जिस सीन को करने में हमें हंसी आती थी उन पर लोग तालियां बजाते थे: अमिताभ बच्चन

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हिंदी फ़िल्मों में 44 साल से काम कर रहे अभिनेता अमिताभ बच्चन और ऋषि कपूर ने माना है कि "70 के दशक में सिर्फ़ तीन तरह की ही फ़िल्में बना करती थीं और जिनका विषय होता थाः मिलना-बिछड़ना, ग़रीब लड़के को अमीर लड़की से प्यार या फिर अमीर लड़के को ग़रीब लड़की से प्यार."

अभिनेता अमिताभ बच्चन ने ऐसी फ़िल्मों के लिए अपने प्रिय मित्र और दिवंगत अभिनेता शशि कपूर को ज़िम्मेदार बताया है.

'कभी-कभी', 'नसीब', 'अमर अकबर एंथनी', 'अजूबा', 'कुली' और अब '102 नॉट आउट' कुल मिलाकर 6 फ़िल्मों में एक साथ काम कर चुके ऋषि कपूर और अमिताभ बच्चन ने एक इवेंट में 70 के दशक को याद किया.

ऋषि कपूर कहते हैं, "उस दौर में हमारी जनता हमें आसानी से माफ़ कर दिया करती थी क्योंकि हम सभी कलाकार एक जैसी ही फ़िल्में किया करते थे."

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वो कहते हैं, "इन फ़िल्मों का विषय मिलना-बिछड़ना, ग़रीब लड़के को अमीर लड़की से या फिर अमीर लड़के को ग़रीब लड़के से मोहब्बत ही हुआ करता था."

'ज़्यादा टेक पर फ़िल्म से निकाल दिया जाता था'

ऋषि कपूर की बात को आगे बढ़ाते हुए अभिनेता अमिताभ बच्चन कहते हैं, "इसका ज़िम्मेदार मैं अपने प्रिय मित्र शशि कपूर को मानता हूँ क्योंकि वो एक ही टाइम में 20 से 25 फ़िल्में एक साथ किया करते थे और हर सेट पर 2-2 घंटे काम किया करते थे."

अपने पुराने दौर को याद करते हुए अभिनेता अमिताभ बच्चन कहते हैं, "हम जैसे नए कलाकारों को अपनी अभिनय क्षमता दिखाने के लिए एक ही टेक दिया जाता था और अगर हम तीन से चार टेक लेते थे तो निर्देशक हमें उस फ़िल्म से ही बाहर कर दिया करते थे. इसका कारण था फ़िल्म रील का बर्बाद होना, लेकिन आज डिजिटल का दौर है. आपको कई मौके मिलते हैं रिटेक देने के लिए."

अमिताभ बच्चन ने निर्देशक मनमोहन देसाई के साथ कई सफल फिल्में कीं, लेकिन सबसे कामयाब रही 'अमर अकबर एंथनी' जिसने कई रिकॉर्ड बनाए.

सिर्फ़ मुंबई शहर में ही 'अमर अकबर एंथनी' 25 थिएटर में लगातार 25 हफ्ते चली थी. इस फ़िल्म के लिए ख़ूब तालियां और सीटियां बजी थीं.

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Image caption फिल्म अमर अकबर एंथोनी का एक सीन

'हमें हंसी आती थी और दर्शक तालियां बजाते थे'

लेकिन ख़ुद अमिताभ का मानना है कि ऐसी कई ग़लतियां थीं जिनको वो आज याद करते हैं तो बहुत हंसी आती है.

अमिताभ कहते हैं, "कुछ ऐसे दृश्य थे फ़िल्म में जिसके लिए हमने अपने निर्देशक मनमोहन देसाई से बात की थी, लेकिन उन्होंने हमारी एक भी नहीं सुनी और उसके लिए खूब गालियां और डांट फटकार भी मिली."

वे फ़िल्म को याद करते हुए बताते हैं, ''वो दृश्य था जहाँ तीन आदमी हैं और तीनों का ख़ून जा रहा है एक बोतल में और उस बोतल से एक माँ में. ऐसा किसी मेडिकल हिस्ट्री में नहीं हुआ. लेकिन सिर्फ मनमोहन देसाई की फ़िल्मों में ही होता था. एक और दूसरा दृश्य है फ़िल्म के क्लाइमेक्स में. तीनों हीरो गाना गाते हैं 'होनी को अनहोनी कर दे अनहोनी को होनी, एक जगह जब जमा हों तीनों अमर अकबर एंथनी'. लेकिन फिर भी विलेन उन्हें नहीं पहचान रहा है कि ये ही वो तीनों हैं जिनकी उसे तलाश है. इतना कुछ दिखाने के बाद भी मनमोहन देसाई सही थे. लोगों ने इस फ़िल्म को बहुत प्यार दिया."

27 साल बाद एक साथ फिर ऋषि कपूर और अमिताभ बच्चन फ़िल्म '102 नॉट आउट' में नज़र आने वाले हैं. ये फ़िल्म 4 मई को रिलीज़ हो रही है और इसके निर्देशक हैं उमेश शुक्ला.

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