बॉलीवुड की चकाचौंध में छिपे अंधेरे का शिकार हो गईं श्रीदेवी!

  • 1 मार्च 2018
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बॉलीवुड सुपरस्टार श्रीदेवी की मौत ने कुछ अटकलों को जन्म दिया है- इनमें से कुछ बिल्कुल निराधार हैं. लेकिन उनके निधन ने इस इंडस्ट्री को भीतर से जानने वाले लोगों को तथाकथित इस सपनों की दुनिया में महिलाओं और बाहर से फ़िल्म में किस्मत आज़माने आए लोगों पर पड़ रहे दबावों पर बोलने की हिम्मत दी.

बॉलीवुड सितारे हिंदी फिल्म इंडस्ट्री का अक्सर 'एक बड़े परिवार' के रूप में उल्लेख करते हैं, लेकिन इस बड़े रचनात्मक समुदाय में एक दरार बड़ी होती जा रही है और इसकी अनदेखी करना मुश्किल है.

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सफलता के पीछे का धुंधलापन

श्रीदेवी की मौत के बाद इस इंडस्ट्री की महिलाओं पर पड़ रहे दबावों और उनकी सफलता के पीछे के धुंधलेपन से जुड़े संदेशों की सोशल मीडिया पर भरमार हो गई.

इसने उन कई उम्मीदों की दशा का पर्दाफ़ाश किया जो बॉलीवुड में कुछ बड़ा करने का सपना संजोए मुंबई पहुंचते हैं.

बढ़ती उम्र को मात देने, जवां दिखने का बोझ और स्कैंडल्स को छुपाने के परिदृश्य की वजह से शुरू किए गए #MeToo जैसे अभियान केवल हॉलीवुड का सच नहीं हैं.

एक बॉलीवुड एक्टर ने नाम नहीं छापने की शर्त पर कहा, "बॉलीवुड शायद पुरुष प्रधान मानसिकता और पुरुषों की तुलना में युवा महिलाओं के शोषण के इतिहास से और भी बदतर स्थिति में है."

पिछले दो दशकों से कुछ वेबसाइट्स इस इंडस्ट्री के सितारों से जुड़ी रोमांस, ब्रेक-अप, मादक पदार्थ और शराब सेवन के साथ ही आपराधिक कृत्यों से जुड़ी जानकारियां लीक करती रही हैं.

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व्हिटनी ह्यूस्टन और श्रीदेवी की मौत में समानता

जब यह पता चला कि श्रीदेवी की मौत बाथटब में 'दुर्घटनावश डूबने' के कारण हुई तो बॉलीवुड की अभिनेत्री सिमी ग्रेवाल ने श्रीदेवी और व्हिटनी ह्यूस्टन की मौत में विचित्र समानताओं के विषय में ट्वीट किया.

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के मुताबिक 11 फ़रवरी 2012 को ह्यूस्टन अपने होटल के कमरे में कोकेन के नशे और हृदय रोग के कारण ग़लती से डूब गई थीं.

भारत में अब तक कम से कम 16 अभिनेत्रियों और 9 अभिनेताओं ने ख़ुदकुशी की है, इनमें से अक्सर फ़ैसले कथित तौर पर फिल्म इंडस्ट्री की मांगों को पूरा नहीं कर पाने या दिल टूटने की वजह से डिप्रेशन के कारण लिए गए.

ऐसा लगता है कि बॉलीवुड में सफल और आकर्षक दिखते रहने के लिए इस इंडस्ट्री के शीर्ष सितारों पर बहुत दबाव है.

सफल अभिनेत्री दीपिका पादुकोण ने सार्वजनिक रूप से इस माहौल में डिप्रेशन से पीड़ित होना स्वीकारा था.

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Image caption रामगोपाल वर्मा के साथ श्रीदेवी

'एक डरावना सपना'

फिल्म निर्माता राम गोपाल वर्मा ने सोशल मीडिया पर लिखा था कि श्रीदेवी अपने वास्तविक जीवन में कितनी दुखी थीं. इनकी तेलुगू ब्लॉकबस्टर में श्रीदेवी ने काम किया था.

उन्होंने लिखा, "श्रीदेवी अपने जीवन में कठिन दौर से गुज़र चुकी थीं." उन्होंने कहा, "बाल कलाकार के रूप में फ़िल्मी कलाकार के करियर की जल्द शुरुआत के कारण जीवन में उन्हें सामान्य गति से बढ़ने का समय कभी नहीं मिला."

बाहरी शांति से ज़्यादा, उनकी आंतरिक मानसिक स्थिति चिंता का विषय थी.

वर्मा ने फ़ेसबुक पर लिखा, "भविष्य को लेकर अनिश्चितता और उनके निजी जीवन में बेतरतीब बदलाव ने सुपरस्टार के संवेदनशील दिमाग़ पर गहरे दाग़ छोड़े जिससे उन्हें कभी शांति नहीं मिली."

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श्रीदेवी को क्यों महसूस होती थी बेचैनी?

पिछले साल वीर सांघवी से बाद करते हुए श्रीदेवी ने बताया था कि बॉलीवुड के काम करने के तरीकों के लिए कैसे उन्होंने खुद को तैयार किया था.

उन्होंने सांघवी से कहा था कि दक्षिण भारतीय फ़िल्मों में काम करने के दौरान वो 6 बजे सुबह शूटिंग शुरू कर देती थीं, लेकिन मुंबई में उन्हें देर शाम बाद तक अभिनेताओं का सेट पर इंतज़ार करना पड़ता था. जिससे उन्हें बेचैनी महसूस होती थी.

हिंदी और अंग्रेज़ी फ़िल्मों के साथ मीडिया का रवैया भी श्रीदेवी के लिए एक मुद्दा रहा. इस बातचीत में उन्होंने बताया कि बॉलीवुड में उनके फ़िल्म प्रमोशन का कार्यक्रम एक बुरे सपने की तरह होता था जब कैमरा लिए पत्रकार उनका पीछा किया करते थे. इससे वो बहुत ही असहज महसूस करती थीं.

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Image caption बोनी कपूर के साथ श्रीदेवी

कॉस्मेटिक सर्जरी और श्रीदेवी

मीडिया में उन्हें 'थंडर थाई' नाम से संबोधित किया जाता. आसानी से पांच भाषाएं बोलने वाली श्रीदेवी का अंग्रेज़ी नहीं बोल पाने पर मैगज़ीन के पन्नों पर मजाक भी उड़ाया जाता था.

उनकी मौत के कारण के पीछे युवा दिखते रहने के लिए करवाई गई कॉस्मेटिक सर्जरी के प्रभाव का अनुमान भी लगाया गया था.

श्रीदेवी पहले ही कई बार इंटरव्यू में ऐसे किसी भी ऑपरेशन का खंडन कर चुकी हैं. हालांकि बॉलीवुड सितारों के बीच कॉस्मेटिक सर्जरी आम बात है.

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Image caption कंगना रनौत

#MeToo और भाई-भतीजावाद

पिछले दो दशकों के दौरान कई युवा कलाकारों ने बताया कि कैसे बॉलीवुड बाहरी लोगों के लिए प्रतिकूल जगह बन गया है.

दो बार की राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता और टॉप बॉलीवुड एक्ट्रेस कंगना रनौत कहती हैं, "मुझसे एक कुत्ते की तरह व्यवहार किया गया."

उन्होंने बताया कि छोटे शहरों से उम्मीदें लेकर पहुंचे उनकी तरह के लोगों के लिए शोषक बॉलीवुड की प्रतिकूल मानसिकता कैसी है और कहा कि यह उनके ज़हन पर एक घाव की तरह है.

बॉलीवुड के वर्तमान अधिकारी और निर्माता अलग हैं. सफल, समृद्ध और शक्तिशाली. इनमें से अधिकतर पूर्व सितारों और फिल्म निर्माताओं के बच्चे हैं.

दूसरी और तीसरी पीढ़ी के 'स्टार किड्स' भले, विदेशों में पढ़े और जिन्हें बॉलीवुड में अक्सर 'बॉम्बे युप्पीज' कहा जाता है.

रनौत के मुताबिक, कई आशावीदी जो खुद को बाहरी कहते हैं और जो किसी पूर्व स्टार या ताक़तवर फ़िल्मी परिवारों के सुरक्षात्मक नेटवर्क से नहीं होते, वो शोषण के प्रति असुरक्षित होते हैं.

इंडस्ट्री से जुड़े सितारे और फिल्म निर्माताओं ने कंगना के इस बयान पर खुल कर अपने प्रश्नों से परेशान किया और उनकी टिप्पणियोंने बड़े सितारों या परिवारों से ताल्लुकात रखने वाले बॉलीवुड के वर्तमान सितारों के बीच एक बहस छेड़ दी.

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Image caption शाहरुख खान

इस इंडस्ट्री में शाहरुख ख़ान, अनुष्का शर्मा, रणवीर सिंह और दीपिका पादुकोण जैसे बाहरी सफल लोगों को पारंपरिक स्टूडियो और फ़िल्म निर्माताओं का मजबूत समर्थन प्राप्त है.

इंडस्ट्री के सामने आए इन कठिन मुद्दों पर चर्चा बॉलीवुड और सार्वजनिक क्षेत्रों में दबा दी गई. श्रीदेवी के दुखद अंत ने 'बॉलीवुड अंदर से कितना सुंदर है' इस पर आत्मनिरीक्षण का मौका दिया है.

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नहीं रहीं बॉलीवुड की चांदनी

(सुधा जी तिलक दिल्ली स्थिति पत्रकार हैं)

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