वर्ल्ड गिटार डेः गिटार पर सुपरहिट धुन छेड़ने वाले वो सितारे जो गुमनामी में खो जाते हैं

  • 21 सितंबर 2019
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Image caption भूपिंदर और आरडी बर्मन

दम मारो दम मिट जाए ग़म.... कश लगाती ज़ीनत अमान पर फ़िल्माया गया ये हिप्पी गाना जब शुरू होता है तो सबसे पहले सुनाई देती है गिटार की धुन.

ये धुन इसकी पहचान बन चुकी है.

इस गाने को बनाने वाले आरडी बर्मन, गाना गाने वाली आशा भोंसले और गाना लिखने वाले आनंद बख़्शी का नाम तो सब जानते हैं.

लेकिन उस कलाकार का नाम कम ही लोग जानते हैं जिन्होंने अपने गिटार से गीत में चार चाँद लगाए.

उस गिटारिस्ट का नाम है भूपिंदर सिंह जो क़रीब 20 साल तक बतौर गिटारिस्ट काम करते थे. ये वही भूपिंदर हैं जो बाद में बतौर गायक भी मशहूर हुए.

वर्ल्ड गिटार डे के मौके पर आज गिटार से सजे कुछ मशहूर गानों और इन गानों में गिटार बजाने वाले कलाकारों की बात करते हैं जिनका ज़िक्र कम ही होता है.

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Image caption गोरख शर्मा ने 70, 80 और 90 के दशक में कई बेहतरीन गानों के लिए गिटार बजाई

एक हसीना थी...

सुभाष घई की फ़िल्म 'कर्ज़' का वो क्लाइमेक्स सीन याद कीजिए जब मॉन्टी (ऋषि कपूर) स्टेज पर गिटार बजाता है और उसे सुनकर सिमी गरेवाल को उनका अतीत याद आता है.

जब शूटिंग चल रही थी तो ऋषि कपूर ने सुभाष घई से कहा कि सीन करते समय अगर वाकई कोई धुन बज रही हो तो उन्हें आसानी होगी.

सुभाष घई ने कुछ मोहलत माँगी और लक्ष्मीकांत प्यारेलाल से गिटार पर सजी वो धुन लेकर आए - 'एक हसीना थी'.

पर्दे पर भले ही वो गिटार ऋषि कपूर ने बजाई हो लेकिन असल में इसे ऋषि कपूर के लिए बजाया था गिटारिस्ट गोरख शर्मा ने जो प्यारेलाल के भाई भी थे.

साल 2018 में उनका निधन हो गया.

गोरख शर्मा ने सत्तर, अस्सी और 90 के दशक में कई बेहतरीन गानों के लिए गिटार बजाई.

ऋषि कपूर के लिए ही फ़िल्म बॉबी में 'मैं शायर तो नहीं' एक ख़ूबसूरत मिसाल है.

'ये कहाँ आ गए हम'... फ़िल्म सिलसिला के इस गाने में अमिताभ बच्चन की आवाज़ के बीच गिटार के जो ख़ूबसूरत नोट सुनाई देते हैं वो भी गोरख शर्मा के ही हैं.

आशिक़ी के गाने 'साँसों की ज़रूरत है जैसे' में उनकी बजाई गिटार गाने में जान भरती है तो जादू तेरी नज़र में भी उनकी ही गिटार का जादू था.

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चुरा लिया है तुमने जो दिल को...

गायक बनने से बहुत पहले भूपिंदर फ़िल्म इंडस्ट्री के उम्दा गिटारिस्ट थे जो अक्सर आरडी बर्मन के साथ काम करते थे.

दम मारो दम के अलावा भूपिंदर ने फ़िल्म यादों की बारात के मशहूर गाने 'चुरा लिया है तुमने जो दिल को' में भी गिटार बजाया था.

शुरू के दिनों में उन्हें चेतन आनंद ने मौका दिया 1966 की फ़िल्म 'आख़िरी ख़त' में जो राजेश खन्ना की पहली फ़िल्म थी.

उस फ़िल्म के एक गाने में भूपिंदर ने सिर्फ़ गिटार बजाई है, वो गाना गाया भी और वो गाना भूपिंदर पर फ़िल्माया भी गया और ऐसा इत्तेफ़ाक़ कम ही होता है.

गाना था 'रुत जवां जवां, रात मेहरबां. छेड़ो कोई दास्तां.'

नीले नीले अंबर पे...

1983 में आई फ़िल्म कलाकार का एक सीन- रात के अंधेरे में एक आर्टिस्ट अपनी ही धुन सें सवार गिटार लिए गाना गाता है- 'नीले नीले अंबर पे'.

वहाँ पास में रहने वाली एक लड़की( श्रीदेवी) उसी शिद्दत से चोरी चोरी वो गाना सुनती है.

इस गाने में बजाए गए गिटार के नोट्स को कई गिटार बजाने वाले बेंचमार्क मानते हैं.

पर्दे पर तो ये गिटार कुनाल गोस्वामी ( मनोज कुमार के बेटे) ने बजाई थी लेकिन असल में इसे बजाया था रमेश अय्यर ने जो फ़िल्मों में दिग्गज गिटार आर्टिस्ट थे.

ये गाना वैसे पहले तमिल में संगीतकार इलयाराजा ने बनाया था जिसमें पर्दे के पीछे चंद्रशेखर नाम के कलाकार ने गिटार बजाया था.

फ़िल्म 'सागर' में ऋषि कपूर अपनी चाहत बयां करने के लिए जब 'चेहरा है या चाँद खिला है' गाते हैं तो दरअसल अकूस्टिक गिटार पर ऋषि कपूर के नहीं रमेश अय्यर के हाथ जादू चला रहे होते हैं.

रमेश अय्यर पर भरोसा

1980 में आई फ़िल्म 'शान' जब शुरू होती है तो इसके टाइटल ट्रैक में गाना आता है 'जो भी किया शान से'.

इसमें बेहतरीन गिटार बजाने वाले भी हैं रमेश अय्यर जिनका सितंबर 2019 में ही निधन हुआ है.

फ़िल्म रॉकी के गाने 'क्या यही प्यार है' का आगाज़ भी ख़ूबसूरत गिटार से होता है जिसके लिए आरडी बर्मन ने रमेश अय्यर पर ही भरोसा किया.

ज़िंदगी को गले लगाने का फ़लसफ़ा समझाने वाली फ़िल्म 'सदमा' का गाना भी रमेश अय्यर की इलेक्ट्रिक गिटार से ही निकला है.

इसी तरह सैम्युल नसरीरुद्दीन दौला नाम के एक गिटार आर्टिस्ट थे जो लुधियाना में रहते और जब बॉम्बे आते तो फ़िल्मों में गिटार बजाते.

मशहूर गाना 'बार बार देखो' में उनका कमाल सुना जा सकता है.

ये उनकी गिटार का भी असर था कि 'ये चाँद सा रोशन चेहरा' की मस्ती और ख़ुमार सुनने वाले के सर पर आज भी छा जाता है.

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Image caption भानु गुप्त

ग़ुमनाम कलाकार

टोनी वाज़, सुनील कौशिक, चरनजीत सिंह, भानु शर्मा ये सब बेहतरीन गिटार आर्टिस्ट थे.

प्यार में दिल पे मेरे मार दे गोली, दिलबर मेरे कब तक मुझे ऐसे ही तड़पाओगे, जाने जां ढूँढती फिर रही हूँ...इन सब गानों में टोनी वाज़ का कमाल था.

इस फ़ेहरिस्त में एक और गीत है- ये मेरा दिल प्यार का दीवाना जिसमें गिटार का बेहतरीन इस्तेमाल किया गया है.

माचिस का संगीत देने के बाद भी जब विशाल भारद्वाज को गानों में एक खालीपन सा लग रहा था तो उन्होंने टोनी वाज़ की ही मदद ली थी.

आरडी बर्मन के एक और पंसदीदा कलाकार थे दिलीप नायक.

उनका कमाल देखने के लिए आपको तीसरी मंज़िल के गाने 'आजा आजा मैं हूँ प्यार तेरा' का सिर्फ़ पहला एक मिनट 12 सेकेंड सुनना होगा.

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पर्दे के पीछे

आज के कलाकारों की बात करें तो चिंटू सिंह ने कई गानों में गिटार बजाया है.

'अल्लाह के बंदे हस दे' गाने में कैलाश खेर गिटार बजाते हुए अपनी बुलंद आवाज़ में गाना गाते हैं पर असल में ये गिटार बजाई चिंटू सिंह ने.

फ़िल्म ओमकारा और ओम शांति शांति में भी उन्होंने गिटार बजाई.

ये सारे कलाकार अलग अलग विधा में माहिर थे- जैसे स्पेनिश गिटार, हवाईयन गिटार, इलेक्ट्रिक गिटार.

फ़िल्में हिट होती हैं, गाने हिट होते हैं, गाना गाने वाले हिट होते हैं और हिट होते हैं इनका म्यूज़िक देने वाले.

लेकिन जो कलाकार पर्दे के पीछे रहकर इन गानों में जान भरते हैं वो अक्सर ग़ुमनाम ही रह जाते हैं.

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