी का योगदान दक्षिण भारतीय फ़िल्मों में भी कम नहीं रहा है. वो कहते हैं, "श्रीदेवी का हिंदी फ़िल्मों में जितना योगदान रहा है उससे कहीं ज्यादा योगदान दक्षिण भारतीय फ़िल्मों में रहा है."

"दक्षिण भारत में वो एक बड़ी अभिनेत्री मानी जाती थीं पर हिंदी फ़िल्मों में वो सिर्फ कमर्शियल अभिनेत्री बनकर रह गई थीं."

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16 वयथीनिलए, मंदरु मुदिचु, सिगप्पू रोजकाल, कल्याणरमन, जोनी, मीनदुम कोकिला जैसी तमिल फ़िल्मों में श्रीदेवी के दमदार अभिनय ने उन्हें दक्षिण फ़िल्मों का सितारा बना दिया.

अजय ब्रह्मात्मज कहते हैं कि जो महत्व स्मिता पाटिल और शबाना आज़मी का हिंदी फ़िल्मों में है, वैसा ही महत्व श्रीदेवी का दक्षिण भारतीय फ़िल्मों में रहा है.

वरिष्ठ पत्रकार और समीक्षक राजू भरतन का भी मानना है कि श्रीदेवी दक्षिण भारत में सम्पूर्ण अभिनेत्री के रूप में मानी जाती थीं पर हिंदी फ़िल्मों उन्हें ऐसे मौके कम ही मिले.

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श्रीदेवी की शुरुआती हिंदी फ़िल्मों और बदलाव पर टिप्पणी करते हुए राजू भरतन ने बताया कि शुरुआत की फिल्मों में श्रीदेवी का हाव-भाव सरल था.

वो आगे बताते हैं कि जब जीतेन्द्र के साथ वह तीसरी फ़िल्म में नज़र आईं तो उनके चेहरे के हाव-भाव में बड़ी तब्दीली देखने को मिली थी जिसके चलते दर्शक ने उन्हें बतौर अभिनेत्री अपनाया.

राजू भरतन के मुताबिक, वैजयंती माला के बाद दक्षिण भारत से आने वाली वो इकलौती ऐसी अभिनेत्री थीं जिसने हिंदी फ़िल्मों की ख़ातिर हिंदी सीखी.

वह कहते हैं, "श्रीदेवी ओरिजिनल स्टार थीं जिसकी तुलना किसी से नहीं की जा सकती."

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