2019 की बड़ी घटनाओं को याद करवाते गीत कौन से हैं?

  • 29 दिसंबर 2019
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भारत और 2019- इस साल ऐसा काफ़ी कुछ हुआ जिसने कई लोगों को हैरान किया, कुछ को परेशान किया, कुछ के दिल टूटे और कई वादे भी टूटे. कुछ उम्मीदें धूमिल हुईं तो कुछ बंधी भी.

भारत को गीत-संगीत का देश भी कहा जाता है तो आइए पिरोते हैं साल 2019 को गीतों के ज़रिए. जानते हैं वो कौन-कौन से गाने हैं जिन्होंने इस साल हमारे ज़िंदगी को सुरमयी बनाने में मदद की.

1. फिर पीएम बने मोदी

भारतीय जनता पार्टी और नरेंद्र मोदी को 2019 के संसदीय चुनाव में ताबड़तोड़ जीत मिली. उस वक़्त भाजपा और मोदी कैंप में मूड कुछ यूँ रहा होगा जैसा फ़िल्म 'जो जीता वही सिकंदर' में नौजवानों का था

यहाँ के हम सिकंदर

चाहें तो रख लें सबको अपनी जेब के अंदर

अरे हमसे बचके रहना मेरे यार

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2. कांग्रेस की बड़ी हार

2019 में हुए संसदीय चुनाव में कांग्रेस को करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा. लोगों ने कांग्रेस और राहुल गांधी दोनों को बाहर का रास्ता दिखा दिया. कई लोग कहने लगे कि इनसे कुछ नहीं हो पाएगा. लेकिन कांग्रेस के लोग मानो यही उम्मीद लगाए बैठे रहे कि अपना टाइम आएगा.

कौन बोला मुझसे न हो पायेगा?

कौन बोला? कौन बोला?

अपना time आएगा

उठ जा अपनी राख से

तू उड़ जा अब तलाश में

परवाज़ देख परवाने की

आसमां भी सर उठाएगा

आएगा, अपना time आएगा..

कांग्रेस गठबंधन ने भले ही झारखंड में चुनाव जीत लिया हो लेकिन कांग्रेस की वापसी का रास्ता अभी लंबा है.

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3. कश्मीर और अनुच्छेद 370

अगस्त 2019 में अचानक कश्मीर में आर्टिकल 370 हटा दिया गया. कुछ लोग विरोध में आए तो कुछ समर्थन में. तब से ही वहाँ के बहुत सारे हिस्सों में इंटरनेट बंद है. नए साल के मौक़े पर बर्फ़बारी देखने जाने वाले बहुत सारे पर्यटक भी वहाँ नहीं जा पाए.

फ़िल्मों में दिखने वाले कश्मीर के ख़ूबसूरत नज़ारों में ही आप कश्मीर देख पा रहे हैं मसलन 1982 में आई अमिताभ बच्चन की फ़िल्म बेमिसाल का ये गाना, कश्मीर पर फ़िट बैठता है,

कितनी ख़ूबसूरत ये तस्वीर है

मौसम बेमिसाल बेनज़ीर है

ये कश्मीर है, ये कश्मीर है

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कश्मीर में 100 दिन बाद कैसे हैं हालात?

4. महाराष्ट्र की राजनीति

महाराष्ट्र में जब अक्तूबर में चुनाव हुए तो कई विश्लेषकों ने पहले से ही भाजपा की सरकार बनवा दी थी. लेकिन भाजपा और शिव सेना की लव स्टोरी में 50-50 के फ़ॉर्मूला पर आकर ब्रेकअप हो गया.

यहाँ राजेश खन्ना और टीना मुनीम की फ़िल्म फ़िफ्टी-फ़िफ्टी का वो गाना याद आता है जहाँ दोनों एक दूसरे को प्यार में 50-50 का वादा याद दिलाते हैं.

प्यार का वादा 50-50

क्या है इरादा 50-50

आधा आधा, 50-50

फ़िल्म के उलट, शिव सेना और भाजपा आधा-आधा नहीं कर पाए.

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5. उन्नाव और हैदराबाद रेप मामले

निर्भया गैंगरेप मामले के सात साल बाद, इन दो मामलों ने एक बार फिर लोगों को झकझोर कर रख दिया. हैदराबाद में एक वेटेनरी डॉक्टर के साथ सामूहिक बलात्कार कर उसे मार दिया गया. यहाँ इस गाने के बोल याद आते हैं जिसे स्वानंद किरकिरे ने लिखा और सोना महापात्रा ने गाया है.

ओ री चिरैया

नन्ही सी चिड़िया

अंगना में फिर आजा रे

हमने तुझपे हज़ारों सितम हैं किए

हमने तुझपे जहां भर के ज़ुल्म किए

हमने सोचा नहीं

तू जो उड़ जाएगी

ये ज़मीन तेरे बिन सूनी रह जाएगी

किसके दम पे सजेगा मेरा अंगना

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उन्नाव की बलात्कार पीड़िता की दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में मौत हो गई है.

6. कबीर सिंह फ़िल्म और उस पर लंबी चर्चा

इस सब के बीच फ़िल्म कबीर सिंह आई जो शायद साल की सबसे विवादित फ़िल्म रही. कुछ लोगों को ये बहुत पंसद आई पर कई लोगों के लिए ये फ़िल्म समाज की उसी पुरुषवादी सोच को दर्शाती है जिसकी झलक समाज में भी देखने को मिलती है.

आमिर ख़ान की फ़िल्म डेल्ही बेली का एक गाना था-

आई हेट यू, लाइक आई लव यू.

अगर किसी को वो गाना याद हो, ये फ़िल्म मुझे ऐसा ही महसूस कराती है.

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7. खेल खेल में

साल 2019 में भारत में गूगल सर्च में नंबर वन टर्म रहा Cricket World cup हालांकि भारत की टीम कप नहीं जीत सकी.

वहीं दूसरी ओर तमाम चुनौतियों के बावजूद भारत की महिला हॉकी टीम ने ओलंपिक के लिए क्वालिफाई किया. हॉकी की रानी कही जाने वाली महिला कप्तान रानी रामपाल ने अमरीका के ख़िलाफ़ कमाल का खेल खेला.

और कौन भूल सकता है महिला रग्बी टीम की वो ऐतिहासिक जीत जिसके बाद कोच से लेकर खिलाड़ी सबकी आँखों में आँसू थे.

चक दे ओ चक दे इंडिया

ये गाना इन महिला खिलाड़ियों के लिए सटीक बैठेगा.

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Image caption महिला हॉकी टीम

8. टिक टॉक का जादू

2019 में टिक टॉक का जादू भारतीय युवाओं पर चला. टिक टॉक पर मानो कोई भी, कैसे भी, कहीं से भी स्टार बन रहा है और जश्न मना रहा है. जैसे फ़िल्म सगीना में दिलीप कुमार ये गाना गाते हैं.

साला मैं तो साहब बन गया

साला मैं तो साहब बन गया

रे साहब बनके कैसा तन गया

ये सूट मेरा देखो,

ये बूट मेरा देखो

जैसे गोरा कोई लंदन का

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9. नागरिकता और आंदोलन

साल का अंत देश भर में प्रदर्शनों के साथ हो रहा है. नागरिकता संशोधन क़ानून और एनआरसी के विरोध में कई छात्रों से लेकर आम नागरिक इसमें सड़कों पर हैं. आंदोलत करती इस जनता के बीच फ़ैज़ की नज़्म हर जगह गूँज रही है.

लाज़िम है कि हम भी देखेंगे

वो दिन की जिसका वादा है

जो लौह-ए-अज़ल में लिख्खा है

जब ज़ुल्म-ओ-सितम के कोह-ए-गिराँ

रूई की तरह उड़ जाएँगे

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10. नई सुबह के लिए यह गाना

जाते-जाते एक गाना अपनी पसंद का भी. साहिर लुधियानवी के अल्फ़ाज़ और मुकेश की आवाज़, 1958 में आई फ़िल्म फिर सुबह होगी. गाना है-

वो सुबह कभी तो आएगी....

इन काली सदियों के सर से, जब रात का आंचल ढलकेगा

जब दुख के बादल पिघलेंगे, जब सुख का सागर छलकेगा

जब अंबर झूम के नाचेगा, जब धरती नज़्में गाएँगी

वो सुबह कभी तो आएगी....

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