भारत से ग़ुस्से में अपना ही नुक़सान कर रहा पाकिस्तान

  • 13 मार्च 2019
पाकिस्तान इमेज कॉपीरइट Humsafar

जब भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान में एयर स्ट्राइक की तो पाकिस्तान ने न सिर्फ़ इसका बलपूर्वक जवाब दिया बल्कि उसने भारतीय सिनेमा और टेलीविज़न पर भी रोक लगा दी.

पाकिस्तान का इस तरह अपना ग़ुस्सा जताना और बदला लेना आसान था लेकिन इत्तेफ़ाक से पाकिस्तान का ये दांव उल्टा पड़ गया.

बीबीसी के इलयास ख़ान और शुमाइला जाफ़री ने अपनी रिपोर्ट में यही समझने की कोशिश की.

भारत और पाकिस्तान साल 1947 के बँटवारे से ही एक-दूसरे के भिड़ते आ रहे हैं.

लेकिन बॉलीवुड को लेकर उनका प्रेम संघर्ष की तमाम घटनाओं के बाद भी बना रहा और आज भी है.

इसके बावजूद, नियंत्रण रेखा के इस पार या उस पार अगर कुछ भी होता है तो उसका सीधा असर बॉलीवुड पर पड़ता है और बॉलीवुड सीधे इसकी चपेट में आ जाता है.

रोज़ी-रोटी से जुड़ा मामला

पाकिस्तान असोसिएशन ऑफ़ फ़िल्म एक्ज़ीबिटर्स का कहना है कि वे भारतीय फ़िल्मों की रिलीज़ पर प्रतिबंध लगा रहे थे और पाकिस्तान की सर्वोच्च अदालत ने एक क़दम और आगे बढ़ते हुए आदेश दे डाला कि भारत से जुड़ा कुछ भी प्रसारित नहीं होगा.

यहां तक कि स्थानीय चैनल पर भी नहीं. यह प्रतिबंध भारतीय विज्ञापनों, धारावाहिकों और यहां तक की फ़िल्मों पर भी लागू होता है.

इमेज कॉपीरइट Getty Images

पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने प्रतिबंध लगाते हुए कहा कि कौन होगा जो भारत का मनोरंजन देखना चाहेगा जबकि भारत घुसपैठ कर रहा हो?

24 साल की छात्रा अक्शा ख़ान इस बात को पूरे दिल से स्वीकार करती हैं.

अक्शा कहती हैं, "वो हमारे ऊपर युद्ध थोप रहे हैं और ऐसे में हम कैसे उनकी फ़िल्मों और धारावाहिकों को अपने यहां रिलीज़ होने दे सकते हैं? "

लेकिन पाकिस्तान में भारतीय फ़िल्मों और धारावाहिकों पर लगने वाले प्रतिबंध की वजह से सबसे अधिक प्रभावित कौन होगा, ये अभी भी देखना बाकी होगा.

भारतीय सिनेमा और धारावाहिकों को पसंद करने वाले पाकिस्तान में बहुत से लोग हैं लेकिन देशभक्ति के चलते वो इस प्रतिबंध के समर्थन में हैं.

अली शिवारी नाम के एक शख़्स कहते हैं "मैं तो शाहरुख़ ख़ान, आमिर ख़ान और सलमान ख़ान को देखते हुए बड़ा हुआ हूं."

अली भारतीय सिनेमा से बहुत प्रभावित हैं और भारतीय सिनेमा देख-देखकर ही उन्होंने फ़िल्म की पढ़ाई करने का फ़ैसला किया.

वह कहते हैं, "पाकिस्तानी इंडस्ट्री में अभी वैसा कुछ मिलने में वक़्त लगेगा."

कमाई का क़िस्सा

इसके अलावा सबसे अधिक ज़रूरी है आर्थिक परिणाम.

पाकिस्तान में मौजूद एक फ़िल्म पत्रकार रफ़य महमूद कहते हैं, "पाकिस्तान का बॉक्स ऑफ़िस बचा रहे इसके लिए भारतीय सिनेमा का होना जरूरी है."

पाकिस्तान में लगभग 120 मूवी थिएटर हैं.

महमूद के मुताबिक़, एक औसतन अच्छी फ़िल्म बॉक्स ऑफ़िस पर लगभग दो सप्ताह तक टिकी रहती है. उनके आंकड़ों के आधार पर पाकिस्तानी सिनेमा को कम से कम 26 नई फ़िल्में दिखानी होती हैं ताकि सिनेमाई व्यापार चलता रहे.

एक अन्य, मनोरंजन जगत में दख़ल रखने वाले पत्रकार हसन ज़ैदी कहते हैं कि दरअसल, क़रीब 70 फ़ीसदी पाकिस्तानी मूवी इंडस्ट्री का रेवेन्यू भारतीय फ़िल्मों से आता है.

इमेज कॉपीरइट Getty Images

वो कहते हैं कि यह प्रतिबंध बहुत लंबे समय तक टिका नहीं रह सकता है.

"पाकिस्तानी इंडस्ट्री, बिना भारतीय इंडस्ट्री के आगे बढ़ ही नहीं सकती."

इस बात के सुबूत भी हैं कि जब-जब पाकिस्तान ने भारतीय फ़िल्मों और धारावाहिकों पर प्रतिबंध लगाया है तो पाकिस्तान को किस तरह के हालात का सामना करना पड़ा है.

यह कोई पहली बार नहीं है जब पाकिस्तान ने भारतीय मनोरंजन को प्रतिबंधित किया है.

सबसे लंबा यह प्रतिबंध 40 साल तक रहा. भारत के साथ 1965 के युद्ध के बाद 40 सालों तक पाकिस्तान में भारतीय सिनेमा पर प्रतिबंध रहा.

एक बार जब ये प्रतिबंध हटा तो पाकिस्तानी फ़िल्म इंडस्ट्री जो नब्बे के दशक में लगभग मृतप्राय सी हो चुकी थी, वो भी धीरे-धीरे जी उठी.

पाकिस्तान ने दी प्रतिक्रिया

पाकिस्तान की न्यूज़ वेबसाइट डॉन न्यूज़ वेबसाइट की संपादक अतिका रहमान का कहना है कि प्रतिबंध हटने के बाद पाकिस्तानी सिनेमा ने तरक्क़ी की तो धीरे-धीरे दर्शक भी सिनेमा की ओर लौटने लगे.

वो कहती हैं, "इसने पाकिस्तानी फ़िल्म मेकर्स को भी बढ़ावा दिया और उन्होंने भी फ़िल्में बनाना शुरू कर दिया."

इसके चलते पाकिस्तानी इंडस्ट्री बहुत पिछड़ गई. पूरे पाकिस्तान भर में सैकड़ों थिएटर शॉपिंग मॉल्स में तब्दील हो गए और बहुत से थिएटर शादी के मंडपों में बदल गए.

एक बात ये भी है कि पाकिस्तानी फ़िल्में कभी भी भव्यता और स्टार कास्ट के मामले में बॉलीवुड की बराबरी नहीं कर सकतीं.

सिनेमा जगत से जुड़े एक विशेषज्ञ कहते हैं कि ये बताता है कि हाल के सालों में बॉलीवुड की फ़िल्मों को 60 फ़ीसदी फ़िल्म स्क्रीनिंग क्यों मिलती है. हॉलीवुड की फ़िल्में भी इसके पीछे ही आती हैं.

सही कहें तो हाल में भारतीय सामग्री पर पाकिस्तान में जो प्रतिबंध लगे हैं, वो प्रतिक्रिया की तरह हैं. इससे पहले अखिल भारतीय सिने वर्कर्स असोसिएशन ने पुलवामा हमले के बाद पाकिस्तानी कलाकारों और अभिनेताओं पर प्रतिबंध लगाया है.

ये पहला मौक़ा नहीं है जब भारत ने इस तरह का प्रतिबंध लगाने का ऐलान किया हो. इससे पहले पाकिस्तान के फवाद ख़ान को बॉलीवुड फ़िल्मों में काम करने से रोक दिया गया था जब एक दक्षिणपंथी समूह ने 2016 में सर्जिकल स्ट्राइक के बाद सभी पाकिस्तानी कलाकारों को देश छोड़कर जाने का आदेश दिया था.

फवाद ख़ान ने बॉलीवुड की कई फ़िल्मों में काम किया है और भारत में उनके प्रशंसकों की भी कोई कमी नहीं है.

इमेज कॉपीरइट MAHIRAHKHAN/INSTAGRAM

इसके अलावा जब 2017 में बॉलीवुड एक्टर शाहरुख ख़ान ने अपनी एक फिल्म में पाकिस्तानी अभिनेत्री माहिरा ख़ान के साथ काम किया था तो इस पर भी भारत में काफ़ी विवाद हुआ था.

भारत में दक्षिणपंथी समूहों ने इस फ़िल्म की रिलीज़ रोकने की मांग करते हुए काफ़ी विवाद किया. इसके बाद भारत में इस फ़िल्म की रिलीज़ डेट टाली गई. लेकिन पाकिस्तान में ये फ़िल्म रिलीज़ नहीं हो सकी.

पाक सेंसर बोर्ड ने फ़िल्म को आपत्तिजनक बताते हुए रिलीज़ रोक दी.

पाकिस्तानी फ़िल्म निर्माता नदीम मांडवीवाला उम्मीद करते हैं कि ये प्रतिबंध अल्पकालिक है.

वह कहते हैं, "उम्मीद है कि दोनों देशों में समझ का विकास होगा."

लेकिन ये भूलना नहीं चाहिए कि आजकल बॉलीवुड को पसंद करने वाले नेटफ़्लिक्स और उस जैसे तमाम दूसरे प्लेटफॉर्म्स पर बॉलीवुड फ़िल्में देख सकते हैं, ऐसे में ये प्रतिबंध प्रतीकात्मकता से ज़्यादा कुछ नहीं है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए

संबंधित समाचार