कंगना: बॉक्स ऑफ़िस पर कामयाबी से लेकर विवादों की 'क्वीन' तक

  • इक़बाल परवेज़
  • फ़िल्म पत्रकार, मुंबई से बीबीसी हिंदी के लिए
कंगना

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67वें राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कारों में कंगना रनौत को मणिकर्णिका और पंगा के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का अवॉर्ड मिला है.

कंगना रनौत हिंदी फिल्म इंडस्ट्री का एक ऐसा नाम जो हमेशा सुर्ख़ियों में रहा है, हमेशा विवादों में रहा है, कभी अपने सधे हुए अभिनय को लेकर तो कभी लड़ाई झगड़ों को लेकर.

हिमाचल प्रदेश में जन्मीं कंगना ने जब अभिनय करने का प्लान बनाया तब सबसे पहले उन्होंने थिएटर डायरेक्टर अरविंद गौड़ से दिल्ली में अभिनय के गुण सीखे उसके बाद रुख किया मुंबई का.

मुंबई में आने के बाद कंगना की जद्दोजहद शुरू हुई मगर इन्हें साथ मिल गया आदित्य पंचोली का. दोनों की दोस्ती की ख़ूब चर्चा हुई और कंगना को आदित्य पंचोली की गर्लफ़्रेंड बताया गया.

मंज़िल की तलाश करते करते कंगना की मुलाकात फ़िल्मकार महेश भट्ट से हुई जिन्होंने 2006 में अनुराग बसु के निर्देशन में बनी फ़िल्म 'गैंगस्टर' में कंगना को लीड रोल दिया.

इस पहली फ़िल्म के क़िरदार ने ही कंगना को सुर्ख़ियों में लाकर खड़ा कर दिया क्योंकि ये क़िरदार परवीन बॉबी की ज़िंदगी से प्रेरित बताया गया. कंगना ने अपनी पहली ही फ़िल्म में इतना सधा हुआ अभिनय किया कि न सिर्फ़ वाहवाही मिली, इन्हें फ़िल्मफ़ेअर का बेस्ट डेब्यू अवार्ड भी मिल गया. यहां से कंगना ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा.

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साल 2007 में कंगना की 'वो लम्हे' और 'लाइफ़ इन ए मेट्रो' जैसी फिल्में आईं मगर 2008 की फ़िल्म 'फ़ैशन' ने कंगना को अलग मुकाम दे दिया. मधुर भंडारकर की फ़िल्म फैशन इंडस्ट्री की कहानी कह रही थी जिसमें प्रियंका चोपड़ा लीड रोल में थीं.

इस फ़िल्म में कंगना का क़िरदार छोटा था मगर वो छोटा क़िरदार इतना मजबूत बना कि इन्हें सपोर्टिंग रोल के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार मिला. इसी साल उनकी फिल्म 'राज़-3' रिलीज़ हुई थी.

2008 में कंगना सुर्ख़ियों में फिर आई अपने रिश्तों को लेकर जब राज़-3 के हीरो अध्ययन सुमन के साथ इनके रिलेशनशिप की ख़बरों ने हेडलाइन बनाना शुरू किया मगर कुछ ही समय में इनका रिश्ता टूट गया. यहां तक कंगना ने बॉलीवुड में अपने लिए अच्छा मुकाम तो हासिल कर लिया था मगर इनपर ठप्पा लग गया था एक ही तरह के सीरियस रोल करने का.

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वैसे ये भी हक़ीक़त है कि फ़िल्म इंडस्ट्री में जब कोई क़िरदार या कोई फ़ॉर्मूला हिट होता है तो उसकी लाइन लग जाती है. कंगना के साथ भी कुछ कुछ वैसा ही हो रहा था मगर कहते हैं कि नसीब अगर आपके साथ होता है तो मंज़िल तक पहुंचने में ज़रूरत की हर चीज़ आपके सामने आती है.

कंगना के सामने 2011 में आई रोमांटिक कॉमेडी फिल्म 'तनु वेड्स मनु'. कंगना ने मौका हाथ से जाने नही दिया और इस फ़िल्म ने कंगना के करियर को नए मोड़ पर पहुंचा दिया. इस फ़िल्म के सीक्वल को वैसे ही बड़ी कामयाबी मिली और सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला.

इन दोनों फिल्मों ने बॉक्स आफिस पर सफलता के साथ साथ दर्शकों से लेकर समीक्षकों की सराहना भी हासिल की. इस फ़िल्म का निर्देशन आनंद एल राय ने किया था और कंगना के साथ आर माधवन मुख्य भूमिका में थे.

2014 का साल आया जिसने कंगना को बॉक्स ऑफिस की क्वीन बना दिया. इसी साल फ़िल्म 'क्वीन' रिलीज़ हुई और कंगना ने बॉलीवुड में अपनी कामयाबी की नई इबारत लिख दी. विकास बहल द्वारा निर्देशित इस फ़िल्म ने भी कंगना को राष्ट्रीय पुरस्कार दिलवाया.

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किस्मत कंगना का साथ देती रही और हर 2-4 फ्लॉप फ़िल्म के बाद एक ऐसी फिल्म करियर में आती रही जिसने कंगना को टॉप पर बनाये रखा. 'मणिकर्णिका' में कंगना झांसी की रानी बनी. इस फ़िल्म का निर्देशन भी कंगना ने ही किया जिसमें उन्होंने झांसी की रानी की भूमिका निभाई थी.

शुरुआत से ही जैसे जैसे कंगना कामयाबी की सीढ़ियां चढ़ी वैसे वैसे विवादों की रानी बनती गईं. कंगना ने उनलोगों को भी अपना निशाना बनाया जिन्होंने कंगना के करियर में योगदान दिया. गैंगस्टर, लाइफ़ इन ए मेट्रो की सफ़लता के बाद कंगना ने आदित्य पंचोली के ख़िलाफ़ पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज की और आरोप लगाया शराब पीकर शारीरिक उत्पीड़न का हालांकि आदित्य पंचोली ने कंगना की स्ट्रगल में उनका साथ दिया था. ये केस उन दिनों मीडिया की सुर्ख़ियों में था.

2010 में फ़िल्म 'काइट्स' जब फ्लॉप हुई तो कंगना भिड़ गईं निर्देशक अनुराग बसु से जो उनकी पहली फ़िल्म गैंगस्टर के निर्देशक थे. कंगना ने आरोप लगाया कि काइट्स में जितना बड़ा रोल बताया गया था उतना बड़ा रोल नहीं था.

फ़िल्म राज़-3 की सफलता के बाद अध्ययन सुमन से ब्रेकअप हुआ और कंगना खूब विवादों में रहीं. ऋतिक रोशन के साथ झगड़े की ख़बर से दुनिया वाक़िफ है. कंगना ने ऋतिक पर रिलेशनशिप के कई आरोप लगाए थे.

ऋतिक रोशन पर कंगना ऐसी हमलावर हुई थी कि मामला पुलिस स्टेशन तक पहुंच गया था. कंगना और ऋतिक की उस लड़ाई में अध्ययन सुमन भी ऋतिक के समर्थन में उतरे थे और कहा था कि कंगना किस तरह से टॉर्चर करती थी उन्हें.

ऋतिक के बाद कंगना पीछे पड़ गईं करण जौहर के. करण जौहर को 'मूवी माफिया' का दर्जा दे दिया. कारण जौहर पर नेपोटिज़्म के आरोप लगाए और हर रोज़ करण जौहर को लड़ाई के मैदान में खींचा. हालाँकि करण जौहर विवाद से बचते नज़र आए. वैसे करण के साथ कंगना भी काम कर चुकी हैं फ़िल्म 'उंगली' में जो बहुत बड़ी फ्लॉप फ़िल्म थी.

फ़िल्म तनु वेड्स मनु जैसी फ़िल्म के निर्देशक आनंद एल राय, जिसने कंगना के करियर नए मोड़ पर पहुंचाया, उनके साथ भी कंगना की अनबन हुई और मीडिया में लगातार ये खबरें आईं कि अब आनंद काम नहीं करेंगे कंगना के साथ. 2015 के बाद दोनों साथ नज़र आए भी नहीं.

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कंगना का बंगला और ऑफ़िस कितना आलीशान है?

फ़िल्म 'सिमरन' की रिलीज़ से पहले भी कंगना सुर्ख़ियों में आईं. फ़िल्म के असल लेखक अपूर्व असरानी थे मगर कंगना ने अपना नाम पोस्टर पर लिखवा दिया.

2018 में जब मी टू मूवमेंट शुरू हुआ तब भी कंगना ने इंडस्ट्री पर निशाना लगा दिया. आरोप अपनी फिल्म क्वीन के निर्देशक विकस बहल पर लगा दिया और कहा कि "विकास अजीब तरह से हमसे गले मिलते थे और कहते थे कि तुम्हारे बालों से बड़ी अच्छी खुशबू आती है".

फ़िल्म मनिकर्णिका की शूटिंग के दौरान इतना कुछ हो गया कि फ़िल्म में एक अहम भूमिका निभाने वाले सोनू सूद ने फ़िल्म छोड़ दी. यहां तक कि फ़िल्म के निर्देशक कृष को भी बीच मे ही फ़िल्म छोड़नी पड़ी. बाद में इस फ़िल्म का निर्देशन खुद कंगना ने किया.

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कंगना रनौत अपनी पहली फ़िल्म से ही ये भली भांति जानती थीं कि उन्हें कैमरे पर किस तरह आना है. किस तरह उन्हें सुर्ख़ियां मिलेंगी. जब फ़िल्म गैंगस्टर की रिलीज के बाद मैं पहली बार उनका इंटरव्यू करने गया था तो उस समय वे फ़िल्म 'वो लम्हे' की शूटिंग कर रही थीं.

मुझे अच्छे से याद है कि बहुत अच्छा फ्रेम बना कर कैमरा लगया गया था मगर उन्होंने कैमरे का सेटअप बदलाव दिया था क्योंकि उन्हें राइट साइड का प्रोफाइल नहीं देना था. फ़िल्म मणिकर्णिका का मुहूर्त बनारस के 80 घाट पर हुआ था जहां मणिकर्णिका का बचपन गुज़रा था.

उस घाट पर सिर्फ़ गंगा आरती देखनी थी मगर कंगना अचनाक बिना किसी प्रोग्राम के पानी में उतर गईं और गंगा में डुबकी लगा दिया. वो जानती थीं कि गंगा में डुबकी लगाने वाला विजुअल खूब चलेगा मीडिया में. और ऐसा ही हुआ भी वो डुबकी हेडलाइन बनीं.

कई बार मैंने विवादों पर सवाल पूछा तो इसमें कोई शक नहीं कि बिना झिझक बिंदास होकर उन्होंने कहा, 'मैं जो कुछ भी हूं, अपने दम पर बनी हूं इसलिए किसी की परवाह नही करती.'

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सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद कंगना रनौत के तेवर और सख्त हो गए. उन्होंने पूरी फिल्म इंडस्ट्री को आड़े हाथों ले लिया. एक बार फिर कंगना ने नेपोटिज्म और 'मूवी माफ़िया' को उछाला. करण जौहर हों या सलमान खान, शाहरुख खान और आमिर ख़ान, सब पर निशाना साधा है.

इतना ही नहीं, उस महेश भट्ट से भी झगड़ा कर लिया जिसने कंगना को पहला मौका दिया और गैंगस्टर, वो लम्हे और राज-3 जैसी सफ़ल फिल्मों का हिस्सा बनाया. सुशांत की डेथ मिस्ट्री में जब ड्रग आया तब कंगना ने कहा कि बॉलीवुड में 99% लोग नशा करते हैं. हालांकि कंगना खुद अपने आप को ड्रग्स से दूर नहीं रख पाई हैं.

पिछले कुछ समय से कंगना फ़िल्म इंडस्ट्री के हर मुद्दों पर सामने तो आती ही हैं, साथ में देश के मुद्दों पर भी वो सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देती नज़र आती हैं. कंगना के ये बयान पूरी तरह से मोदी सरकार के समर्थन में नज़र आते हैं.

कई बार कंगना भाषा की मर्यादा भी तोड़ती नज़र आती हैं. दिल्ली दंगों पर कंगना की बहन रंगोली के ट्विटर हैंडल के ज़रिए ट्वीट कर कहा था कि "दिल्ली को सीरिया बना दिया. इन बॉलीवुड जिहादियों के सीने में ठंडक पड़ गई. कीड़ों की तरह मसल दो इन्हें."

सुशांत सिंह राजपूत के केस में भी कंगना न सिर्फ कूदीं बल्कि महाराष्ट्र सरकार को आड़े हाथों लिया जो कि कांग्रेस, एनसीपी और शिवसेना की सरकार है. कंगना ने मुंबई को पाक अधिकृत कश्मीर तक कह डाला जिसपर राजनीति भी तेज हो गई. बीजेपी और शिवसेना आमने सामने आकर खड़े हो गए.

बीजेपी खुलकर कंगना के समर्थन में आ गई और कंगना को वाई प्लस सिक्योरिटी तक दे दिया जिसके बाद कई लोग ये अनुमान लगा रहे हैं कि कंगना जल्द ही बीजेपी में जा सकती हैं और बीजेपी भी उन्हें अपनी पार्टी में शामिल कर सकती हैं.

नरेंद्र मोदी सरकार में शामिल राज्यमंत्री और राज्यसभा सांसद रिपब्लिकन पार्टी ऑफ़ इंडिया के अध्यक्ष रामदास अठावले कह चुके हैं कि बीजेपी स्वागत करेगी कंगना रनौत का.

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