करीब एक सदी से डरा रहे हैं 'फ़िल्मी डायनासोर'

  • 22 जुलाई 2018
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हाल ही में डायनासोर की थीम पर एक फ़िल्म रिलीज़ हुई. इसका नाम है, 'जुरासिक वर्ल्ड: द फ़ॉलेन किंगडम'.

इसे डायरेक्ट किया है जे ए बेयोना ने. इन्होंने ही साल 2015 में जुरासिक वर्ल्ड फ़िल्म का भी निर्देशन किया था.

लेकिन जुरासिक वर्ल्ड: द फ़ॉलेन किंगडम दर्शकों पर अपनी छाप छोड़ने में पूरी तरह नाकाम रही.

फ़िल्म की शुरुआत में जुरासिक वर्ल्ड थीम पार्क दिखाया गया है, जिसे 3 साल पहले उसके हाल पर छोड़ दिया गया था.

तभी से इस्ला नुबलर पार्क में डायनासोर बेफ़िक्र घूमते थे. द्वीप पर अचानक एक ज्वालामुखी विस्फ़ोट होता है. उससे लावा निकलने लगता है.

इसकी वजह से उस द्वीप पर रह रहे डायनासोरों के लिए ख़तरा पैदा हो जाता है. अगर उन डायनासोर को यहाँ से कहीं और नहीं ले जाया गया तो उनकी प्रजाति के फिर से विलुप्त होने का डर पैदा हो जाता है.

ख़ैर, हक़ीक़त तो ये है कि डायनासोर आज से लाखों साल पहले ही धरती से विलुप्त हो चुके हैं. गाहे-बगाहे उनकी हड्डियाँ और कंकाल मिलने से हमारी इस नस्ल में दिलचस्पी बढ़ जाती है.

इसकी बड़ी वजह हैं फ़िल्में. फ़िल्मों के ज़रिए हमने डायनासोर्स के दौर की जो दुनिया देखी है. वो डरावनी तो है, मगर बेहद दिलकश भी है.

अब असल डायनासोर तो मिलने से रहे. तो, चलिए आज आप की मुलाक़ात फ़िल्मी डायनासोर्स से कराते हैं.

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जुरासिक पार्क

डायनासोर को इतनी शोहरत साल 1993 में आई फ़िल्म जुरासिक पार्क से मिली थी.

हॉलीवुड निर्देशक स्टीवन स्पीलबर्ग ने अपनी फ़िल्म जुरासिक पार्क में जो डायनासोर दिखाए, वो लोगों को डराने के बावजूद उनके दिलों में हमेशा के लिए बस गए.

शानदार एनिमेशन और ग्राफिक्स से लैस फ़िल्म हमें हक़ीक़त की डायनासोर वाली दुनिया जैसी लगी थी.

उसके बाद से डायनासोर पर 5 और फ़िल्में बन चुकी हैं. लेकिन उन्हें स्पीलबर्ग की फ़िल्म जैसी कामयाबी नहीं मिली.

आज भी डायनासोर का नाम लेते ही, हमारे ज़ेहन में जुरासिक पार्क का तसव्वुर आता है.

पर हक़ीक़त ये है कि डायनासोर पर बनी ये पहली फ़िल्म नहीं थी.

डायनासोर पर हॉलीवुड में जो पहली फ़िल्म बनी थी, उसका नाम था द लॉस्ट वर्ल्ड. ये फ़िल्म आज से 93 साल पहले 1925 में बनी थी.

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डायनासोर के मॉडल

सर आर्थर कॉनन डायल के 1912 के उपन्यास पर आधारित इस फ़िल्म में आवाज़ नहीं थी.

फ़िल्म में डायनासोर को दिखाने के लिए मिट्टी के पुतलों की मदद ली गई थी. उस वक़्त फ़िल्मों में ग्राफिक्स और एनिमेशन का उतना चलन नहीं था.

तो फ़िल्मों में आर्ट डायरेक्टर की कल्पना के आधार पर डायनासोर दिखाए गए थे. इस फ़िल्म ने बॉक्स ऑफ़िस पर शानदार कामयाबी हासिल की थी.

इसके बाद साल 1933 में आई फ़िल्म किंग कॉन्ग में भी डायनासोर दिखाए गए थे.

द लॉस्ट वर्ल्ड में स्पेशल इफेक्ट देने वाले विल्स एच. ओ'ब्रायन ने इस फ़िल्म में भी डायनासोर के मॉडल बनाए.

हालांकि इस बार मिट्टी के बजाय लैटेक्स और रबर के डायनासोर फ़िल्म में बनाकर पेश किए.

फ़ुटबॉल के अंदर जो रबर का गुब्बारा होता है, उसकी मदद से कई डायनासोर्स को स्क्रीन पर सांस लेते हुए भी दिखाया गया था.

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सिल्वर स्क्रीन पर धमाल

इसके बाद साल 1940 के दशक में आई फ़िल्म वन मिलियन बीसी में डायनासोर्स ने एक बार फिर सिल्वर स्क्रीन पर धमाल मचाया.

40 का दशक आते-आते तकनीक ने काफ़ी तरक़्क़ी कर ली थी. फ़िल्म के निर्देशक हाल रोच ने सुअरों, छिपकलियों और दूसरे जानवरों के ऊपर अटैचमेंट लगाकर उन्हें पुराने दौर के जीवों के तौर पर पेश किया.

इस फ़िल्म के शानदार स्पेशल इफेक्ट की वजह से इसे ऑस्कर पुरस्कारों के लिए भी नामांकित किया गया था.

साल 1953 में आई फ़िल्म द बीस्ट फ़्रॉम 20,000 फैदम्स के ज़रिए इस बार बेहद ख़तरनाक डायनासोर ने फ़िल्मी दुनिया में क़दम रखे.

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इस फ़िल्म में डायनासोर पर बनी पहली फ़िल्म के आर्ट डायरेक्टर ओ'ब्रायन के चेले हैरीह्यूसेन ने रोडियोसारस को इतने भयानक रूप में दिखाया कि लोगों के रोंगटे खड़े हो गए.

ये फ़िल्म भी बेहद कामयाब रही और इसने इसी तरह की और फ़िल्में बनाने का हौसला दिया था.

एक साल बाद ही गॉडज़िला फ़िल्म में एक बार फिर डायनासोर दिखा. इस बार वो रबर सूट पहने हुए इंसान की मदद से स्क्रीन पर दर्शाया गया.

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एक सदी लंबा फ़िल्मी सफ़र

साल 1957 में बेहद कम बजट वाली फ़िल्म द लैंड अननोन में अंटार्कटिका गए कुछ लोगों का सामना डायनासोर से होते हुए दिखाया गया.

साल 1959 में आई फ़िल्म जर्नी टू द सेंटर ऑफ़ द अर्थ में कुछ डायनासोर फिर दिखे. इस बार इगुआना नाम के जीवों के ऊपर दूसरी चीज़ें बांधकर उन्हें डायनासोर का रूप दिया गया था.

साल 1966 में आई फ़िल्म वन मिलियन ईयर्स बीसी में रे हैरीह्यूसेन ने एक बार फिर से स्टूडियो एनिमेशन के ज़रिए डायनासोर को बड़े पर्दे पर उतारा था. हालांकि इस फ़िल्म को शोहरत इसकी हीरोइन रैक़ेल वेल्च की वजह से ज़्यादा मिली थी.

साल 1975 की फ़िल्म द लैंड दैट टाइम फॉरगॉट में पहले विश्व युद्ध के दौरान दक्षिणी अटलांटिक महासागर में एक नये महाद्वीप को दिखाया गया था. जहां पर डायनासोर रहते थे. इसमे डायनासोर कई इंसानों को लेकर भाग निकलते दिखाए गए थे.

साल 1988 में स्टीवन स्पीलबर्ग और जॉर्ज लुकास ने मिलकर एनिमेशन फ़िल्म द लैंड बिफ़ोर टाइम बनाई. इस फ़िल्म में प्यारे डायनासोर दिखाए गए. सिनेमाघरों में लोग उसके इमोशन्स के साथ हंसते-रोते थे. ये फ़िल्म बेहद कामयाब रही थी.

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दर्शकों को लुभाने का नुस्खा

डायनासोर पर आधारित अब तक की सबसे शानदार फ़िल्म आई 1993 में जब जॉर्ज लुकास के स्पेशल इफेक्ट्स से लैस स्टीवन स्पीलबर्ग की फ़िल्म जुरासिक पार्क ने बॉक्स ऑफ़िस पर दस्तक दी.

इस फ़िल्म ने डायनासोर की जिस दुनिया के दीदार कराए, उसे इससे पहले किसी ने नहीं देखा-दिखाया या तसव्वुर किया था.

साल 1995 में एनीमेशन फ़िल्म टॉय स्टोरी में कायर डायनासोर रेक्स को लोगों ने ख़ूब पसंद किया था.

साल 2006 में आई फ़िल्म नाइट ऐट म्यूज़ियम में हम ने फिर से डायनासोर को बड़े पर्दे पर देखा. मगर इस बार का टायरैनोसारस रेक्स ज़रा भी डरावना नहीं था.

इन फ़िल्मों की कामयाबी और बॉक्स ऑफ़िस पर डायनासोर के क़रीब एक सदी लंबे सफ़र से साफ़ है कि डायनासोर फ़िल्म के दर्शकों को लुभाने का अच्छा नुस्खा हैं.

शर्त ये है कि इन्हें इतने सलीक़े से उतारा जाए कि दर्शकों को उनके असली होने का एहसास हो.

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