जब सात दिन तक अमिताभ बच्चन ने मुंह नहीं धोया

  • 20 जनवरी 2019
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पंढ़री जुकर हिंदी सिनेमा के वो मेकअप आर्टिस्ट हैं जिन्होंने अपने 60 साल इंडस्ट्री को दिए.

ब्लैक एंड व्हाइट फ़िल्मों से अपना करियर शुरू करने वाले जुकर को सब पंढ़री दादा के नाम से जानते हैं.

फ़िल्मी दुनिया में तीन दशक तक मेकअप का काम करने वाले पंढ़री दादा अब 87 साल के हो चले हैं और आज भी मेकअप के काम से उतना ही प्यार करते हैं जितना उन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में जाने-माने निर्माता, निर्देशक और अभिनेता वी शांताराम का मेकअप करते हुए महसूस किया था.

1948 में बिना किसी इरादे से मेकअप की दुनिया में आए पंढ़री दादा के काम की सिफ़ारिश मशहूर अदाकरा नरगिस ने की थी.

उस ज़माने के मेकअप के उस्ताद बाबा वर्धन से मेकअप के गुण सीखने के बाद आगे चलकर उन्होंने मॉस्को से मेकअप आर्टिस्ट का डिप्लोमा भी हासिल किया.

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'झनक झनक पायल बाजे', चित्रलेखा, ताजमहल, नूर जहां, नील कमल, काला पत्थर, शोले, नागिन मिस्टर इंडिया, दिल वाले दुल्हनिया ले जाएंगे जैसी 500 से भी अधिक फ़िल्मों में मेकअप से चरित्रों को नया रंग देने वाले पंढ़री दादा के हाथों ने बहुत से कलाकारों को संवारा है जो भारतीय सिनेमा में मील का पत्थर साबित हुए.

इनमें मीना कुमारी, मधुबाला, नूतन, दिलीप कुमार, राज कपूर,अशोक कुमार, देव आनंद, राजेश खन्ना, सुनील दत्त, अमिताभ बच्चन, राज कुमार, शाहरुख़ ख़ान, आमिर ख़ान, करीना कपूर, विद्या बालन और माधुरी दीक्षित जैसे कई सितारे हैं.

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घर के हालात ने बनाया मेकअप आर्टिस्ट

कई पुरस्कारों से सम्मानित पंढ़री जुकर बीबीसी से ख़ास बातचीत में कहते हैं, "मेरा मेकअप आर्टिस्ट बनने का कोई इरादा नहीं था, क्योंकि मुझे ये लाइन पसंद नहीं थी. मेरे पिता को भी सबने यही कहा था कि ये लाइन अच्छी नहीं है लेकिन घर के हालात बिल्कुल ठीक नहीं थे. मेरी ग़रीबी देखते हुए मेकअप आर्टिस्ट बाबा वर्धन, जो मेरे पड़ोसी थे, उन्होंने मुझे उनके साथ जुड़ने का सुझाव दिया."

वो कहते हैं, "राजकमल स्टूडियो में जो भी फ़िल्म बनती मैं उनके सभी कलाकारों का मेकअप करने लगा. इस काम के लिए मुझे 70 रुपये महीना मिला करता था. मेरे काम को देखते हुए नरगिस ने मुझे फ़िल्म 'प्रदेश' के लिए रूस जाने का मौका दिया और मैंने मेकअप का डिप्लोमा हासिल किया."

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"ये सब नरगिस जी की मदद से ही संभव हो पाया. अगर नरगिस का मुझपर भरोसा ना होता तो शायद मुझे कभी बड़ा मौका नहीं मिलता. नरगिस की ही तरह मुझे अभिनेत्री मीना कुमारी ने भी बहुत मौके दिए. उन्होंने अपनी शुरुआती फ़िल्म से लेकर आखिरी फ़िल्म पाकीज़ा का मेकअप उन्होंने मुझसे ही करवाया था."

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ब्लैक एंड वाइट फ़िल्मों के ज़माने में मेकअप करना मुश्किल था

पंढ़री बताते हैं कि ब्लैक एंड वाइट फ़िल्मों के ज़माने में मेकअप करना बड़ा मुश्किल होता था. आपकी छोटी से छोटी ग़लती भी पकड़ ली जा सकती थी.

वो कहते हैं, "मेकअप के तौर पर हम सिर्फ़ काजल पेंसिल, मैरून लिपस्टिक और पाउडर का ही इस्तेमाल किया करते थे.

लेकिन जब रंगीन सिनेमा आया तो मेकअप आर्टिस्ट का काम थोड़ा आसान हो गया.

वो बताते हैं, "दिलीप कुमार हमेशा कहा करते थे कि हमारे कर्ता धर्ता ये लोग हैं. जवान को बूढ़ा और बूढ़े को जवान, साधारण दिखने वाले इंसान को भी सुन्दर बनाना ये पंढ़री का कमाल है."

वो कहते हैं, "आपको बताना चाहूंगा अभिनेताओं में दिलीप कुमार, धर्मेंद्र और सुनील दत्त ऐसे कलाकार हैं जिनका मेकअप चुटकियों में हो जाया करता था. इनकी पर्सनालिटी बहुत सुन्दर रहा करती थी. ये बिना मेकअप के भी बहुत सुन्दर नज़र आते थे."

पंढ़री कहते हैं, "अगर मैं अभिनेत्रियों की बात करूं तो नूतन और दिव्या भारती ऐसी अभिनेत्रियां थीं जो बिना मेकअप के भी बहुत सुन्दर लगती थीं. उनके चेहरे का कॉम्प्लेशन ऐसा था जिसे ज़्यादा मेकअप लगाने की ज़रूरत ही नहीं पड़ती थी."

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अमिताभ बच्चन को कहा था- "तुम बहुत आगे जाओगे"

एक अच्छा मेकअप आर्टिस्ट होने के साथ-साथ आपको पेंटिंग की भी अच्छी समझ होनी चाहिए. ये कहना है पंढ़री जुकर का.

वो कहते हैं कि जब भी हमें किसी अभिनेता को किरदार में ढालना होता है, तो हम पहले उनका स्कैच तैयार किया करते थे. जैसे मिस्टर इंडिया में मोगेंबो और या फिर शोले में गब्बर.

ऐसी कई फ़िल्में हैं जिनके हीरो और विलन दोनों का मेकअप पंढ़री जुकर ने किया.

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वो बताते हैं, "मुझे आज भी याद है जब मैं 365 दिन कलाकारों का मेकअप किया करता था. हर कलाकार चाहता था कि उनका मेकअप मेरे हाथों ही हो. इसके लिए वो घंटों इंतज़ार किया करते थे. मुझे याद है अमिताभ बच्चन की पहली फ़िल्म की शूटिंग गोवा में चल रही थी और मैं इस फ़िल्म के सभी कलाकारों का मेकअप कर रहा था. अमिताभ को मैंने दाढ़ी लगाई थी और अचानक मुझे किसी ज़रूरी काम से 7 दिन के लिए अपने घर मुंबई जाना पड़ा था."

पंढ़री बताते हैं, "तब मैंने अमिताभ को पूछा था कि अब तुम क्या करोगे, क्योंकि मैं तो गोवा में नहीं हूँ. तब अमिताभ ने कहा था कि मैं इस मेकअप को संभाल कर रखूँगा. पूरे 6 दिन अमिताभ चेहरे के नीचे पानी डालकर नहाते थे और अपने उसी लुक के साथ उन्होंने 6 दिन बिना मुँह धोए लगातार शूटिंग की."

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Image caption फ़िल्म सात हिंदुस्तानी में अमिताभ बच्चन

"मैं जब 6 दिन बाद उनसे मिला तो वो दाढ़ी उनके चेहरे पर सही सलामात थी. वो कैसे सोता होगा? कैसे खाना खाता होगा, ये सब सोच कर मैं बहुत हैरान हुआ था. तब मैंने उसको कहा था कि तुम बहुत आगे तक जाओगे. तुम्हारा काम के लिए ये प्रेम तुम्हें एक दिन सुपरस्टार बनाएगा."

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"माधुरी को हीरोइन क्यों नहीं लेते?"

ऐसे बॉलीवुड में कई सितारे हैं जो बिना मेकअप के बहुत साधारण दिखते हैं, लेकिन मेकअप के बाद उनकी कायापलट हो जाती है.

पंढ़री दादा के मुताबिक माधुरी दीक्षित ऐसे ही सितारों में हैं. शुरू-शुरू में बिना मेकअप के माधुरी खूबसूरत नहीं दिखती थी.

पंढ़री जुकर बताते हैं, "सुभाष घई ने कर्मा फ़िल्म के एक गाने के लिए माधुरी दीक्षित को लिया था लेकिन जब मैंने माधुरी को देखा, तो सुभाष घई को कहा कि इस लड़की के नयन-नक्श सुंदर हैं. तुम इसे हीरोइन क्यों नहीं लेते? लेकिन सुभाष ने मना कर दिया और कहा कि ये लड़की बहुत साधारण है, मुझे इसमें हीरोइन वाला चार्म नहीं दिखता. सुभाष का कहना था कि तुम इसकी सिफ़ारिश इसलिए कर रहे हो क्योंकि ये तुम्हारे महाराष्ट्र की है."

"तब मैंने सुभाष को कहा कि ऐसी कोई बात नहीं है. मुझे आधा घंटा दो मैं इसकी सुंदरता तुम्हें दिखाता हूँ और तब मैंने माधुरी का मेकअप किया और सुभाष के सामने पेश किया. माधुरी को देखते ही उन्होंने कर्मा फ़िल्म का वो गाना हटा दिया और अपनी अगली फ़िल्म में उन्होंने माधुरी को लीड हीरोइन का किरदार दे दिया."

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श्रीदेवी के मेकअप में लगता था काफ़ी समय

पंढ़री जुकर और यश चोपड़ा का साथ पूरे 40 साल रहा. उन्होंने यश चोपड़ा की शुरुआती फ़िल्म से लेकर आख़िरी फ़िल्म तक काम किया.

पंढरी कहते हैं, "चांदनी, दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे, सिलसिला, यश चोपड़ा की सभी फ़िल्मों से लेकर, सभी कलाकारों को खूबसूरत बनाया. श्रीदेवी को तैयार करने में काफ़ी समय लगता था क्योंकि उनकी आँखों के मेकअप से लेकर हर चीज़ पर ध्यान देते थे और श्रीदेवी भी कभी जल्दबाज़ी नहीं करती थी."

"लेकिन काजोल के लिए मुझे याद है कि वो दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे के दौरान अपना खुद का मेकअप मैन लेकर आई थीं, लेकिन यश जी ने कहा कि तुम्हारा मेकअप पंढ़री ही करेंगे. तब मैंने काजोल का मेकअप किया था और उनको बहुत पसंद भी आया था."

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आज रामायण की सीता को भी आईशेडो लगाया जाता है

पंढ़री कहते हैं, "आज वक़्त बदल गया है और कई तकनीक भी आ गई है. सुनील दत्त साहब की फ़िल्म रेशमा और शेरा के लिए मैं पूरे तीन महीने राजस्थान में रहा. वो दौर ही कुछ और था, जब एक्टर धूप में बिना किसी वैनिटी वैन के घंटों शूटिंग करते थे और हम उनके साथ रहा करते थे. लेकिन आज सब कुछ एडवांस हो गया है."

पंढ़री कहते हैं, "आज कई मेकअप आर्टिस्ट हैं जो पैसों के लिए काम करते हैं. आज टीवी सीरियल में रामायण की सीता को भी आई शेडो लगाया जाता है. ये भी नहीं सोचते कि हम किस दौर को दिखा रहे हैं. वक़्त बदल गया है पहले दिलीप कुमार, संजीव कुमार जैसे कलाकार हमें कहते थे खाना साथ ही खाएंगे. पहले लोग काम और नाम के भूखे थे. मेकअप आर्टिस्ट को बहुत इज़्ज़त मिला करती थी, लेकिन अब सब कुछ बदल गया है."

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