सलमान अली ने मजबूरी को बनाया शौक और जीत गए इंडियन आइडल 10 का ख़िताब

  • 24 दिसंबर 2018
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Image caption इंडियन आइडल सीज़न 10 के विजेता सलमान अली

'अरे बाप रे बाप, कहां जा रहा है ये!' सलमान अली ने जब इंडियन आइडल में सुर लगाना शुरु किया तो शो के जज विशाल डडलानी के मुंह से ये शब्द अचानक निकल पड़े.

गाना शुरू करते ही 20 वर्षीय सलमान अली ने सबको जता दिया था कि वह इस शो में लंबा टिकने के लिए आए हैं.

रविवार 23 दिसंबर को इंडियन आइडल का फ़ाइनल राउंड था. आख़िरी राउंड में सलमान के साथ नितिन कुमार, विभोर पराशर, अंकुश भारद्वाज और नीलांजना रे भी थे. सबको पीछे छोड़ते हुए सलमान ने इंडियल आइडल 10 का ख़िताब जीता.

सलमान जागरण में गाना गाते थे, जिससे उनके परिवार का घर चलता. लेकिन इंडियल आइडल जीतने के बाद आज देश में उन्हें एक पहचान मिल गई, जिसकी बधाईयां पूरा देश उन्हें दे रहा है.

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Image caption इंडियन आइडल के विजेता को इसके ख़िताब के साथ 25 लाख रुपए और एक कार भी मिलती है.

इंडियल आइडल का ख़िताब जीतने के बाद वे देशभर की ज़बान पर छाए हुए हैं.

बीबीसी संवाददाता सुप्रिया सोगले से ख़ास बातचीत के दौरान सलमान अली अपनी कहानी के हर पहलू से रूबरू करवाते हैं.

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Image caption मेवात के पुनहाना कस्बे के रहने वाले हैं सलमान अली

दादा से लेकर परदादा तक गायक

हरियाणा के मेवात के पुनहाना कस्बे में रहने वाले सलमान अली और उनका परिवार पीढ़ियों से संगीत से जुड़े हैं.

सलमान अली बताते हैं कि दादा से लेकर परदादा तक सुर-ताल की इस दुनिया से नाता रखते हैं. उनके दादा अब्दुल शकूल तो आकाशवाणी में गज़लें भी गाते थे.

सुरों से इतना समृद्ध होने के बावजूद भी ये परिवार पैसों की तंगी से जूझ रहा था.

सलमान बताते हैं कि मां-पिता के अलावा परिवार में तीन बहनें और एक बड़ा भाई हैं. वे परिवार में सबसे छोटे हैं. और कम उम्र में ही उन्होंने कमाना शुरू कर दिया था. पिता ने काफ़ी मुश्किलों से बहनों और भाई का निकाह करवाया.

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Image caption 7 साल की उम्र में ही जागरणों में भजन गाना शुरू कर दिया था.

7 साल की उम्र से घर संभाला

एक उम्र के बाद पिता गाना नहीं गा पाते थे. उन्होंने अपने संगीत के सफ़र में अपने बेटे सलमान को जोड़ लिया. और मात्र 7 साल की उम्र में ही उन्होंने परिवार के लिए गाना शुरू कर दिया.

मजबूरी में शुरू किए गए इस सफ़र में सलमान अली को मज़ा आने लगा. क्योंकि संगीत से उनकी जुगलबंदी बैठने लगी थी.

जागरण में गाना, पार्टियों में गाना और कभी-कभी कव्वाली में हिस्सा लेना उनके दिनचर्या का हिस्सा बनने लगा. इन सबसे मिलने वाला पैसा वे परिवार की देख-रेख में खर्च कर देते.

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Image caption गीतकार सलीम मर्चेंट के साथ सलमान अली

पैर में है लोहे की रॉड

बीबीसी संवाददाता सुनील कटारिया को सलमान के पिता कासिम अली ने बताया कि सलमान अली आठवीं कक्षा तक पलवल के डी.पी.एस स्कूल में रिज़र्व कैटेगरी के सहारे पढ़ पाए थे.

लेकिन 2016 में उनका एक एक्सीडेंट हो गया था जिसकी वज़ह से उनके पैर में रॉड डाली गई. इलाज के खर्चों और घर के हालातों के चलते उनकी पढ़ाई आठवीं में ही छुड़वा दी गई.

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'सा रे गा मा पा लिटिल चैंप्स' के रहे हैं रनर-अप

समय बदलता गया और वे सुर और संगीत में माहिर बन गए. 2011 में 13 साल की उम्र में सलमान ने एक सिंगिंग रियलिटी शो में हिस्सा लेने का फ़ैसला किया.

ज़ी टीवी पर आने वाला शो 'सा रे गा मा पा लिटिल चैंप्स' में वह रनर-अप रहे और लोगों की नज़रों में आए.

इसके बाद उनको हरियाणा सरकार ने इनाम के तौर पर 21 लाख रुपए दिए. सलमान अली को समझ आने लगा कि अपनी आवाज़ का सही जगह इस्तेमाल करने पर उनके सपने पूरे हो सकते हैं और घर की स्थिति सुधर सकती है.

उन्होंने और मेहनत की. अपनी आवाज़ पर और काम किया. इस दौरान सलमान ने सरोजपुर में स्थित एक प्राइवेट स्कूल, अरावली स्कूल में बतौर संगीत टीचर काम करना शुरू किया.

यहां वह बच्चों को छोटी सी उम्र में ही संगीत का पाठ पढ़ाना शुरू कर दिया, जहां किस्मत उनकी एक अलग कहानी लिखने को तैयार थी.

2018 में इंडियन आइडल सीज़न 10 शुरू हो रहा था. सलमान को जैसे ही इस बात का पता चला वह हरियाणा में होने वाले ऑडिशन राउंड में पहुंच गए.

सलमान अली बताते हैं कि वह ऑडिशन राउंड को अपना पहला और आख़िरी मौका मानकर चल रहे थे.

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Image caption इंडियन आइडल के ऑडिशन राउंड में 'सजदा' गाकर जीता जजों का दिल.

वो पहला गाना

इंडियन आइडल में नेहा कक्कड़, विशाल डडलानी और अनु मलिक (जिनको बाद में यौन उत्पीड़न के आरोप के चलते शो छोड़ना पड़ा था) के सामने उन्होंने 'सजदा' गाने का सोचा.

वह कहते हैं कि वह ऐसा गाना चुनना चाहते थे जिसमें तान के साथ-साथ ऐसे एहसास भी हों जो दिल को छू जाए.

और उनका यह चुनाव सही रहा, उनका ये गाना जजों के दिल तक पहुंचा. फिर इंडियन आइडल के हर पड़ाव, हर मंच पर उनका हर गाना ना सिर्फ़ उस शो को जज करने वालों को उनका दीवाना बना रहा था बल्कि शो में आ रहे सभी मेहमानों को भी उनका मुरीद बना रहा था.

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Image caption 2011 में 'सा रे गा मा पा लिटिल चैंप्स' में जो दोस्त बना था वही सलमान के साथ इंडियन आइडल के फ़ाइनल तक पहुंचा

एक अनोखा संयोग

फ़ाइनल में वह तो पहुंचे ही साथ ही में उनके ख़ास दोस्त और इंडियन आइडल के कंटेस्टेंट नितिन कुमार भी पहुंचे. सिंगर नितिन कुमार को वह इंडियन आइडल से पहले से जानते थे. नितिन कुमार और सलमान अली 2011 में 'सा रे गा मा पा लिटिल चैंप्स' में भी एक साथ फ़ाइनल में पहुंचे थे.

इन दोनों के साथ पहुंचे तीन और दावेदारों में से कोई एक 25 लाख रुपए, एक कार, देश का दिल और इंडियन आइडल का टाइटल जीत सकता था, जिसके लिए सलमान चुने गए. दूसरे स्थान पर अंकुश भारद्वाज रहे वहीं दूसरी रनर-अप नीलांजना रे रहीं.

जब उनसे पूछा गया कि 25 लाख रुपयों का वह क्या करेंगे तो वह कहते हैं कि सबसे पहले उनके परिवार पर जो कर्ज़ है उसे उतारेंगे.

वे इसी में आगे बताते है कि छोटी सी उम्र में ज़िम्मेदारियों का एहसास होना अपने आप में बड़ी बात है लेकिन इन संघर्षों के बीच बॉलीवुड में अपनी एक पहचान बनाना अब उनकी संघर्ष की अगली कहानी लिखेगा.

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